भारत बना विश्व का नया तेल बाजार, जानें कैसे यूरोप से लेकर US तक ने की रूसी तेल की बंपर खरीददारी
जी7 देशों ने रूसी तेल पर प्राइस कैप 60 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है और भारत, उससे भी कम कीमत पर रूसी तेल खरीद रहा है, जिससे भारत को अपने घरेलू बाजार में तेल की कीमत स्थिर रखने में मदद मिली है।

Europe Russian Oil Frome India: पिछले साल 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद मानो यूरोप को सांप सूंघ गया था और यूरोपीय देशों ने एक के बाद एक रूस पर प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए। अमेरिका के नेतृत्व में यूरोपीय देश, रूस के ऊपर दर्जनों सख्त प्रतिबंध लगा चुके हैं, रूस को इंटरनेशनल मनी ट्रांसफर सिस्टम से बाहर किया जा चुका है और यूरोपीय देशों ने पिछले साल के खत्म होते होते, ना सिर्फ रूसी तेर पर प्रतिबंध लगा दिया, बल्कि रूसी तेल पर प्राइस कैप भी लगा दिया। यानि, 60 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की कीमत पर कोई भी देश अगर रूस से तेल खरीदता है, तो वो जी7 के प्राइस कैप का उल्लंघन होगा। लेकिन, ताजा रिपोर्ट में यूरोप के डबल स्टैंडर्ड का खुलासा हो गया है और पता चला है, कि यूरोपीय देश भारत के साथ रूस से तेल की बंपर खरीददारी कर रहे हैं।
भारत के रास्ते रूस से तेल खरीदता यूरोप
ताजा रिपोर्ट से पता चला है, कि वित्तवर्ष 2022-23 में भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चे तेल का आयात किया है और अब रूस, भारत को तेल बेचने के मामले में नंबर-1 पर पहुंच चुका है। लेकिन, रिपोर्ट से ये भी पता चला है, कि रूस से कच्चे तेल के रिकॉर्ड आयात ने भारत की तेल कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजारों को खोल दिया। रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने वाले यूरोप ने भारतीय तेल कंपनियों से रिकॉर्ड तेल की खरीददारी की है। इंटरनेशनल तेल सप्लाई पर नजर रखने वाली संस्थाएं केप्लर और वोर्टेक्सा, जो उन जहाजों को ट्रैक करती हैं, जिनमें भरकर तेल की सप्लाई होती है, उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि यूरोप अब भारत से भारी मात्रा में तेल खरीदता है और ये तेल रूसी होती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारतीय तेल कंपनियां कम कीमत पर रूसी तेल खरीदती हैं, लिहाजा भारतीय रिफाइनरियों के उत्पादन और मुनाफे में भी रिकॉर्ड इजाफा हुआ है, जिससे वो रिफाइंड तेल को यूरोपीय बाजारों में बेचने के लिए किसी भी विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो गये हैं।

भारत से कितना तेल खरीदता है यूरोप
केप्लर और वोर्टेक्सा की रिपोर्ट में कहा गया है, कि यूक्रेन युद्ध से पहले यूरोप ने आम तौर पर भारत से औसतन 154,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) डीजल और जेट ईंधन का आयात किया था। और Kpler के आंकड़ों से पता चलता है, कि 5 फरवरी से यूरोपीय संघ द्वारा रूसी तेल उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद यह बढ़कर 200,000 बीपीडी हो गया। आंकड़ों से पता चलता है, कि इस साल मार्च में रूसी कच्चे तेल का भारत में आयात लगातार सातवें महीने भी बढ़ा है और अब रूस ने भारत को तेल बेचने के मामले में इराक को पीछे छोड़ दिया है और नंबर-1 पर पहुंच गया है। ये पहली बार हुआ है, जब रूस भारत का नंबर-1 तेल सप्लायर बन गया है।
रूस से कितना तेल खरीदता है भारत
यूक्रेन युद्ध से पहले भारतीय तेल कंपनियां उच्च ट्रांसपोर्टेशन लागत की वजह से काफी कम तेल का आयात रूस से करते थे, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने भारत को भारी डिस्कॉउंट पर तेल बेचना शुरू कर दिया और भारत ने वित्तवर्ष 2022/23 में रूस से कुल 970,000-981,000 बीपीडी का आयात किया है। आंकड़ों से पता चलता है, कि 2021/22 में इराक से आयात लगभग 1 मिलियन बीपीडी से घटकर 936,000-961,000 बीपीडी हो चुका है और इराक अब तेल बेचने के मामले में दूसरे नंबर पर जा चुका है। रूस की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी रोसनेफ्ट और शीर्ष भारतीय रिफाइनर इंडियन ऑयल कॉर्प एक टर्म डील पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका भारत को जबरदस्त फायदा हुआ है।
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भारत पर कैसे निर्भर हो रहा यूरोप?
केप्लर और वोर्टेक्सा के आंकड़ों से पता चलता है, कि यूरोपीय देशों में भारतीय डीजल की बिक्री में 12 से 16 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है और अब भारत यूरोप में 150,000-167,000 बीपीडी तेल की बिक्री करता है। वहीं, भारत जो एक साल पहले तक यूरोप को करीब 21 प्रतिशत गैस का निर्यात करता था, उसका गैस निर्यात बढ़कर 30 प्रतिशत को पार कर चुका है। केप्लर के आंकड़ों से पता चलता है, कि भारतीय डीजल के प्रमुख यूरोपीय खरीदार फ्रांस, तुर्की, बेल्जियम और नीदरलैंड हैं। यूरोप को निर्यात बढ़ाने के अलावा, भारत ने यू.एस. को वैक्यूम गैस ऑयल (वीजीओ) का शिपमेंट भी बढ़ाया है।
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