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बेलारूस संकटः फ्रांस ने दी रूस को चेतावनी, ईयू प्रतिबंधों को तैयार

Provided by Deutsche Welle

पेरिस, 16 नवंबर। पोलैंड से लगती बेलारूस की सीमा पर हजारों प्रवासी जमा हो गए हैं जो यूरोपीय संघ में घुसने की कोशिश में हैं. इस कराण यूरोपीय संघ ने बेलारूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने का फैसला कर लिया है. रूस के करीबी बेलारूस का कहना है उस पर प्रवासी संकट खड़ा करने के आरोप निराधार हैं.

इस पूरी स्थिति के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की. माक्रों के एक सलाहकार ने मीडिया को बताया, "राष्ट्रपति ने बताया कि हम यूक्रेन की संप्रभुता और हमारी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए तैयार हैं."

पुतिन ने भी दिया जवाब

माक्रों से फोन पर हुई बातचीत में रूस ने कहा कि ब्लैक सी में अमेरिका और उसके सहयोगियों का सैन्य कदमताल उकसावे की कार्रवाई है. रूस ने कहा, "यह रूस और नाटो के बीच तनाव बढ़ा रहा है."

दोनों नेताओं ने प्रवासी संकट पर भी बात की. माक्रों के सलाहकार के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी कि दोनों पक्षों को पीछे हटने की जरूरत है. हालांकि रूस ने इस बात पर जोर दिया कि यूरोपीय संघ सीधे बेलारूस से बात करे.

इससे पहले अमेरिका ने भी आरोप लगाया था कि बेलारूस सीमा पर खड़ा किया गया प्रवासी संकट यूक्रेन में रूसी सेना की गतिविधियों से ध्यान बंटाने का तरीका है. रूस के प्रवक्ता दिमित्री पेश्कोव ने इस आरोप को गलत बताते हुए खारिज कर दिया था.

क्या है प्रवासी संकट?

यूरोपीय संघ का कहना है कि बेलारूस अपने ऊपर पहले से लगाए गए प्रतिबंधों का बदला लेने के लिए प्रवासियों को पोलैंड की ओर धकेलने की नीति अपना रहा है. बेलारूस और रूस दोनों ने इन आरोपों को गलत बताया है. पिछले साल बेलारूस के नेता आलेग्जांडर लुकाशेंको के विवादित चुनाव के बाद यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए थे.

इराक और अफगानिस्तान से आए प्रवासी इस साल की शुरुआत से ही बेलारूस में सीमा पर जमा होना शुरू हो गए थे. वे पहले इस्तेमाल ना किए गए रास्तों के जरिए लिथुआनिया, लातविया और पोलैंड में घुसने की कोशिश कर रहे हैं.

यूरोपीय संघ के वरिष्ठ कूटनीतिक योसेप बॉरेल ने कहा है कि संघ के नेताओं के बीच बेलारूस पर पांचवीं बार प्रतिबंध लगाने पर सहमति बन गई है, इनकी रूपरेखा को आने वाले दिनों में अंतिम रूप दिया जाएगा. इनमें एयरलाइन, ट्रैवल एजेंसियों और प्रवासियों को अवैध रूप से यूरोप में भेजने की कोशिश कर रहे व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे.

चिंतित है अमेरिका

नाटो महासचिव येन्स स्टोल्टनबर्ग ने सोमवार को कहा था कि हम रूस की मंशा पर कोई अटकल नहीं लगाना चाहते. हालांकि उन्होंने जोड़ा, "हम सेना का एक असामान्य जमावड़ा देख रहे हैं और हम जानते हैं कि यूक्रेन के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई करने से पहले रूस इस तरह की सैन्य क्षमताओं के इस्तेमाल को तैयार रहता है."

तस्वीरेंः शरणार्थियों की लाचारी

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि यूक्रेन से लगती सीमा पर रूस में असामान्य सैन्य गतिविधियां हो रही हैं. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन कर्बी ने कहा कि ये गतिविधियां चिंता का विषय हैं और गुरुवार को अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन य्रूक्रेन में अपने समकक्ष से मुलाकात करेंगे.

2014 में रूस समर्थित अलगाववादियों ने यूक्रेन के पूर्वी डोनबास इलाके पर अधिकार कर लिया था. तब से यह विवाद लगातार जारी है. उसी साल रूस ने यूक्रेन से क्रीमिया भी छीन लिया था. क्रीमिया से लगते जल-क्षेत्र पर रूस अपना दावा जताता रहा है जबकि ज्यादातर देश उस प्रायद्वीप को आज भी यूक्रेन का हिस्सा मानते हैं.

वीके/एए (डीपीए, रॉयटर्स)

Source: DW

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