फ्रांस के राष्ट्रपति पर आगबबूला हुए डोनाल्ड ट्रंप, चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात पर मैक्रों को बताया 'चाटने' वाला
ताइवान को लेकर चीन की आक्रामकता लगातार बढ़ रही है। वहीं, अमेरिका ने ताइवान की रक्षा का वचन दे रखा है, लिहाजा यूरोप को एक और युद्ध में फंसने का डर सता रहा है।

Donald Trump on Emmanuel Macron: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद यूरोप दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद कहा था, कि यूरोप को अमेरिका का पिछलग्गू नहीं बनना चाहिए।
लिहाजा, माना जा रहा है, कि आने वाले समय में यूरोपीय देशों में भी अमेरिका की 'दादागीरी' कम हो सकती है।
फ्रांस पहले भी कई बार अमेरिका के विपरीत स्टैंड ले चुका है और फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर भी कहा था, कि पश्चिमी देशों के नेताओं को चाहिए, कि वो पुतिन को भला-बुरा ना कहें। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति पर अपनी भड़ास निकाली है।

मैक्रों पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को फ्रांस के राष्ट्रपति को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति के खिलाफ अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया और कहा, कि 'चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलकर इमैनुएल मैक्रों उनका पिछवाड़ा चूम रहे थे।'
इस महीने न्यूयॉर्क की अदालत में अभियोग का सामना करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप पहली बार मुख्यधारा की मीडिया में आए थे और उन्होंने फॉक्स न्यूज के एंकर टकर कार्लसन को इंटरव्यू दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान कहा, कि उनके पद छोड़ने के बाद से अमेरिका का प्रभाव दुनिया में कम हो गया है।
उन्होंने एंकर कार्लसन से कहा, कि "आपके पास यह पागल दुनिया है, यह उड़ रही है और संयुक्त राज्य अमेरिका के पास बिल्कुल कुछ नहीं है।"
उन्होंने आगे कहा, कि "और मैक्रों, जो मेरा एक दोस्त है, चीन के साथ मिल गया है, उसके पिछवाड़े को चूम रहा है। ठीक है, चीन में! और मैं कहता हूं, कि 'फ्रांस अब चीन के साथ जा रहा है।'"
आपको बता दें, कि मैक्रों ने पिछले हफ्ते चीन की यात्रा के बाद चेतावनी दी थी, कि यूरोपीय लोगों को खुद को अमेरिकी विदेश नीति की जंजीरों में नहीं बांधना चाहिए।
'ताइवान पर अमेरिका-चीन के बीच ना फंसे'
पत्रकारों से बात करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा था, कि "ताइवान के भाग्य को लेकर यूरोपीय देशों को बीजिंग और वाशिंगटन के बीच तनावपूर्ण गतिरोध में नहीं फंसना चाहिए"।
आपको बता दें, कि चीन ने ताइवान पर नियंत्रण हासिल करने की कसम खाई है, जबकि अमेरिकी सरकार ने ताइवान को अपनी रक्षा करने में मदद करने का वादा किया है।
शुक्रवार को चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा, कि "ये संकट हमारा नहीं है और ये संकट हमें अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाने से रोकता है।"
मैक्रों ने कहा, कि "विरोधाभास यह होगा कि घबराहट से उबरकर हम मानते हैं, कि हम सिर्फ अमेरिका के पिछलग्गू हैं।" उन्होंने आगे कहा, कि "सबसे बुरी बात यह सोचना होगा, कि हम यूरोपीय लोगों को इस मुद्दे पर अमेरिका का पिछलग्गू बनना चाहिए और अमेरिका के एजेंडे और चीनी ओवररिएक्शन को देखते हुए हमें अपना पक्ष लेना चाहिए।"

फ्रांस के रूख से अमेरिका परेशान
यूरोपीय देशों में सबसे ज्यादा ताकतवर फ्रांस है और फ्रांसीसी राष्ट्रपति के बयान ने अमेरिका में खलबली पैदा कर दी है।
हालांकि, व्हाइट हाउस उन्हें कम करके आंग रहा है और व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, कि बाइडेन प्रशासन "फ्रांस के साथ हमारे शानदार द्विपक्षीय संबंधों को लेकर सहज और आश्वस्त है।"
आपको बता दें, कि फ्रांस और अमेरिका के बीच उस वक्त तनाव आ गई थी, जब पिछले साल अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूके के बीच ऑकस डील हुआ था।
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इस डील के होने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस के साथ पनडुब्बियों को खरीदने का करार रद्द कर दिया था और अमेरिका और यूके की मदद से न्यूक्लियर पनडुब्बी बनाने की डील कर ली थी। जिसके बाद फ्रांस की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई थी।
माना जा रहा है, कि उस घटना के बाद से अमेरिका और फ्रांस के संबंधों में विश्वास की कमी हो चुकी है। जो अब समय के साथ दिखने भी लगा है। वहीं, फ्रांसीसी राष्ट्रपति के रूख से यही संकेत मिलता है, कि ताइवान को लेकर अमेरिका की प्रतिबद्धता कमजोर पड़ सकती है।












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