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भारत के 'अग्निबाण' से दहशत में चीन पाकिस्तान, आखिर मोदी सरकार इतने हथियार क्यों जुटा रही है?

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नई दिल्ली, दिसंबर 18: देश की तरफ नापाक इरादे से देखने वाले दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत ने शनिवार को अपने अग्निबाण यानि अग्नि प्राइम मिसाइल का कामयाब परीक्षण कर लिया है। ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से अग्नि प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण भारत ने किया है और भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए ये एक बहुत बड़ी कामयाबी है। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल परीक्षण के लिए भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानि डीआरडी को बधाई दी है, लेकिन सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिर भारत दुश्मन को दहलाने वाले हथियारों का परीक्षण करने के साथ साथ भारी संख्या में विध्वंसक हथियार विदेशों से क्यों खरीद रही है।

अग्नि प्राइम मिसाइल का परीक्षण

अग्नि प्राइम मिसाइल का परीक्षण

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानि डीआरडीओ के मुताबिक अग्नि मिसाइल का परीक्षण सुबह 11.06 बजे किया गया है। मिसाइल ने टेक्स्टबुक ट्रेडेक्टरी को फॉलो किया और उच्च स्तर की सटीकता के साथ सभी मिशन उद्देश्यों को कामयाबी के साथ पूरा किया। डीआरडीओ ने अग्नि प्राइम मिसाइल के परीक्षण के बाद कहा कि, परीक्षण की निगरानी टेलीमेट्री, रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल स्टेशनों और पूर्वी तट के किनारे स्थित जहाजों द्वारा की जा रही थी। डीआरडीओ के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कहा कि, "मिसाइल परीक्षण ने अपने सभी मिशन उद्देश्यों को उच्च स्तर की सटीकता के साथ पूरा किया है।"

कितना खतरनाक है अग्नि प्राइम मिसाइल?

कितना खतरनाक है अग्नि प्राइम मिसाइल?

डीआरडीओ के मुताबिक, नई जेनरेशन की बेहद एडवांस मिसाइल है, जिसकी मारतक क्षमता एक हजार से 2 हजार किलोमीटर के बीच है और यह अग्नि-पी बैलिस्टिक मिसाइल की अग्नि सीरीज की छठी मिसाइल है। वहीं, अग्नि प्राइम डीआरडीओ द्वारा लॉन्च की जाने वाली अग्नि मिसाइल की नई श्रेणी की पहली मिसाइल है। इसका वजन अग्नि-3 की अपेक्षा 50 प्रतिशत कम है और इसमें नये जेनरेशन का अत्याधुनिक गाइडेंस प्रपल्शन लगा हुआ है। सबसे खास बात ये है कि, अग्नि प्राइम मिसाइल को काफी आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।

कहीं से किया जा सकता है लॉंच

कहीं से किया जा सकता है लॉंच

अग्नि प्राइम मिसाइल की सबसे खास बात ये है कि, इसे रेल, रोड या फिर जहाज, कहीं से भी लॉंच किया जा सकता है। इसके साथ ही इसकी दूसरी सबसे बड़ी खासियत ये है कि, इसे काफी लंबे अर्से तक बिना खराब हुए स्टोर करके रखा जा सकता है और इसे बेहद आसानी से ऑपरेशनल मोड में ही पूरे देश में ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है। अग्नि प्राइम मिसाइल की ये दूसरी फ्लाइट टेस्ट है और परफॉर्मेंस के हिसाब से यह मिसाइल भारत का विश्वसनीय मिसाइल बन चुका है। इससे पहले इसका पहला फ्लाइट टेस्ट इसी साल जून में किया गया था। इस मिसाइल को खास तौर पर इंडो-पैसिफिक में दुश्मनों के हथियारों को बर्बाद करने के लिए डिजाइन किया गया है। चूंकी इसे इंडो-पैसिफिक के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है, लिहाजा इसका मुख्य टारगेट चीन ही है।

विध्वंसक हथियारों को जुटा रही मोदी सरकार

विध्वंसक हथियारों को जुटा रही मोदी सरकार

भारत सरकार ने इस साल की शुरूआत से ही विध्वंसक हथियारों को जुटाना शुरू कर दिया है। इसी साल फरवरी महीने में भारत ने पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा विवाद के बीच नई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए हथियारों और प्रणालियों की आपातकालीन खरीद पर 20,776 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जहां भारत और चीन, दोनों देश की सेनाओं ने कुल एक लाख सैनिकों को तैनात किया है। कुल मिलाकर, भारत ने पिछले साल के ₹4.71 लाख करोड़ की तुलना में 2021-22 के अपने बजट में सैन्य खर्च के लिए ₹4.78 लाख करोड़ अलग रखे हैं।

 ​भारत में बनी इजरायली Tavor X 95 राइफल्स

​भारत में बनी इजरायली Tavor X 95 राइफल्स

अब तक भारत को अपनी Tavor X 95 राइफलें इजराइल वेपन्स इंडस्ट्री (IWI) से प्राप्त होती थीं। लेकिन, द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, अब इन राइफल्स को भारत में बनाया जा रहा है, जिसकी केंद्रीय और राज्य बलों को आपूर्ति की जा रही है।

83 तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट

83 तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट

इसी साल 3 फरवरी को भारत के रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को भारतीय वायु सेना को 83 हल्के लड़ाकू विमान (LCA) Mk-1A जेट्स, जिन्हें तेजस फाइटर्स भी कहा जाता है, उसकी आपूर्ति के लिए ₹48,000 करोड़ का ठेका दिया है। पहला तेजस एलसीए तीन साल में वायु सेना को दिया जाना है और बाकी तेजस फाइटर जेट की आपूर्ति भारतीय वायूसेना को साल 2030 तक की जाएगी। इन 83 नए विमानों में से 73 एमके-1ए लड़ाकू विमान हैं और 10 एलसीए एमके-1 ट्रेनर विमान हैं।

इजरायल से स्पाइस बम की खरीदी

इजरायल से स्पाइस बम की खरीदी

एक तरफ जहां भारत सरकार की कोशिश ज्यादातर हथियारों की मैन्युफैक्चरिंग भारत में ही करने की इच्छा रहती है, वहीं कई विध्वंसक हथियार अभी भी विदेशों से खरीदे जा रहे हैं। भारत सरकार ने इसी साल इजराइल के राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम के साथ 200 मिलियन डॉलर का एक करार साइन किया है। इस सौदे में बम गाइडेंस किट, टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल और सॉफ्टवेयर सक्षम रेडियो की खरीद शामिल है। दिसंबर 2020 में अपनी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इजरायली कंपनी ने 'एशियाई देश' की पहचान करने से इनकार कर दिया था, लेकिन जेन्स डिफेंस वीकली ने दावा किया था कि, सामरिक रेडियो भारतीय सेना के लिए बेहद उपयोगी है। और, भारतीय सैन्य अधिकारियों ने पहले खुलासा किया है कि भारतीय वायु सेना ने बालाकोट हवाई हमले के दौरान स्पाइस किट का इस्तेमाल किया था।

नौसेना के लिए यूएवी का निर्माण

नौसेना के लिए यूएवी का निर्माण

पिछले साल सितंबर में भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजीशन काउंसिल की बैठक हुई थी, जिसमें इंडियन नेली के लिए जहाज से लॉंच करने करने वाले ड्रोन की खरीदी की इजाजत दी गई थी। इसके तहत इंडियन नेवी के लिए भारत सरकार एक हजार करोड़ की लागत में ड्रोन खरीदेगी, जिसे नेवी के लिए स्पेशल डिजाइन किया जाएगा। इन ड्रोन की मदद से इंडियन नेवी की शक्ति में और भी ज्यादा इजाफा होगा। चीन के साथ तनाव के बीच भारत सरकार ने सबसे ज्यादा ध्यान नेवी को मजबूत बनाने पर ही दे रखा है और आने वाले वक्त में इंडियन नेवी के कंधे पर ही देश की रक्षा की जिम्मेदारी होगी, लिहाजा इंडियन नेवी को आने वाले वक्त में और भी ज्यादा मजबूत किया जाएगा।

राफेल विमान

राफेल विमान

भारत सरकार ने फ्रांस के साथ राफेल विमान का सौदा किया था और फ्रांस से इस साल राफेल विमानों की आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है। एक दिन पहले ही फ्रांस की रक्षा मंत्री, जो इस वक्त भारत दौरे पर आई हैं, उन्होंने कहा है कि, फ्रांस भारत को और भी राफेल विमान की बिक्री के लिए तैयार है। चीन के साथ तनाव के बीच फ्रांस ने अब तक 33 राफेल विमानों की आपूर्ति भारत सरकार को की है और तीन राफेल विमान अभी भारत को फ्रांस से और मिलने हैं। इन राफेल विमानों को लद्दाख में चीन की सीमा के पास तैनात किया गया है।

रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम

रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम

दुनिया का अत्याधुनिक एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की भी आपूर्ति रूस ने भारत को शुरू कर दी है। एस-400 ट्रायम्फ, जिसे नाटो देश एसए-21 ग्रोलर कहता है, वो रूस द्वारा विकसित एक आधुनिक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल एमएलआर-एसएएम प्रणाली है। पहली बार 2007 में इस्तेमाल किया गया एस-400 मिसाइल मॉस्को की रक्षा के लिए तैनात किया गया था और ये मिसाइल सिस्टम एस-300 मिसाइल सिस्टम श्रृंखला का अपग्रेड वर्जन है। भारत और रूस 2015 से एस-400 ट्रायम्फ की खरीददारी को लेकर चर्चा कर रहे थे और कई देशों ने एस-400 मिसाइल खरीदने को लेकर रूचि दिखाई थी, जिसे अमेरिकी टीएचएएडी (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) प्रणाली से काफी आगे माना जाता है, हालांकि दोनों अलग-अलग हथियार सिस्टम हैं।

एस-500 मिसाइल सिस्टम खरीद सकता है भारत

एस-500 मिसाइल सिस्टम खरीद सकता है भारत

रूस ने एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी तो शुरू कर दी है, लेकिन इसके साथ ही एस-500 मिसाइस सिस्टम का भी ऑफर भारत को दिया है। रूस ने दावा किया है कि, एस-500 मिसाइल सिस्टम दुनिया का सबसे ताकतवर मिसाइल सिस्टम है और इसके जरिए हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी मार गिराया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि इस साल दिसंबर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान एस-500 और एस-550 मिसाइल सिस्टम पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि, "लेकिन सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि बातचीत की मेज पर क्या होगा

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English summary
DRDO has successfully test-fired the Agni Prime missile, which has been specially designed for China. At the same time, questions are being raised that, why is the Indian Army buying so many weapons?
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