जापान को पीछे छोड़कर जर्मनी बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, 13 सालों में दूसरी बार शर्मिंदगी!
Economic News: 13 साल पहले चीन ने जापान की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ दिया था और ऐसा लगता है, कि 13 सालों के बाद जापान को दूसरी बार शर्मिंदगी मिलने वाली है, क्योंकि जर्मनी, जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है।
इस हफ्ते अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कैलकुलेशन के आधार पर बताया है, कि जर्मनी की जीडीपी जापान की जीडीपी को पीछे छोड़ने वाली है। लिहाजा, जापान वैश्विक स्तर पर तीसरे से चौथे नंबर पर आ जाएगा। जो जापान की सत्तारूढ़ पार्टी के लिए काफी निराश करने वाला है।

माना जा रहा है, कि बहुत जल्द ये खबर जापानी अखबारों में सुर्खियां बटोरने वाला है और जापानी अर्थव्यवस्था का पिछड़ना, जापान की राजनीति में सत्ता परिवर्तन तक कर सकता है। अखबारों की सुर्खियां करीब साढ़े 12 करोड़ लोगों की आबादी वाले इस देश को सत्ता रूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को लेकर एक राय बनाने का मौका देगा, जिसका असर आने वाले वक्त में चुनाव में देखने को मिल सकता है।
जापान क्यों पिछड़ रहा है पीछे?
डॉलर और यूरो के मुकाबले येन में गिरावट से जर्मनी की अर्थव्यवस्था को 2023 में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का बड़ा मौका देगा। जापान की करेंसी येन में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे उसकी जीडीपी में गिरावट दर्ज की जा रही है।
आईएमएफ के नवीनतम अनुमानों का अनुमान है, कि इस वर्ष जर्मनी की नॉमिनल जीडीपी 4.4 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी, जबकि जापान की जीडीपी 4.2 ट्रिलियन डॉलर रहेगी। इससे जर्मनी आर्थिक आकार के मामले में केवल संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन से पीछे रह जाएगा। आंकड़े जर्मनी में स्थिर दीर्घकालिक विकास की ओर भी इशारा करते हैं, जो जापान में नीति निर्माताओं को चिंतित करेगा, क्योंकि वो अभी देश के लिए नये आर्थिक पैकेज को तैयार करने में जुटे हैं।
आईएमएफ का ये अनुमान तब आया है, जब जापान की करेंसी येन, यूरो के मुकाबले 160 अंक के करीब पहुंच गया है और डॉलर के मुकाबले 33 साल के निचले स्तर के करीब बना हुआ है, जिसने पिछले साल अक्टूबर में मुद्रा हस्तक्षेप के दूसरे दौर को जन्म दिया था। यूरो आखिरी बार अगस्त 2008 में 160 येन तक पहुंचा था।
जापानी करेंसी येन की कमजोरी, मोटे तौर पर मौद्रिक नीति में बुनियादी अंतर के कारण हुई है। फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए महामारी के निचले स्तर से ब्याज दरें बढ़ा दी हैं, जबकि बैंक ऑफ जापान प्रोत्साहन मोड में रहा है, क्योंकि यह सालों की अपस्फीति के बाद मूल्य वृद्धि को बढ़ावा देना चाहता है।
दुनिया की टॉप-10 अर्थव्यवस्थाएं
बिजनेस इनसाइडर की 10 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वक्त 26.85 ट्रिलियन डॉलर की अनुमानित वास्तविक जीडीपी के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका वैश्विक अर्थव्यवस्था में पहले नंबर पर है।
जबकि, चीन की अर्थव्यवस्था ने 19.37 ट्रिलियन डॉलर की वास्तविक जीडीपी के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है। पिछले कुछ दशकों में, चीन का तीव्र आर्थिक विस्तार एक निर्णायक वैश्विक घटना रही है।
वहीं, 3.74 ट्रिलियन डॉलर की वास्तविक जीडीपी के साथ भारत, दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में पांचवें नंबर पर पहुंच चुका है। जबकि, 3.16 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ ब्रिटेन छठवें नंबर पर , 2.92 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी के साथ सातवें नंबर पर फ्रांस, 2.17 ट्रिलियन डॉलर के साथ इटली आठवें नंबर पर, 2.09 ट्रिलियन डॉलर के साथ कनाडा नौवें नंबर पर और 2.08 ट्रिलियन डॉलर के साथ ब्राजील 10वें नंबर पर है।
आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक के साथ तमाम वैश्विक इकोनॉमिक संस्थाएं अनुमान लगा चुकी हैं, कि साल 2027 तक भारत, जर्मनी और जापान दोनों को अर्थव्यवस्था के मामले में पीछे छोड़ देगा और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा।












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