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डुस्को पोपोव: असली 'जेम्स बॉन्ड' जो एक 'ट्रिपल एजेंट' था

By BBC News हिन्दी

डुस्को पोपोव
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डुस्को पोपोव

जुआ, जासूसी और हसीनाएं... उन्हें हर फन में महारत हासिल थी. उनका नाम पोपोव था.

हम बात कर रहे हैं दूसरे विश्व युद्ध के दौरान मशहूर हुए एक सर्बियाई डबल एजेंट डुस्को पोपोव की. जासूसी की दुनिया के इतिहास में पोपोव का नाम ट्रिपल एजेंट के तौर पर भी लिया जाता है.

कहते हैं कि ब्रितानी नैवल इंटेलीजेंस के अफ़सर इयान फ़्लेमिंग ने डुस्को पोपोव से मुलाकात के बाद ही जेम्स बॉन्ड का किरदार रचा था.

कुछ लोगों का कहना है कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोपोव को पर्ल हार्बर बंदरगाह पर जापानियों के हमले की ख़बर थी.

पोपोव ने एफ़बीआई के तत्कालीन डायरेक्टर एडगार हूवर को इसके बारे में बताया भी था.

अगर एडगार हूवर ने पोपोव की बात पर यकीन किया होता तो पर्ल हार्बर में हुई अमरीकियों की तबाही टाली जा सकती थी.

जेम्स बॉन्ड
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जेम्स बॉन्ड

कौन थे डुस्को पोपोव

डुस्को पोपोव का जन्म साल 1912 में एक समृद्ध सर्बियाई परिवार में हुआ था. बेलग्रेड यूनिवर्सिटी से क़ानून की पढ़ाई के बाद वे आगे की स्टडी के लिए जर्मनी चले गए.

दूसरे विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि पर लिखे गए उपन्यास 'एस्टोरिल' के लेखक डेजान टियागो स्टांकोविच बताते हैं, "जर्मनी में पोपोव की ऐसे लोगों से दोस्ती हुई जिनके तार वहां की खुफिया एजेंसी 'अब्येहर' से जुड़े हुए थे. 'अब्येहर' ने पोपोव से संपर्क किया और उन्हें ब्रिटेन में जर्मनी के लिए जासूसी करने का ऑफ़र दिया."

"क्योंकि उस ज़माने में जर्मनी के पास ब्रिटेन में ज़्यादा विदेशी जासूस नहीं थे. पोपोव ने 'अब्येहर' का ऑफ़र स्वीकार कर लिया और वे सीधे ब्रिटिश फ़ॉरेन इंटेलीजेंस एजेंसी 'एमआई-सिक्स' के पास चले गए. पोपोव ने एमआई-सिक्स को सारी बातें बता दीं."

डुस्को पोपोव
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डुस्को पोपोव

इसके साथ ही पोपोव ब्रिटेन और जर्मनी दोनों के लिए काम करने वाले डबल एजेंट बन गए. ये साल 1940 से 1944 के बीच की बात है.

ब्रिटेन के जासूसी हलकों में पोपोव का कोडनेम 'एजेंट ट्राइसिकल' था.

एक रंगीन मिज़ाज जासूस

अठारह साल पहले ब्रिटेन ने पहली बार विश्व युद्ध के ज़माने के जासूसों और डबल एजेंट्स से जुड़े क्लासीफाइड डॉक्युमेंट्स सार्वजनिक किए.

बीबीसी की क्लेयर हिल्स ने उन दस्तावेज़ों को देखने के बाद तब ये लिखा था, "ब्रितानी हितों के लिए काम करने वाले सबसे रंगीन मिजाज जासूस को केवल एक ही कोडनेम से बुलाया जा सकता है. वो है प्लेब्वॉय डबल एजेंट. वो एक ऐसा शख़्स था जो बीवी और मेहबूबा दोनों को एक साथ मैनेज कर सकता था."

सेवॉय होटल
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सेवॉय होटल

लंदन के सेवोय होटल के एक ख़ास कमरे में पोपोव ठहरा करते थे. हसीनाओं का ख्याल किस तरह से रखा जाता है, पोपोव इसमें बाज़ीगर थे, उन्हें प्लेब्वॉय की शोहरत इसी से मिली. हालांकि बाद में दुनिया को पता चला कि डुस्को पोपोव बिस्तर पर एक से ज़्यादा पार्टनर का भी शौक रखते थे.

ब्रितानी खुफिया सेवा के अधिकारी मेजर टीए रॉबर्टसन ने एक आधिकारिक रिकॉर्ड में पोपोव के बारे में लिखा था, "1940 के क्रिसमस पर मैं और ट्राइसिकल लंदन के क्वैगलिनोस रेस्तरां में लंच पर मिले. वहां से हम लैंड्सडाउन क्लब के बर्कले स्क्वायर पर बिलियर्ड्स खेलने के लिए गए. फिर डिनर के लिए सेवोय होटल लौट आए. मुझे लगता है कि ट्राइसिकल ने खूब इन्जॉय किया. उसने जमकर शैम्पेन पी थी."

'अत्यंत गोपनीय'

ब्रिटेन की खुफिया मशीनरी में पोपोव की अहमियत का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कुछ लोग उन्हें देश का सबसे महत्वपूर्ण एजेंट भी कहते थे.

वायरलेस कम्युनिकेशन, न दिखने वाली स्याही से लिखे जाने वाले पोस्टकार्ड, माइक्रोडॉट्स के स्पेशल कोड्स, पोपोव की तरकश में ऐसे कई तीर थे.

पोपोव ने अपने जर्मन साथियों को मना लिया था कि वे उन्हें ब्रिटेन की अहम खुफिया सुराग दे रहे हैं. जबकि हकीकत ये थी कि 'एमआई-सिक्स' की रजामंदी से ही पोपोव ये जानकारियां जर्मनी को मुहैया करा रहे थे.

एजेंट ट्राइसिकल की फ़ाइल में एक चैप्टर 'अत्यंत गोपनीय' नाम से भी था. इस चैप्टर में उस घटना का जिक्र था, जब एक जर्मन अधिकारी ने पोपोव को ब्रितानी हथियारों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए सवालों की एक लिस्ट दी थी.

जर्मन अफ़सर पोपोव से जानना चाह रहे थे कि ब्रिटेन के वेब्रिज, वोल्वहैंपटन और डार्टफोर्ड में मौजूद कारखानों में किस चीज़ का उत्पादन हो रहा है. ब्रितानी मिलिट्री के पास किस तरह की बंदूक़ें और हथियार हैं.

डुस्को पोपोव
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डुस्को पोपोव

लेकिन पोपोव डबल एजेंट थे...

जर्मनी पोपोव से हर बारीक जानकारी जुटाना चाहता था. उनसे पूछा गया था कि ब्रिटेन के पास कितने लड़ाकू विमान हैं, कितने स्पिटफ़ायर और हरीकेन विमान हैं? सेना के बख़्तरबंद डिविजन में क्या है और क्या नहीं.

ब्रितानी खुफिया सेवा के अधिकारी पोपोव के लिए इन सवालों के जवाब तैयार करते थे जो दिखने में तो वास्तविक लगें लेकिन वे अधूरी हुआ करती थीं. एजेंट ट्राइसिकल इस जानकारी को जर्मन अधिकारियों को मुहैया करा देते थे.

डुस्को पोपोव ने न दिखने वाली एक स्याही का फॉर्मूला तैयार किया था. वो इसे शराब की ग्लास में मिला देते थे. पोपोव की फाइल में ऐसी दर्जनों बातों का जिक्र है. अदृश्य स्याही से लिखे उनके पोस्टकार्ड, एयरमेल से भेजे गए खत जिन पर ओपेन्ड और एग़्जामिंड का मुहर लगाया जाता था, प्रेमिकाओं को लिखी चिट्ठियां जो दरअसल हिज मजेस्टी की सर्विस में भेजी जाती थीं.

वे अंग्रेज़ी, इतालवी और फ्रेंच तीनों भाषाएं बोलते थे, उन्हें कामचलाऊ जर्मन भी आती थी.

अपने मैसेज में उन्होंने मित्र देशों की बमबारी से जर्मनी के शहरों को हुए नुक़सान के बारे में जानकारी दी थी. ऐसे ही एक संदेश में पोपोव ने बताया था कि जर्मनी के हैमबर्ग बंदरगाह को बमबारी से बहुत नुक़सान हुआ है लेकिन ये अभी भी इस्तेमाल के लायक है.

ज़हीन और तहज़ीबदार

डुस्को पोपोव के बारे में ब्रितानी सेना के एक अफ़सर ने लिखा था, "एजेंट ट्राइसिकल जर्मनी को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं. साल 1941 में एक मौके पर तो पोपोव ने यहां तक कह दिया था कि दो साल के भीतर ब्रिटेन की जीत को लेकर वो पूरी तरह से आश्वस्त हैं. क्योंकि जर्मनी की अर्थव्यवस्था और नैतिक बल दोनों ही कमज़ोर पड़ गया था."

ऐसे ही एक रस्मी पैग़ाम में पोपोव को एक 'ज़हीन और तहज़ीबदार शख़्स' करार दिया गया था.

पूरा संदेश कुछ इन शब्दों में था, "उसके पास पर्सनैलिटी है, चार्म है. वो यूरोप या अमरीका के किसी भी शहर में सोसायटी सर्कल में इस तरह से रहता है, मानो वो उसका घर हो. वो इंटरनेश्नल प्लेब्वॉय की तरह है. शांति काल में वो साल का एक महीना या इससे ज़्यादा पैरिस में गुजारता है. खूबसूरत औरतों की सोहबत उसे ख़ास तौर पर पसंद है."

सबसे दिलचस्प बात तो ये थी कि एजेंट ट्राइसिकल ने ब्रितानी खुफिया सेवा से पैसा लेने से मना कर दिया था. पोपोव का कहना था कि जिस देश के लिए वो सच्चे दिल से श्रद्धा रखते हैं, उसके लिए काम करके खुश हैं और जर्मनी उन्हें ज़रूरत के हिसाब से काफी पैसा देता है.

लेकिन कई मौकों पर ब्रितानी खुफिया सेवा ने उन्हें पैसे की मदद दी थी. ऐसे ही एक रिकॉर्ड में लिखा है, "शुक्रवार, 14 मार्च, 1941. सेवोय में लंच पर मेरी मुलाकात ट्राइसिकल से हुई. जब ट्राइसिकल ने मुझे बताया कि बिल पे करने के लिए उनके पास ज़रूरी पैसे नहीं हैं तो वो थके हुए दिख रहे थे. इससे ऐसा लगता है कि उनकी पिछली शाम काफी महंगी गुजरी होगी."

द्वितीय विश्व युद्ध
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द्वितीय विश्व युद्ध

दूसरे विश्व युद्ध के समय पुर्तगाल

इटली में ट्रेनिंग के बाद अंग्रेज़ों ने पोपोव को पुर्तगाल भेज दिया जहां उनके जर्मन बॉस 'कसीनो एस्टोरिल' होटल में रह रहे थे.

डेजान टियागो स्टांकोविच बताते हैं, "उस ज़माने में पुर्तगाल का ऐतिहासिक 'कसीनो एस्टोरिल' होटल जासूसी गतिविधियों का अहम अड्डा हुआ करता था."

'कसीनो एस्टोरिल' लिस्बन शहर के बाहर एक बीच रिजॉर्ट था.

इतिहासकार आयरीन पेमेंटल बताती हैं, "दूसरे विश्व युद्ध के समय पुर्तगाल एक तटस्थ देश था. यूरोप के अन्य तटस्थ देशों की तरह ही पुर्तगाल में भी जासूसी गतिविधियां अपने चरम पर थीं. होटल की लॉबी, बार, हर जगह जासूस भरे हुए थे. ये ज़्यादातर जर्मनी और ब्रिटेन के थे."

"वे एकदूसरे का अभिवादन करते थे, मिलते-जुलते थे और गोपनीय जानकारी हासिल करने की फिराक में रहते थे. पोपोव और उनके जर्मन बॉस 'कसीनो एस्टोरिल' के रूलेट टेबल (एक तरह का जुए का खेल) पर नंबरों के ज़रिये जानकारी शेयर करते थे."

डुस्को पोपोव
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डुस्को पोपोव

इयान फ्लेमिंग से मुलाक़ात

अगर दुनिया इस वक़्त कोरोना वायरस के कोहराम से नहीं जूझ रही होती तो बॉक्स ऑफ़िस पर जेम्स बॉन्ड की 'नो टाइम टू डाइ' का डंका बज रहा होता.

डेजान टियागो स्टांकोविच बताते हैं, "दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, 1941 की गर्मियों की एक रात 'कसीनो एस्टोरिल' होटल में डुस्को पोपोव और इयान फ़्लेमिंग की मुलाकात हुई."

तब इयान फ़्लेमिंग ब्रितानी नैवल इंटेलीजेंस के अफ़सर हुआ करते थे और बाद वे जेम्स बॉन्ड का किरदार रचने के लिए दुनिया भर में मशहूर हुए.

डेजान टियागो स्टांकोविच कहते हैं, "मेरा मानना है कि इयान फ़्लेमिंग के दिल में जेम्स बॉन्ड का आइडिया उसी मुलाकात के बाद उसी जगह आया होगा."

पुर्तगाल के बाद डुस्को पोपोव का अलग मिशन अमरीका था.

डेजान टियागो स्टांकोविच कहते हैं, "अमरीका जाने से एक रात पहले पोपोव एस्टोरिल में जुआ खेल रहे थे. अगले दिन उन्हें सफ़र पर निकलना था इसलिए उनके पास ढेर सारा पैसा था. ये पैसा उन्हें जर्मंस ने दिया था. जुए के टेबल पर वे बहुत लापरवाही से बर्ताव कर रहे थे. अलग-अलग लड़कियों के साथ दिखना. उनकी शख्सियत किसी जासूस की तरह तो बिलकुल नहीं लग रही थी. तभी इयान फ़्लेमिंग की नज़र उनपर गई."

होटल
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होटल

पुर्तगाल का 'कसीनो एस्टोरिल'

फ़्लेमिंग और पोपोव दोनों एक ही वक़्त में एस्टोरिल में थे. होटल पैलेसियो एस्टोरिल की डिस्प्ले में दोनों के चेक-इन डॉक्युमेंट्स लगे हुए हैं.

साल 1969 में इसी होटल में जेम्स बॉन्ड की फिल्म 'ऑन हर मजेस्टीज सिक्रेट सर्विस' के कुछ हिस्सों की शूटिंग हुई.

इस होटल में जेम्स बॉन्ड के नाम से एक सुइट भी है जिसमें मेहमान ठहर सकते हैं.

डेजान टियागो स्टांकोविच बताते हैं, "हमारे पास इस बात की जानकारी है कि फ़्लेमिंग और पोपोव यहां नियमित रूप से ठहरते थे. इस बात की पूरी संभावना है कि उस रात कसीनो में फ़्लेमिंग और पोपोव की मुलाकात हुई होगी. हालांकि फ़्लेमिंग ने पोपोव से मुलाकात के बारे में कभी कुछ नहीं लिखा, इसलिए उनकी कहानी दुनिया को मालूम नहीं है."

लेकिन फ़्लेमिंग की मौत के बाद पोपोव ने अपनी आत्मकथा 'स्पाई एनकाउंट स्पाई' लिखी जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हीं से फ़्लेमिंग को जेम्स बॉन्ड की प्रेरणा मिली थी.

जेम्स बॉन्ड की फ़िल्म 'कसीनो रॉयल' दरअसल 'कसीनो एस्टोरिल' ही है.

जेम्स बॉन्ड की फिल्म ऑन हर मजेस्टीज सिक्रेट सर्विस का एक दृश्य
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जेम्स बॉन्ड की फिल्म ऑन हर मजेस्टीज सिक्रेट सर्विस का एक दृश्य

जेम्स बॉन्ड के लिए प्रेरणा

डेजान टियागो स्टांकोविच कहते हैं, "इतिहास से ऐसे जासूस बहुत कम हुए हैं जिनकी शख़्सियत जेम्स बॉन्ड के किरदार से मेल खाती हो, लेकिन डुस्को पोपोव सचमुच ऐसे थे जो जेम्स बॉन्ड की तरह लगते थे. हां, शराब पीने की आदत छोड़कर. पोपोव का दावा था कि वे जेम्स बॉन्ड की तरह नहीं पी सकते थे पर 007 का किरदार बेशक शराब का शौकीन है."

अपनी किताब 'एस्टोरिल' के लिए रिसर्च के सिलसिले में डेजान टियागो स्टांकोविच ने पाया कि फ़्लेमिंग ने अपने किरदार जेम्स बॉन्ड के लिए महंगी चीज़ों, शानोशौकत वाली जीवनशैली और खूबसूरत औरतों का शौक, जैसी खूबियां रची थीं, वो काफी हद तक पोपोव से प्रेरित लगता है.

डुस्को पोपोव का डेटिंग रिकॉर्ड ये बताता है कि कई औरतों से उनके संबंध थे.

पोपोव की प्रेमिकाओं में फ्रेंच अभिनेत्री सिमोने सिमोन का भी नाम लिया जाता है.

ट्राइसिकल का कोडनेम

बहुत से लोग ये भी कहते हैं कि पोपोव को एजेंट ट्राइसिकल का कोडनेम इसलिए मिला था क्योंकि वे एक ट्रिपल एजेंट थे और उन्होंने अमरीका के लिए भी काम किया था.

डेजान टियागो स्टांकोविच इसकी एक दूसरी कहानी बताते हैं, "जिस कहानी पर मुझे यकीन है, वो ये है कि पोपोव को पर्ल हार्बर बंदरगाहर पर जापानियों के हमले की ख़बर लग गई थी. लेकिन वे इतने बड़बोले थे और इतनी बेवकूफाना हरकतें करते थे कि अमरीकी खुफिया एजेंसी एफ़बीआई के तत्कालीन डायरेक्टर एडगार हूवर उन पर यकीन नहीं कर पाए. हूवर ने उन पर भरोसा नहीं किया. पोपोव ऐसे शख़्स की तरह नहीं लगते थे, जिसके पास इतनी भरोसेमंद जानकारी हो."

आख़िर जर्मनी के खुफिया अफसरों को पोपोव पर इतना यकीन क्यों था?

डेजान टियागो स्टांकोविच कहते हैं, "जब पोपोव का परिवार बेलग्रेड में ग़रीबी से जूझ रहा था तो वे दौलत के साथ खेल रहे थे. हज़ारों हज़ार उड़ा रहे थे. बेलग्रेड में नाज़ियों के हमले के दौरान पोपोव का परिवार बंधक बनाकर रखा गया था. इसीलिए जर्मनी को लगता था कि पोपोव पर भरोसा किया जा सकता है. लेकिन पोपोव का डबल गेम इससे कभी रुका नहीं. क्योंकि पोपोव का मक़सद किसी और चीज़ की तुलना में ज़्यादा से ज़्यादा पैसा हासिल करना था."

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English summary
Dusko Popov: The real 'James Bond' who was a 'triple agent'
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