शरिया आधारित इस्लाम, जिहादी शासन; बांग्लादेश में हिंदुओं पर क्यों हो रहे हैं हमले, समझिए इनसाइड स्टोरी
Bangladesh Hindu: ढाका के धामराई में एक हिंदू परिवार के घर पर 100-150 इस्लामिक चरमपंथियों की एक भीड़ आती है, घर को तोड़ देती, सारी संपत्ति लूट लेती है और घर में बने मंदिर को क्षत-विक्षत कर दिया जाता है। हिंदू परिवार पर हुए हमले की इस घटना को बांग्लाादेशी अखबार ढाका ट्रिब्यून ने प्रकाशित किया है।
जरा सोचिए, कि उस हिंदू परिवार की क्या स्थिति होगी, जिनके घर को इस्लामिक नारे लगाने वाली 100-150 लोगों की भीड़ ने घेर रखा हो, घर को लूट रहा हो और मारने की धमकी दे रहा हो।

बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के नाम पर ये हो रहा है।
एक सवाल लगातार उठ रहे हैं, कि आखिर छात्र आंदोलन इतना हिंसक क्यों हो गया?
हम आपको छात्र आंदोलन से जुड़े एक अहम नेता के मकसद के बारे में बताएंगे, लेकिन उससे पहले उस परिवार के बारे में बताते हैं, जिनके ऊपर हमला हुआ है।
ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, घटना सोमवार को शाम करीब 6 बजे गंगुटिया यूनियन के बाराबारिया इलाके में हुई है। चश्मदीदों के मुताबिक, हिंदू परिवार पर हुए इस हमले का नेतृत्व स्थानीय बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता अजीजुल हक ने किया था और हमला करने से पहले घर तक जुलूस निकाला गया।
ढाका ट्रिब्यून ने लिखा है, कि भीड़ ने घर के दरवाजे, खिड़कियां और ज्यादातर सामानों को तोड़ दिया गया है, घर के अंदर टेलीविजन टूटा हुआ था, घर का मुख्य लोहे का गेट टूटा हुआ था, बालकनी के बगल में तीन कमरों की कांच की खिड़कियां टूटी हुई थीं और पूरे घर में कांच के टुकड़े बिखरे हुए थे।
दुर्गा मंदिर के सामने टूटी कुर्सियां पड़ीं थीं और इसके अलावा गैरेज में खड़ी दो कारों की सभी खिड़कियां टूट गई थीं।
ढाका ट्रिब्यून से बात करते हुए मीना रानी दास ने कहा, कि "हम हमेशा की तरह घर पर थे, जब अचानक 100-150 लोगों का एक समूह आया और हमारे घर में तोड़फोड़ मचानी शुरू कर दी। हम डर के मारे एक कमरे से दूसरे कमरे में भाग गए। वे लगातार चीजे तोड़ते रहे और हम इतने डर गए कि हम चुपचाप दूसरे कमरे में बैठे रहे। उन्होंने बहुत गालियां दीं और लगभग 10-15 मिनट बाद वे चले गए। उन्होंने मंदिर में घुसने की भी कोशिश की लेकिन ताला तोड़कर अंदर नहीं जा सके।"
उनके बेटे डॉ. अनंत दास ने कहा: "हम घर के अंदर बैठे थे, तभी हमने गेट पर धमाके की आवाज सुनी। यह सुनकर हम दूसरे कमरे में छिप गए। हमलावर बालकनी से घुसे और सभी खिड़कियां तोड़ दीं। वे ताला लगे होने के कारण मंदिर में घुस नहीं पाए, लेकिन कुर्सियां और अन्य फर्नीचर तोड़ गए। हमारा मानना है कि यह हमला सांप्रदायिक कारणों से प्रेरित था। उन्होंने आपत्तिजनक गालियां दीं। हम बहुत असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।"
ढाका ट्रिब्यून का कहना है, कि उसने स्थानीय पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश, लेकिन इलाके के सभी अधिकारी गायब हैं।
तो ये स्थिति है बांग्लादेश की।
वापस उस सवाल पर आते हैं, कि छात्रों के प्रदर्शन का मकसद क्या सिर्फ आरक्षण को खत्म करना था?
इसका जवाब है, नहीं।
सरजिस आलम, एक छात्र नेता है और उसने शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन में केन्द्रीय भूमिका निभाई है, लेकिन इसका मकसद बांग्लादेश में शरिया आधारित इस्लाम की स्थापना करना है।
सरजिस आलम ने फेसबुक पोस्ट में लिखा था, "कल का राष्ट्र इस्लाम होगा, संविधान अल कुरान होगा - इंशाअल्लाह"।
बांग्लादेश को कुरान के संविधान के साथ शरिया राष्ट्र में बदलने की उसकी योजना के उजागर होने के बाद, "भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन" के प्रमुख संयोजकों में से एक सरजिस आलम ने अपना फेसबुक पोस्ट डिलीट कर दिया है। लेकिन, इसके पोस्ट से इसके नापाक एजेंडे को समझा जा सकता है।
बांग्लादेशी पत्रकार सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने लिखा है, कि "सरजिस आलम बांग्लादेश में जिस इस्लाम की स्थापना करना चाहता है, उस शरिया राष्ट्र में हिंदुओं और गैर-मुस्लिमों को जजिया देना होगा, जबकि गैर-मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं को "गनीमत की संपत्ति" माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि इस्लामवादी उन्हें यौन दास के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।"
उन्होंने आगे लिखा है, कि "विवेक रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति नैतिक रूप से इसका सामना करने के लिए बाध्य है। कृपया इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। आइए हम इस्लामवादियों को बांग्लादेश को नव-तालिबान राज्य में बदलने से रोकें।"
बांग्लादेश में आज से नहीं, सालों से हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं। सैकड़ों की भीड़ गावों पर हमले करती रही है और हर साल दुर्गा पूजा में बांग्लादेशी हिंदुओं को निशाना बनाया जाता है। दुर्गा मंदिर और इस्कॉन के मंदिर पर हमले होते हैं।
अविरूप सरकार एक बांग्लादेशी हिंदू हैं, जो ऐसे देश में रहते हैं, जहां 90% मुस्लिम आबादी है। उनकी विधवा चचेरी बहन नेत्रोकोना में एक विशाल संयुक्त परिवार के घर में रहती है, जो नदियों से घिरा हुआ एक जिला है, जो ढाका से लगभग 100 किमी उत्तर में है। उनके घर पर इस्लामवादियों की भीड़ ने हमला किया।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अविरूप सरकार ने कहा, कि "उसके घर पर लूटपाट की गई है।"
उनके चचेरे भाई ने कहा, कि करीब 100 लोगों की भीड़, लाठी-डंडों से लैस होकर, घर पर धावा बोल दिया, फर्नीचर, टीवी, बाथरूम की फिटिंग और दरवाजे तोड़ दिए। जाने से पहले, उन्होंने सारी नकदी और गहने लूट लिए। हालांकि, उन्होंने लोगों पर हमले नहीं किए।
सरकार के मुताबिक "बांग्लादेशी हिंदू एक आसान लक्ष्य हैं।"
उन्होंने कहा, कि "जब भी अवामी लीग सत्ता खोती है, उन पर हमला किया जाता है।" सरकार कहते हैं, कि यह पहली बार नहीं है, जब उनके रिश्तेदार के घर पर हमला हुआ हो।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को 1992 में भी निशाना बनाया गया था, जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था। इसके बाद के दशकों में हिंदुओं पर कई धार्मिक हमले हुए हैं। बांग्लादेशी मानवाधिकार समूह, ऐन ओ सलीश केंद्र ने जनवरी 2013 और सितंबर 2021 के बीच हिंदू समुदाय पर कम से कम 3,679 हमलों की रिपोर्ट की, जिसमें बर्बरता, आगजनी और लक्षित हिंसा शामिल है।
2021 में दुर्गा पूजा के दौरान और उसके बाद बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के घरों और मंदिरों पर भीड़ के हमलों के बाद, मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, कि "पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश में व्यक्तियों के खिलाफ इस तरह के लगातार हमले, सांप्रदायिक हिंसा और अल्पसंख्यकों के घरों और पूजा स्थलों को नष्ट करना दिखाता है कि राज्य अल्पसंख्यकों की रक्षा करने के अपने कर्तव्य में नाकाम रहा है।"
27 जिलों में हिंदुओं पर हिंसा
बांग्लादेश की 17 करोड़ आबादी में हिंदुओं की संख्या करीब 8% बची है और शेख हसीना की अवामी लीग का समर्थन करते रहे हैं। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद की नेता काजोल देबनाथ ने कहा, कि 200 से 300 घरों और व्यवसायों और 15-20 मंदिरों को निशाना बनाकर किए गए हमलों में करीब 40 हिंदू घायल हुए हैं। 27 जिलों में हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं और कई तस्वीरें विचलित करने वाली हैं।
यूनिटी काउंसिल के महासचिव राणा दासगुप्ता ने कहा, "स्थिति गंभीर है। हम सेना से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हमलों के दोषियों को तुरंत सजा दिलाने का आग्रह करते हैं।"
रंगपुर शहर में परशुराम थाना अवामी लीग के हराधन रॉय और पार्टी के वार्ड 4 के पार्षद और उनके भतीजे को भीड़ ने घेरकर मार डाला। हिंदू समुदाय के एक बुजुर्ग मनिंद्र कुमार नाथ ने कहा, "स्थिति भयावह है।"
उन्होंने कहा, कि "हमें लोगों के फोन आ रहे हैं जो हमसे अपनी जान बचाने के लिए कह रहे हैं, लेकिन हमें कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही है।"
हालांकि, कई जगहों पर भीड़ को दूर रखने की पूरी कोशिश करते हुए, कुछ छात्र संगठन और कई राजनीतिक दलों की युवा शाखाओं के सदस्य मंदिरों और चर्चों के बाहर पहरा देते देखे गए हैं। लेकिन ये सिर्फ दिखाने के लिए भी हो सकते हैं। फिलहाल कोई मानवाधिकार संगठन हिंदुओं की रक्षा के लिए दिखाई नहीं दे रहा और भारत के भी कथित सेक्युलर मुंह में पान चबा रहे हैं।
कई यूट्यूबर्स, जो गाजा में हो रही हिंसा पर दर्जनों वीडियो बना डाले हैं, उनसे बांग्लादेशी हिंदुओं पर हो रहे हमले पर वीडियो नहीं बन रहा है, जाहिर है, इससे उनके सब्सक्राइबर्स कम होंगे। यानि, बांग्लादेशी हिंदुओं की बात करने वाला कोई नहीं है और गाजा पर आंसु बहाने वाले अपनी आंखें बंद कर सोए हुए हैं।












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