• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

नेल्सन मंडेला की पुण्यतिथि: 27 साल जेल में रहकर अश्वेतों के हक के लिए लड़ते रहे दक्षिण अफ्रीका के 'गांधी'

|
Google Oneindia News

नई दिल्ली, दिसंबर 05। दक्षिण अफ्रीका के गांधी कहे जाने वाले नेल्सन मंडेला की आज पुण्यतिथि है। इस मौके पर आपको उनकी कुछ बड़ी उपलब्धियों के बारे में बताते हैं। आपको बताते हैं कि आखिर नेल्सना मंडेला को क्यों दक्षिण अफ्रीका का गांधी कहा जाता था। रंगभेद के खिलाफ उनकी लड़ाई की वजह से ही को पूरी दुनिया आज उन्हें जानती है। जिस तरह से भारत की आजादी में महात्मा गांधी का बड़ा योगदान था, उसी तरह दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला का अश्वेत नागरिकों के हक की लड़ाई में अहम योगदान था।

Nelson mandela

मिशनरी स्कूल से हुई नेल्सन मंडेला की पढ़ाई

18 जुलाई 1918 को दक्षिण अफ्रीका के केप प्रांत में जन्मे नेल्सन मंडेला बचपन से ही कुछ अलग करने के लिए जाने जाते थे। मिशनरी स्कूल से नेल्सन मंडेला की पढ़ाई हुई थी। 12 साल की उम्र में नेल्सन मंडेला के पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद उन्होंने वकालत की पढ़ाई करने की ठानी और इसके लिए उन्होंने अपनी जाति के सरदार पद को छोड़ दिया था।

लॉ की पढ़ाई के दौरान रंगभेद और नस्लभेद को किया महसूस

वकालत की पढ़ाई के दौरान ही नेल्सन मंडेला ने नस्लभेद और रंगभेद को महसूस किया था। उन्होंने इसके खिलाफ लड़ाई उसी वक्त शुरू कर दी थी। 1941 में नेल्सन मंडेला जोहानिसबर्ग चले गए थे। दो साल बाद नेल्सन मंडेला अफ्रीकानेर विटवाटरस्रांड विश्वविद्यालय में वकालत की पढ़ाई करने लगे, जहां उनकी मुलाकात अलग अलग नस्लों और पृष्ठभूमि के लोगों से हुई। इस दौरान वो उदारवादी, कट्टरपंथी और अफ्रीकी विचारधाराओं के संपर्क में आए। नस्लभेद और कई तरह के भेदभाव के चलते राजनीति के प्रति उनमें जुनून पैदा हुआ।

1964 में नेल्सन मंडेला को सुनाई गई थी सजा

नेल्सन मंडेला 1944 में नेशनल कांग्रेस में शामिल हुए। उन्होंने ही अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस यूथ लीग की स्थापना की और तीन साल बाद उसके सचिव भी बने। पॉलिटिक्स में व्यस्त रहने के कारण मंडेला तीन बार वकालत की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में नाकाम हुए, लेकिन 1949 में उन्होंने वकालत की डिग्री हासिल कर ही ली। साल 1950 में नेल्सन मंडेला अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के नेशनल एक्जीक्यूटिव चुने गए। इसके बाद उन्होंने अपनी लड़ाई की शुरुआत की। साल 1956 में उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया। 4 साल की सुनवाई के बाद उनपर लगे सभी आरोप हटा लिए गए, लेकिन उन्हें 1964 में देश द्रोह की सजा सुनाई गई।

1994 में पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने नेल्सन मंडेला

जेल में रहते हुए भी नेल्सन मंडेला ने अपने संघर्ष को जारी रखा। 11 फरवरी 1990 को 27 साल जेल में रहने के बाद नेल्सन मंडेला जेल से बाहर आए। 1994 के भेदभाव रहित चुनाव में मंडेला की अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस ने 62 प्रतिशत मत प्राप्त कर जीत हासिल की और मंडेला अपने देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने। दक्षिण अफ्रीका का नया संविधान 1996 में लागू हुआ। 1997 में सक्रिय राजनीति छोड़ने के बाद 5 दिसंबर 2013 को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया था।

ये भी पढ़ें: मंडेला को रिहा करने वाले साउथ अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति डी क्लार्क का निधन, 85 साल की उम्र में ली अंतिम सांसये भी पढ़ें: मंडेला को रिहा करने वाले साउथ अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति डी क्लार्क का निधन, 85 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

Comments
English summary
'Gandhi' of South Africa Nelson mandela kept fighting for the rights of blacks in jail for 27 years
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X