मणिपुर में दंगा भड़काने के लिए विद्रोही कर रहे स्टारलिंक इंटरनेट का इस्तेमाल? एलन मस्क का आया बड़ा बयान

Starlink in Manipur: क्या मणिपुर में दंगा भड़काने के लिए स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशन लिंक का इस्तेमाल हो रहा है? पहली बार स्टारलिंक के अरबपति कारोबारी मालिक एलन मस्क का बयान इसको लेकर आया है।

स्पेसएक्स (SpaceX) के अरबपति संस्थापक एलन मस्क ने उन दावों को खारिज कर दिया है, कि उनकी सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस स्टारलिंक का इस्तेमाल हिंसा प्रभावित मणिपुर में विद्रोहियों की तरफ से किया जा रहा है। ये दावे तब शुरू हुए थे, जब भारतीय सुरक्षा बलों की एक इकाई की तरफ से शेयर की गई तस्वीरों से पता चला, कि उन्होंने एक ऐसा उपकरण जब्त किया था, जिसमें स्टारलिंक का लोगो लगा था।

Starlink in Manipur

यहां जानना जरूरी हो जाता है, कि भारत में स्टारलिंक की सेवाओं को अभी तक हरी झंडी नहीं मिली है, और कंपनी कानूनी तौर पर अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश में अपने इंटरनेट के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दे सकती है।

एलन मस्क ने कहा है, कि 'स्टारलिंक सैटेलाइट बीम अभी भारत को लेकर बंद है।'

स्टारलिंक को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ?

दरअसल, 16 दिसंबर को भारतीय सेना की स्पीयर कोर ने कहा था, कि उसने राज्य की पुलिस के साथ मिलकर चुराचांदपुर, चंदेल, इंफाल ईस्ट और कागपोकपी जिलों में पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों में संयुक्त अभियान चलाया था। अभियान के दौरान "स्नाइपर, ऑटोमेटिक हथियार, राइफल, पिस्तौल, देशी मोर्टार, सिंगल बैरल राइफल, ग्रेनेड, गोला-बारूद और युद्ध लड़ने के लिए बनाए गये सामानों के साथ 29 हथियार" बरामद किए हैं।

यूनिट ने बरामद किए गये सामानों और हथियारों में स्टारलिंक के लेबल वाले एक सफेद उपकरण की तस्वीर भी शेयर की थी।

क्या भारत में स्टारलिंक की सर्विस कानूनी है?

भारत ने अभी तक देश में सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट सर्विस प्रदान करने के लिए स्टारलिंक के एप्लीकेशन को मंजूरी नहीं दी है। ऐसा माना जा रहा है, कि इसका आवेदन गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी के लिए पेंडिंग है।

पिछले महीने, दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था, कि स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक के लॉन्च पर कोई भी फैसला भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की सिफारिशों पर निर्भर करेगा, जो फिलहाल इसको लेकर कंसल्टेशन प्रोसेस में है।

इसलिए, कंपनी अभी भारत में कानूनी रूप से अपनी सेवाएं नहीं दे सकती है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टारलिंक की वेबसाइट पर मौजूद मानचित्र, जो उन क्षेत्रों को दर्शाता है जहां सेवा उपलब्ध है, वो कहता है कि स्टारलिंक भारत में "रेगुलेटरी अप्रूवल के लिए पेंडिंग है"। पाकिस्तान को लेकर भी मानचित्र में यही कहा गया है। वहीं, मानचित्र में ये भी कहा गया है, कि यह सेवा बांग्लादेश और भूटान में "2025 में शुरू हो रही है"। नेपाल और म्यांमार में स्टारलिंक अभी उपलब्ध नहीं है।

स्टारलिंक बनाम टेलीकॉम कंपनियां

भारत ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन के लिए एयरवेव की नीलामी करने के रिलायंस जियो के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और इसके बजाय प्रशासनिक आवंटन का पक्ष में फैसला लिया और भारत सरकर के इस कदम को कंपनी के कुछ सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों, खासकर अरबपति एलन मस्क के स्टारलिंक के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

दूरसंचार अधिनियम, 2023 ने प्रशासनिक आवंटन की सूची में सैटेलाइट संचार के लिए स्पेक्ट्रम को जोड़ा है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने बाद में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) से स्पेक्ट्रम आवंटित करने के लिए एक कार्यप्रणाली तैयार करने के लिए कहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, TRAI फिलहाल इस बात पर काम कर रहा है, कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के लिए कीमत कितनी होनी चाहिए। वहीं, जियो ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए टेलीकॉम रेगुलेटर को पत्र लिखा है। उनका मुख्य तर्क यह है, कि प्रशासनिक आवंटन सैटेलाइट और स्थलीय सेवाओं के बीच 'समान खेल का मैदान' लाने में सक्षम नहीं हो सकता है। यानि, स्टारलिंक का मुकाबला करने में भारतीय कंपनियां सक्षम नहीं होंगी। लेकिन एलन मस्क ने जवाब देते हुए कहा था, कि "यह अभूतपूर्व होगा, क्योंकि इस स्पेक्ट्रम को लंबे समय से ITU द्वारा सैटेलाइट के लिए साझा स्पेक्ट्रम के रूप में नामित किया गया था।"

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