अमेरिका कैपिटल में ट्रंप समर्थकों के दंगों की पूरी कहानी

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों की भीड़ ने बुधवार की दोपहर वॉशिंगटन के कैपिटल हिल इलाक़े पर धावा बोला और यह भीड़ वहाँ मौजूद पुलिस से भिड़ गई.

ज़ाहिर तौर पर यह भीड़ इस संभावना से प्रेरित थी कि 'वो अमेरिकी कांग्रेस की कार्यवाही को रोक देगी' ताकि नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन को 2020 के चुनाव में जीत का सर्टिफ़िकेट ना मिल सके.

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शुरू से एक बार नज़र डालते हैं कि अब तक क्या-क्या हुआ:

  • यह हमला तब हुआ जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने समर्थकों को कैपिटल पर चढ़ाई कर, नवंबर 2020 के चुनावी नतीजे पलट देने का आह्वान किया.
  • भीड़ सीनेट कक्ष तक पहुँचने में सफल रही जहाँ कुछ ही मिनट पहले चुनाव परिणाम प्रमाणित किये गए थे.
  • भीड़ से निकलकर एक शख़्स मंच तक भी जा पहुँचा, जिसने एक रिपोर्टर के अनुसार, चिल्लाकर कहा, "वो चुनाव डोनाल्ड ट्रंप ने जीता था."
  • आधिकारिक रूप से यूएस कैपिटल हिंसा में चार लोगों की मौत हुई. इनमें से एक 'ट्रंप-समर्थक' महिला को पुलिस ने मौक़े पर ही गोली मार दी थी, जिसकी मौत अस्पताल ले जाते समय हुई. पुलिस का कहना है कि बाकी तीन लोगों की मौत 'मेडिकल इमर्जेंसी' के चलते हुई.
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  • वॉशिंगटन डीसी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पुलिस को दो पाइप बम मिले हैं. इनमें से एक बम डेमोक्रेटिक नेशनल कमिटी और दूसरा रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के बाहर रखा था. पुलिस को कुछ अन्य हथियार भी मिले हैं.
  • डोनाल्ड ट्रंप ने हमलावर भीड़ को 'बहुत ख़ास' बताया और उनकी प्रशंसा की. राष्ट्रपति ट्रंप ने 'व्यापक चुनावी धांधली' के निराधार दावों का हवाला देकर हिंसा को उचित ठहराया.
  • हिंसा के दौरान एक वीडियो में, जिसे बाद में ट्विटर, फ़ेसबुक और यूट्यूब ने हटा दिया, डोनाल्ड ट्रंप ने लोगों से घर लौटने की अपील की, लेकिन इस वीडियो में ट्रंप ने चुनावी धांधली के उन झूठे दावों को भी हवा दी जिन्हें ट्रंप समर्थकों के भड़कने की वजह माना जा रहा है.
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  • ट्विटर, फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम ने इसके बाद से राष्ट्रपति के आधिकारिक अकाउंट लॉक कर दिये हैं. इन सोशल मीडिया वेबसाइट्स का कहना है कि 'ट्रंप लोगों को भड़का रहे हैं और अपने दावों से उन्हें भ्रमित कर रहे हैं.' फ़ेसबुक ने कहा है कि वो इन प्रदर्शनों के सभी वीडियो और फ़ोटो वेबसाइट से हटाएगा.
  • अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने डोनाल्ड ट्रंप से 'इस घेराबंदी को समाप्त करने की माँग' की है. विलमिंगटन में अपने भाषण के दौरान बाइडन ने कहा, "ये विरोध नहीं है. ये फ़साद है जिसे दुनिया देख रही है." अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने भी इस हिंसा के लिए फ़साद और विद्रोह जैसे शब्दों का ही इस्तेमाल किया है.
  • अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि "इतिहास कैपिटल में हुई हिंसा को राष्ट्र के अपमान और ज़िल्लत के रूप में याद रखेगा." उन्होंने कहा, "इस हिंसा से हैरान होने की ज़रूरत नहीं है. लगभग दो महीने से माहौल बनाया जा रहा था. एक राजनीतिक दल और उनके समर्थक मीडिया घराने एक ऐसा माहौल बना रहे थे कि उनके समर्थकों को सच्चाई दिखाई ही ना दे. उन्होंने अपने समर्थकों को सच बताने की कोशिश ही नहीं की."
  • कैपिटल में भीड़ द्वारा किये गए हंगामे के चार घंटे बाद, अधिकारियों ने घोषणा की कि 'कैपिटल पूरी तरह सुरक्षित है और जो बाइडन की जीत को प्रमाणित करने की कार्यवाही शुरू की जा रही है.'
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  • कैपिटल में ट्रंप-समर्थकों की भीड़ का यूँ घुस जाना, अमेरिकी इतिहास में सबसे ख़राब सुरक्षा उल्लंघनों में से एक कहा जा रहा है. कैपिटल से भीड़ को बाहर निकालने के बाद, सभी सीनेटरों को बाइडन की जीत के प्रमाणीकरण के लिए फिर से सीनेट कक्ष में लाया गया.
  • उप-राष्ट्रपति माइक पेंस के संबोधन से संयुक्त-सत्र की शुरुआत हुई, जिसमें उन्होंने कहा, "यह अमेरिकी इतिहास में एक काला दिन है. हम उन लोगों के आभारी रहेंगे जिन्होंने इस ऐतिहासिक जगह को बचाने के लिए अपनी जगह नहीं छोड़ी. जिन लोगों ने भी कैपिटल में कहर बरपाने की कोशिश की, वो जीत नहीं सकते."
  • इसी दौरान वॉशिंगटन डीसी पुलिस के चीफ़ रॉबर्ट कोनटी ने बताया कि 'पुलिस ने 50 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया है. अधिकांश लोगों को कर्फ़्यू के उल्लंघन के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है.'
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  • अमेरिकी राजनेता इल्हान ओमर और एलेक्सांड्रिया ओकासियो कोर्टेज़ ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग की कार्रवाई होनी चाहिए.
  • अमेरिकी कैपिटल बिल्डिंग के चारों तरफ़ सड़कों पर पुलिस दंगे की आशंका को लेकर तैनात है. वॉशिंगटन की मेयर ने पूरी रात के लिए कर्फ़्यू लगा दिया है. अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में मेयर ने 15 दिन के लिए पब्लिक इमर्जेंसी लगा दी है.
  • मेलानिया ट्रंप की चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ स्टेफ़नी ग्रिशाम के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने कैपिटल हिंसा के बाद इस्तीफ़ा दे दिया है.
  • दुनिया भर के नेताओं ने इस हिंसा की आलोचना की है. अधिकांश नेताओं ने कहा है कि 'इस तरह की हिंसा लोकतंत्र के लिए ख़तरा है.'
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