भारत-मालदीव तनाव के बीच हाई लेवल मीटिंग, राष्ट्रपति मुइज्जू के अल्टीमेटम के बाद डटी रहेगी इंडियन आर्मी?
भारत और मालदीव के बीच रविवार को उच्च स्तरीय कोर समूह की पहली बैठक हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और चल रही परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर चर्चा की। बैठक में भारतीय विमानन प्लेटफॉर्म के संचालन को जारी रखने के लिए व्यावहारिक समाधान ढूंढने पर भी चर्चा की गई।
विदेश मंत्रालय की ओर से रविवार को एक बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया, बैठक में दोनों पक्षों ने चल रही विकास सहयोग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर चर्चा की। साथ ही द्विपक्षीय साझेदारी बढ़ाने वाले मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई।

उच्च स्तरीय कोर समूह की अगली बैठक भारत में होगी। अगली बैठक दोनों देशों की सुविधा के अनुसार बाद की तारीख में निर्धारित की जाएगी। आज की बैठक में शामिल होने के लिए भारत से एक विशेष टीम शनिवार को मालदीव पहुंची थी।
इससे पहले, माले के स्थानीय मीडिया ने खबर दी कि राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत से सरकार से 15 मार्च से पहले सभी भारतीय सैनिकों को मालदीव से वापस बुलाने को कहा है।
रविवार को मीडिया से बात करते हुए मालदीव के प्रेसिडेंट ऑफिस के प्रवक्ता अब्दुल्ला नजीम इब्राहिम से इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने भारतीय सैनिकों को वापस बुलाने का अनुरोध किया है।
प्रवक्ता नजीम इब्राहिम के मुताबिक बैठक के दौरान राष्ट्रपति मुइज्जू ने 15 मार्च से पहले भारतीय सैनिकों को हटाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि लोग चाहते हैं कि भारतीय सैनिक मालदीव में न रहें। उन्होंने कहा, भारतीय सैनिक इस देश में नहीं रह सकते हैं। यही इस सरकार की नीति है। यह राष्ट्रपति मुइज्जू का वादा है और लोग भी यही चाहते हैं।
मालदीव के मीडिया ने वहां की सरकार के हवाले से बताया कि मालदीव में फिलहाल 88 भारतीय सैनिक मौजूद हैं। इससे पहले मुइज्जू की पार्टी ने भारतीय सैनिकों को हटाने के लिए चुनाव में 'इंडिया आउट' अभियान चलाया था।
मालदीव में भारत के अभी डोर्नियर 228 समुद्री गश्ती विमान और दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर तैनात हैं। मुइज्जू ने राष्ट्रपति का पदभार संभालने के दूसरे दिन ही आधिकारिक तौर पर भारत सरकार से अपने सैनिकों को वापस बुलाने का अनुरोध किया था।












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