G20 में अफ्रीकन यूनियन के शामिल होने का रास्ता साफ, जानिए PM मोदी की मुहिम का समर्थन करने क्यों मजबूर हुआ चीन?
African Union to join G20: दुनिया के सबसे अमीर और सबसे शक्तिशाली देशों से बना G20 समूह, अफ्रीकी संघ को सदस्यता प्रदान करने के लिए तैयार है।
जी20 के वर्तमान सदस्यों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूके, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) शामिल हैं, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 85 प्रतिशत, वैश्विक व्यापार का 75 प्रतिशत से और विश्व जनसंख्या का लगभग दो-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

अफ्रीकी संघ के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए पुष्टि की है, कि समूह को स्थायी सदस्य बनाया जा रहा है। चूंकी ये अधिकारी आधिकारिक तौर पर बोलने के लिए अधिकृत नहीं थे, लिहाजा उनकी पहचान उजागर नहीं की गई है।
वहीं, एक भारतीय चैनल से बात करते हुए जी20 शिखर सम्मेलन के भारतीय कॉर्डिनेटर हर्षवर्धन श्रृंगला ने हालांकि इसकी तो पुष्टि नहीं की, कि अफ्रीकन यूनियन को शामिल करने पर सहमति बनी है या नहीं, लेकिन उन्होंने ये जरूर कहा है, कि भारत ग्लोबल साउथ और अफ्रीकन यूनियन की आवाज बन रहा है और अफ्रीकन यूनियन की सदस्यता के लिए भारत ने काफी प्रयास किए हैं और सदस्यता को लेकर जी20 देशों के नेताओं के बीच आखिरी फैसला होगा।
क्या है अफ्रीकी संघ, भारत के लिए क्यों है जरूरी?
अफ़्रीकी संघ (एयू) एक महाद्वीपीय निकाय है जिसमें 55 सदस्य देश शामिल हैं। इसे अफ्रीका महादेश का सर्वोच्च समूह माना जाता है जो अपने सदस्य देशों की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करता है। यह अफ्रीकी देशों की प्रगति और आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है।
इसे आधिकारिक तौर पर 2002 में अफ़्रीकी एकता संगठन (1963-1999) के उत्तराधिकारी के रूप में लॉन्च किया गया था।
अफ्रीकी यूनियन की वेबसाइट के अनुसार, यह "एक एकीकृत, समृद्ध और शांतिपूर्ण अफ्रीका की कल्पना करता है, जो अपने नागरिकों द्वारा संचालित हो और वैश्विक क्षेत्र में एक गतिशील शक्ति का प्रतिनिधित्व करे।"
अफ्रीकन यूनियन के लक्ष्य-
अफ़्रीकी देशों और उनके लोगों के बीच अधिक एकता और एकजुटता हासिल करना
अपने सदस्य राज्यों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता की रक्षा करना
महाद्वीप के राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक एकीकरण में तेजी लाना
महाद्वीप और उसके लोगों के हित के मुद्दों पर अफ्रीकी साझा पदों को बढ़ावा देना और उनका बचाव करना
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करें
महाद्वीप पर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना
न्यूज9 के मुताबिक, अफ्रीकी यूनियन का निर्माण यूरोपीय संघ की तर्ज पर किया गया है।
यूरोपीय संघ की तरह, इसका अपना बैंक, कोर्ट ऑफ जस्टिस और यहां तक कि, इसका अपना एक संसद भी है।
हालांकि, EU के पास अपनी सेना नहीं है, लेकिन अफ्रीकी यूनियन के पास अपनी सेना भी है।
अफ़्रीकी स्टैंडबाय फ़ोर्स के नाम से जाने जाने वाले ये सैनिक शांति बनाए रखने के लिए हैं।
1.3 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करते हुए, इसकी संयुक्त जीडीपी लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर है।
अफ़्रीकी संघ का मुख्यालय इथियोपिया के अदीस अबाबा में है।
अफ्रीकी यूनियन को जी20 सदस्य बनाने से इसे यूरोपीय संघ के समान दर्जा मिलेगा, जो फिलहाल पूर्ण सदस्यता वाला एकमात्र क्षेत्रीय ब्लॉक है और यह "आमंत्रित अंतर्राष्ट्रीय संगठन" के अपने वर्तमान पदनाम से एक कदम ऊपर होगा।
इस वर्ष G20 की अध्यक्षता करते हुए भारत ने, बांग्लादेश, सिंगापुर, स्पेन और नाइजीरिया सहित नौ गैर-सदस्य "अतिथि" देशों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व बैंक और आईएमएफ जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को आमंत्रित किया है।
भारत के लिए क्यों खास की अफ्रीकी यूनियन?
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार अफ्रीकी देशों को भारत की जी20 अध्यक्षता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया है।
गुरुवार को भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशित एक लेख में, प्रधान मंत्री ने लिखा है, कि "हमारे राष्ट्रपति पद पर न केवल अफ्रीकी देशों की सबसे बड़ी भागीदारी देखी गई है, बल्कि अफ्रीकी संघ को जी20 का स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने पर भी जोर दिया गया है।"
3 सितंबर को पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार में मोदी जी20 की पूर्ण सदस्यता हासिल करने के लिए अफ्रीकी संघ के पक्ष में मजबूती से सामने आए।
मोदी ने कहा, कि जी20 के भीतर अफ्रीका एक 'सर्वोच्च प्राथमिकता' है। उन्होंने कहा, कि वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन का आयोजन, जिसमें अफ्रीका की उत्साही भागीदारी थी, भारत द्वारा अपनी अध्यक्षता के दौरान किए गए पहले कामों में से एक था।
एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया, कि जी20 में अफ्रीकी संघ को पूर्ण सदस्यता बनाने का पीएम मोदी का प्रस्ताव वैश्विक मामलों को आकार देने में अफ्रीका के प्रतिनिधित्व और साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अफ़्रीकी संघ के प्रस्ताव के बारे में सूत्र ने कहा, "यह न्यायसंगत, निष्पक्ष, अधिक समावेशी और प्रतिनिधि वैश्विक वास्तुकला और शासन की दिशा में एक सही कदम होगा।"
सूत्र ने कहा, कि "(प्रधानमंत्री) अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्लोबल साउथ देशों, विशेष रूप से अफ्रीकी देशों की आवाज उठाने में दृढ़ विश्वास रखते हैं।"
वहीं, पीएम मोदी की अफ्रीकी संघ को जी20 में शामिल करने की ये मुहिम ऐसी थी, जिससे चीन कभी इनकार कर ही नहीं सकता था और चीन ने गुरुवार को अपना समर्थन व्यक्त करते हुए दावा किया, कि वह इस समावेशन का "स्पष्ट रूप से समर्थन करने वाला पहला देश" है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, कि "चीन एयू के जी20 में शामिल होने के लिए स्पष्ट रूप से समर्थन देने वाला पहला देश है।"
उन्होंने कहा, कि "हाल ही में चीन-अफ्रीका नेताओं की बातचीत में, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बार फिर जोर दिया था, कि चीन जी20 में एयू की पूर्ण सदस्यता का सक्रिय रूप से समर्थन करता है।"
आपको बता दें, कि पिछले साल बाली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान, इंडोनेशिया ने पहले एयू में प्रतिनिधित्व का आह्वान किया था, जबकि फ्रांस के इमैनुएल मैक्रॉन को यह कहते हुए उद्धृत किया गया था कि उनका देश "जी20 में अफ्रीकी संघ के पूर्ण एकीकरण का समर्थन करता है"।
दक्षिण अफ्रीका के सिरिल रामफोसा ने भी बाली शिखर सम्मेलन के कामकाजी सत्र के दौरान इस मामले को आगे बढ़ाया, जबकि चीन ने बार-बार इस कदम के लिए अपना समर्थन जताया है।
भारत के मुहिम चलाने के बाद दिसंबर 2022 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी इसी तरह का आह्वान किया था।
बाइडेन ने कहा था, कि "आज मैं अफ्रीकी संघ से भी जी20 के स्थायी सदस्य के रूप में जी20 में शामिल होने का आह्वान कर रहा हूं... इसे आने में काफी समय हो गया है, लेकिन यह आने वाला है।"
उसी महीने, जापान के प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा ने भी सेनेगल के राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद अफ्रीकी यूनियन के जी20 ग्रुप में शामिल होने की हरी झंडी दे दी।












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