Donald Trump News: 'गाजा पट्टी पर करेंगे कब्जा', ट्रंप के ऐलान पर इजराइल का सपोर्ट, फिलिस्तीनियों का क्या होगा
Donald Trump Gaza News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'मिटा देंगे' की धमकी के बाद एक और विवादित बयान देकर दुनिया को चौंका दिया है। उन्होंने गाजा पट्टी पर कब्जा जमाने की धमकी दी है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका गाजा पट्टी पर कब्जा करेगा, वहां विकास करेगा और उसका दीर्घकालिक स्वामित्व लेगा। ट्रंप की इस घोषणा के बाद दुनियाभर में हलचल मच गई है, खासकर मध्य पूर्व में।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका गाजा को अपने नियंत्रण में लेगा, वहां से खतरनाक हथियार हटाएगा और बड़े पैमाने पर विकास करेगा। उनका दावा है कि इससे वहां हजारों नौकरियां और नए आवास मिलेंगे। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे यह कैसे करेंगे और किस अधिकार से गाजा पर कब्जा करेंगे।

इजराइल के प्रधानमंत्री का समर्थन
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के इस विचार की सराहना की और इसे एक 'ऐतिहासिक फैसला' बताया। उनका मानना है कि यह गाजा के भविष्य को एक नया आकार दे सकता है।
ट्रंप के बयान से क्यों मचा हंगामा?
गाजा पट्टी पहले ही युद्ध और बमबारी से तबाह हो चुकी है। अक्टूबर 2023 में इजराइल और हमास के बीच खूनी संघर्ष हुआ था, जिसमें हजारों लोग मारे गए और लाखों लोग विस्थापित हो गए। ऐसे में ट्रंप का यह बयान मध्य पूर्व (अल्जीरिया, बहरीन, मिस्र, ईरान, इराक, इजराइल, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात, यमन) के हालात को और ज्यादा जटिल बना सकता है।
फिलिस्तीनियों का क्या होगा?
ट्रंप की योजना के मुताबिक, फिलिस्तीनियों को अन्य देशों में बसाने की बात की जा रही है। उन्होंने कहा कि गाजा को एक 'मध्य पूर्व का नया पर्यटन स्थल' बनाया जाएगा। लेकिन फिलिस्तीनी नेताओं और समर्थकों ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है।
क्या यह योजना संभव है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप की यह योजना आसान नहीं होगी। गाजा पर कब्जा करने का मतलब है कि अमेरिका को बड़ा सैन्य हस्तक्षेप करना होगा, जो मध्य पूर्व में और अधिक संघर्ष को जन्म दे सकता है। इसके अलावा, ट्रंप के इस बयान से अमेरिका और फिलिस्तीन समर्थक देशों के रिश्ते खराब हो सकते हैं।
अब आगे क्या?
फिलहाल, ट्रंप के इस बयान पर दुनिया की प्रतिक्रिया का इंतजार है। अगर वे दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति बनते हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे इस योजना को सच में लागू करने की कोशिश करेंगे या यह सिर्फ चुनावी रणनीति है।












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