Ethiopia की कुप्रथा, शादी के लिए किया जाता है किडनैप, गर्भवती होने तक रेप फिर बच्चा होने पर शादी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री अबी अहमद को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलने से इथोपिया अभी चर्चा में है। भुखमरी, यौन हिंसा और सूखे की मार से तबाह यह अफ्रीकी देश पहली बार दुनिया के नक्शे पर सम्मान के साथ उभरा है। इस देश में मानव जीवन की स्थिति अत्यंत भयावह है । इथोपिया की मार्मिक कहानी मानव सभ्यता और विकास के मुंह पर जोरदार तमाचा है। अबी अहमद पिछले साल ही प्रधानमंत्री बने हैं। युद्ध, हिंसा और गरीबी से उन्हें लंबी लड़ाई लड़नी होगी। इस साल भी इथोपिया में भयंकर अकाल पड़ा है। बारिश नहीं होने से फसल मारी गयी है। पानी की जबर्दस्त कमी है। लोगों के पास खाने के लिए अनाज नहीं है। भुखमरी इस देश का पीछा नहीं छोड़ रही। इथोपिया को नोबेल प्राइज से भी बड़े मदद की दरकार है।

भूख से कराहता इथोपिया

भूख से कराहता इथोपिया

इथोपिया की आबादी करीब ग्यारह करोड़ है। अप्रैल में एक सरकारी अकलन में करीब दो करोड़ 20 लाख लोगों के भूख से मरने की आशंका जतायी गयी थी। यहां राहत कार्य में जुटी अंतर्राष्ट्रीय संस्था ऑक्सफेम ने इसकी जानकारी दी थी। अब यहां कुपोषित लोगों की संख्या छह करोड़ से ऊपर पहुंच गयी। इसलिए इथोपिया की सरकार ने विश्वसमुदाय से गुहार लगायी है कि वह 6 करोड़ 40 लाख भूखे लोगों के लिए तत्काल मदद मुहैया कराये। इस देश के आपात संसाधन तेजी से खत्म हो रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाने के लिए इथोपिया ने 26 करोड़ 50 लाख डॉलर की तत्काल सहायता मांगी है। अक्सर अकाल पड़ने से यहां हमेशा भुखमरी की स्थिति रहती है।

अस्थिर और असुरक्षित इथोपिया

अस्थिर और असुरक्षित इथोपिया

इथोपिया को मानव उत्पत्ति के प्राचीनतम स्थल माना जाता है। यहां सबसे पुराने मानव जीवाश्म पाये गये हैं। लेकिन वक्त के घुमते पहिये ने इस प्राचीन देश को मौत का कुआं बना दिया है। पहले इस देश में राजशाही थी। 1974 में यहां राजशाही का खात्म हुआ तो कम्युनिस्टों की तानाशाही स्थापित हो गयी। कम्युनिस्ट शासन के दौरान इस देश में कई बार तख्तापलट की कोशिशें हुईं। गृह युद्ध और विद्रोह ने पूरे देश को हिंसा की आग में झोंका दिया। आम लोगों का जीवन खतरे में पड़ गया। रही-सही कसर अकाल ने पूरी कर दी। हजारों लोग भूख से बिलबिला कर मर गये। लाखों लोग इथोपिया छोड़ कर पड़ोसी देशों में शरण ले ली। पड़ोसी देश सोमालिया और इरिट्रिया के साथ युद्ध ने इथोपिया को तबाह कर दिया। 1991 में कम्युनिस्ट तानाशाही भी उखड़ गयी। 1994 में यहां नया संविधान लागू हुआ और इथोपिया लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया। लोकतंत्र की स्थापना के बाद भी यहां राजनीति संघर्ष जारी रहा। 2005 के चुनाव पर विवाद हो गया। राजनीति उथलपुथल के बीच 2016 में यहां आपातकाल लागू किया गया। 2018 में जब आपातकाल खत्म हुआ तो अबी अहमद चुनाव जीत कर इथोपिया के प्रधानमंत्री बने।

60 फीसदी महिलाएं यौन हिंसा की शिकार

60 फीसदी महिलाएं यौन हिंसा की शिकार

इथोपिया में महिलाओं की स्थिति बहुत खराब है। यौन अपराध यहां की सबसे बड़ी समस्या है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां की 60 फीसदी महिलाएं यौन हिंसा का शिकार हैं। यहां की एक कुप्रथा ने यौन हिंसा को बढ़ावा दिया है। इथोपिया में अपहरण कर शादी करने की एक कुप्रथा है। शादी करने की नीयत से कोई युवक अपने साथियों के साथ किसी लड़की को अगवा कर लेता है। इस लड़की को छिपा कर रखा जाता है और तब तक रेप किया जाता है जब कि वह गर्भवती नहीं हो जाती। इस दौरान इन लड़कियों को घोर यंत्रणा से गुजरना पड़ता है। इसके बाद अपहरण करने वाल युवक बच्चे का पिता होने के नाते उससे शादी कर लेता है। कई बार दस-बारह साल की लड़कियों का अहरण कर लिया जाता है। इस अमानवीय रिवाज के कारण इयोपिया की अधिकतर लड़कियों को अत्याचार सहना पड़ता है। 2004 में कानून बना कर इस कुप्रथा पर रोक लगायी गयी है लेकिन उससे कुछ कास फायदा नहीं हुआ। यहां गृहयुद्ध के दौरान सेना के जवान भी विद्रोहियों के इलाकों में औरतों से रेप करते थे।

जब शेरों ने बचायी लड़की की जान

जब शेरों ने बचायी लड़की की जान

2005 में एक लड़की का तब अपहरण कर लिया गया था जब स्कूल जा रही थी। उसे छिपाने के लिए अपहरणकर्ता दक्षिणी पश्चिम जंगल में ले गये थे। उसके साथ मारपीट भी की। इस बीच वह लड़की मौका देख कर भाग गयी। वह जोर-जोर से रो रही थी। उसे पकड़ने के लिए अपहरणकर्ता उसकी तरफ दौड़े। कुछ दूर जाने पर जंगल में अपहरणकर्ताओं के सामने अचानक तीन शेर आ कूदे। शेर को देख कर वे भाग गये। इन तीन शेरों ने तब तक लड़की की रखवाली की जब तक कि उसे लोग खोजते हुए वहां नहीं पहुंचे। लोगों को आता देख कर शेर जंगल के अंदर चले गये। वन विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक लड़की की रोने की आवाज से शेरों को लगा होगा कि शायद उनका कोई बच्चा रो रहा है। इस लिए वे वहां जमा हो गये थे और बिना नुकसान पहुंचाए वहां से चले गये। ये हैरतअंगेज घटना बिल्कुल सच्ची है जो इथोपिया राजधानी अदिस अबाबा से करीब 560 किलोमीटर दूर जंगलों में हुई थी।

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