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मिस्र को खाद्य संकट से 'आलू' बचाएगा ! गेहूं के लिए भारत से उम्मीद

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काहिरा, 27 जून : मिस्र दुनिया के सबसे बड़े गेहूं आयतकों में से एक है। यहां गेहूं की अधिक खपत होती है। अभी तक मिस्र यूक्रेन और पास के अन्य देशों से अपना अधिकांश अनाज खरीदता आ रहा था ,लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच चल रही भयंकर जंग के कारण देश को गेहूं खरीदने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मिस्र ने भारत से एक लाख 80 हजार टन गेहूं खरीदने का अनुबंध किया है, जो पहले की सहमति से कम बताया जा रहा है।

potato

आलू की सहायता लेगा मिस्र
आपूर्ति मंत्री अली एल मोसेल्ही का कहना है कि, उनका देश अनाज से अधिक आटा निकालने के लिए अधिक से अधिक आलू का उपयोग करने के तरीकों पर विचार कर रहा है। इससे गेहूं के आयात में कमी आएगी। उन्होंने कहा, हम 5 लाख (500,000) टन गेहूं के लिए सहमत हुए थे पर बंदरगाह में 1 लाख 80 हजार (180,000) टन ही है।

जंग ने खेल बिगाड़ा
यूक्रेन में जंग ने दुनिया के कई देशों को भुखमरी की राह पर ला खड़ा किया है। संयुक्त राष्ट्र ने तो पहले ही चेतावनी जारी कर चुका हि कि, अगर यूक्रेन में जंग समाप्त नहीं हुआ तो आने वाले समय में कई देश भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे। इससे दुनिया में खाद्य संकट उत्पन्न हो जाएगा। मिस्र देश मुख्य रूप से आयातित गेहूं पर ही निर्भर है। इससे वह अपनी 10.3 करोड़ ( 103 मिलियन) आबादी में से 7 करोड़ ( 70 मिलियन) से अधिक लोगों को भारी सब्सिडी वाली रोटी का इंतजाम करता है।

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गेहूं का पर्याप्त भंडार
जैसा कि मिस्र ने आयात मूल में विविधता लाने की मांग की है, आपूर्ति मंत्री अली एल मोसेल्ही ने मई में कहा कि वह भारत से 500,000 टन गेहूं खरीदने के लिए सहमत हो गया है। वहीं, भारत ने उसी महीने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन खाद्य सुरक्षा जरूरतों वाले मिस्र जैसे देशों के लिए भत्ते दिए। उन्होंने कहा कि, हम गेहूं की कमी को पूरी करने के लिए आलू का सहारा लेंगे। हम अब तकनीक को देख रहे हैं। मोसेल्ही के अनुसार, स्थानीय फसल में 3.9 मिलियन टन की खरीद के बाद लगभग 6 महीने के लिए वर्तमान गेहूं का पर्याप्त भंडार है।

भारत ने की सहायता
इससे पहले दो जून को मिस्र के सप्लाई एवं आंतरिक व्यापार मामलों के मंत्री अली एल मोसेल्ही ने कहा था कि मिस्र सरकार भारत के साथ एक डील पर बातचीत कर रही है। गेहूं को लेकर हाल ही में मोसेल्ही ने काहिरा में मिस्र में भारत के राजदूत से मुलाकात भी की थी। इस दौरान भारत से 500,000 टन गेहूं के आयात समझौते पर चर्चा की गई थी। भारत ने भी गेहूं निर्यात पर बैन के बावजूद मिस्र को गेहूं भेजने पर सहमति दी थी।

गेहूं की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित
बता दें कि मिस्र विश्व में गेहूं के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की वजह से दुनिया भर में गेहूं की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई। इससे प्रभावित होने वाले देशों में मिस्र भी है। कोरोना वायरस के बाद से मिस्र विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रहा है. घरेलू बाजार से अंतरराष्ट्रीय निवेशक पहले ही अपनी पूंजी निकाल चुके हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है।

मिस्र दुनिया में गेहूं का सबसे बड़ा आयातक देश
मिस्र दुनिया में गेहूं का सबसे बड़ा आयातक देश है। देश में बड़े पैमाने पर ब्रेड कार्यक्रम चलाया जाता है ताकि देश के लगभग सात करोड़ लोगों का पेट भरा जा सके। रूस, यूक्रेन युद्ध होने से पहले तक मिस्र इन्हीं देशों से गेहूं का सर्वाधिक आयात करता था लेकिन यूक्रेन संकट के कारण हालात खराब हो गए है। मिस्र संकट की इस घड़ी से उबरने के लिए भारत से आस लगाए बैठा है।

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English summary
Egypt has contracted to buy 180,000 tonnes of wheat from India, less than previously agreed, but is looking at ways to extract more flour from grain and even use potatoes in bread making as it tries to trim imports, the supply minister said on Sunday.
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