पृथ्वी से टकराने वाला है अब तक का सबसे भयानक Solar Storm,पेड़ के छल्लों से मिले संकेत

पेड़ों के छल्लों या Tree Ring अक्सर उसकी उम्र का पता लगाने और इतिहास से जुड़े तथ्यों की छानबीन के लिए काम में आते हैं। वैज्ञानिक हमेशा से इसका इस्तेमाल करते रहे हैं। पेड़ों में छल्लों की संख्या से उसकी आयु का पता चल जाता है। लेकिन, अब उन्हीं छल्लों पर हुए शोध ने सौर तूफानों को लेकर बहुत बड़ा रहस्य उजागर कर दिया है। वैज्ञानिकों को मालूम हुआ है कि लगभग हर हजार साल में ऐसे सौर तूफान पृथ्वी से टकराते हैं, जो बहुत ही भयानक तबाही का कारण बनते रहे हैं। यह इतने भयंकर होते हैं कि जंगलों का नाश हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक एक बार फिर से वह एक हजार साल का साइकिल पूरा होने वाला है।

1989 के सौर तूफान में तबाह हो गए थे संचार उपकरण

1989 के सौर तूफान में तबाह हो गए थे संचार उपकरण

पृथ्वी पर सौर तूफानों से जुड़े इतिहास में 1859 के सौर तूफान को सबसे भयानक बताया जाता था। विज्ञान की भाषा में इसे Carrington event के नाम से जानते हैं। इसके बारे में बताया जाता है कि यह इतना भयानक सौर तूफान (Solar Storm) था कि तब संचार के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले टेलीग्राफ मशीनों में आग लग गई थी। जिन देशों में उस समय पावर ग्रिड काम करते थे, वह पूरी तरह से ठप पड़ गए थे। लेकिन, वैज्ञानिकों ने अब जो ट्री रिंग डेटा (Tree Ring data) का विश्लेषण किया है, उससे सौर तूफानों को लेकर बहुत ही भयावह तस्वीर पेश हुई है।

हर एक हजार साल में होता है Miyake Event

हर एक हजार साल में होता है Miyake Event

ट्री रिंग डेटा की जांच में यह बात सामने आई है कि सौर तूफान ने 1859 में जो धरती पर कहर बरपाया था, वह 774 CE (कॉमन एरा) की घटना के मुकाबले कुछ भी नहीं था। सौर तूफान से जुड़ी इस घटना को Miyake Event के नाम से जानते हैं। यह सौर तूफान इतना भयानक था कि इसके चलते जंगलों में आग लग गई थी। लेकिन, अब खुलासा हो रहा है कि इस तरह का सौर तूफान हर 1000 साल बाद धरती से टकराता है।

पेड़ों के छल्लों से मिले संकेत

पेड़ों के छल्लों से मिले संकेत

जापान के शोधकर्ताओं ने ट्री रिंग या पेड़ों के छल्लों के विश्लेषण के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है। उनका शोध नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने ट्री रिंग का अध्ययन करके ऐसे कई सौर तूफानों के बारे में पता लगाया है। इस शोध के अनुसार सौर विकिरण की वजह से यह प्राकृतिक घटना 774-775 CE के बीच हुई थी। उनके मुताबिक इस सौर तूफान की तीव्रता Carrington event से 10 गुना ज्यादा थी।

देवदार के पेड़ों के छल्लों पर हुई रिसर्च

देवदार के पेड़ों के छल्लों पर हुई रिसर्च

जापानी वैज्ञानिकों को ये साक्ष्य देवदार के पेड़ों में मिले हैं, जिसमें रेडियोऐक्टिव कार्बन-14 में भारी बढ़ोतरी दिखी है। दिलचस्प बात ये है कि ट्री रिंग का विश्लेषण परंपरागत तौर पर पेड़ों की उम्र और बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं का पता लगाने के लिए किया जाता रहा है। इसके तहत मोटे तौर पर छल्लों की गिनती और उसमें हुए बदलावों की पड़ताल की जाती है। लेकिन, जब इसमें रेडियोकार्बन में बढ़ोतरी नजर आती है तो इससे खगोलीय घटना का संकेत मिलता है। लेकिन, यह जरूरी नहीं कि यह सौर तूफान की वजह से हुआ हो। यह सुपरनोवा विस्फोटों की वजह से भी हो सकता है।

10,000 वर्ष की अवधि की घटनाओं का विश्लेषण

10,000 वर्ष की अवधि की घटनाओं का विश्लेषण

साइंस अलर्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब शोधार्थियों की टीम वहां पर उलझी तो आगे की रिसर्च पर क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के गणितज्ञ क्विगियुआन झैंग की अगुवाई वाली टीम ने काम किया। झैंग ने बताया, 'हमने 10,000 वर्ष की अवधि के ग्लोबल कार्बन साइकिल की प्रक्रिया को रिकंस्ट्रक्ट किया, ताकि Miyake Event का पैमाना और प्रकृति हासिल कर सकें।' इस शोध से बहुत ही डरावनी तस्वीर निकलकर सामने आई। क्योंकि, 774 CE का सौर तूफान अकेली घटना नहीं थी। यह इतिहास में कई बार आ चुका था और मोटे तौर पर एक हजार साल के अंतराल में। हालांकि, इसके बारे में अभी भी विस्तार से बहुत ज्यादा जानकारी नहीं मिली है। ना ही सूर्य की गतिविधियों से कोई तालमेल ही स्थापित हो पाया है।

पृथ्वी से भविष्य में जल्द टकरा सकता है भयानक सौर तूफान!

पृथ्वी से भविष्य में जल्द टकरा सकता है भयानक सौर तूफान!

वैज्ञानिकों ने जापान के ट्री रिंग डेटा से जो जानकारी जुटाए हैं, उससे इतना जरूर पता चला है कि 774 CE के बाद पृथ्वी ने उतने भयानक सौर तूफान का सामना कभी नहीं किया है। यानि यह होना अभी बाकी है। लेकिन, यदि ऐसा हुआ तो इसकी वजह से ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं, जिसे विज्ञान की दुनिया में 'इंटरनेट कयामत' कहते हैं, जो वायरलेस टेक्नोलॉजी को बुरी तरह से तबाह कर देगा। मोबाइल नेटवर्क, जीपीएस, रेडियो संचार और इंटरनेट चौपट हो जाएगा। यह पावर ग्रिड को भी तबाह कर सकता है और जंगलों में भयानक आग भी लग सकती है। इस टीम के हिस्सा रहे ऐस्ट्रोफिसिसिस्ट बेंजामिन पोप के मुताबिक, 'उपलब्ध डेटा के आधार पर अगले एक दशक के अंदर ऐसा देखे जाने का मोटे तौर पर एक फीसदी संभावना है। '

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