Iran Vs America War: ट्रंप की जा सकती है कुर्सी? ईरान को गाली देना पड़ा भारी, क्या कहता है अमेरिका का संविधान?
Iran Vs America War: अमेरिकी राजनीति में इस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट ने भूचाल ला दिया है। ईरान के साथ युद्ध की संवेदनशील स्थिति के बीच ट्रंप द्वारा इस्तेमाल की गई अभद्र और अश्लील भाषा ने उनके मानसिक संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विपक्षी नेताओं और कूटनीतिज्ञों का मानना है कि यह व्यवहार अमेरिकी राष्ट्रपति की गरिमा के खिलाफ है। इसी दबाव के बीच अब अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन की चर्चा तेज हो गई है, जो राष्ट्रपति को पद से हटाने की शक्ति देता है।

Iran conflict Update: ईरान को गाली और ट्रंप की मुश्किलें
ईस्टर के मौके पर ट्रंप ने ईरान को लेकर एक ऐसा पोस्ट किया जिसमें कूटनीतिक भाषा के बजाय गालियों और अश्लीलता का सहारा लिया गया। वैश्विक स्तर पर अमेरिका की छवि को इससे गहरा धक्का लगा है। विरोधियों का कहना है कि युद्ध जैसे गंभीर समय में एक राष्ट्रपति का ऐसा 'असंतुलित' व्यवहार देश की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। इसी वजह से उनकी मानसिक योग्यता की जांच और उन्हें पद से बेदखल करने की मांग उठ रही है।
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क्या है संविधान का 25वां संशोधन?
यह कानून साल 1967 में तब अस्तित्व में आया जब राष्ट्रपति केनेडी की हत्या के बाद सत्ता के खालीपन को भरने की जरूरत महसूस हुई। इसका मुख्य काम यह तय करना है कि अगर राष्ट्रपति की मौत हो जाए, वह इस्तीफा दे दे या काम करने की स्थिति में न रहे, तो देश कौन चलाएगा। इसमें चार हिस्से (धाराएं) हैं, जिनमें से चौथी धारा सबसे शक्तिशाली है और मौजूदा विवाद के केंद्र में है।
धारा-4: कुर्सी छीनने का सबसे कड़ा नियम
25वें संशोधन की धारा-4 के तहत अगर देश के उपराष्ट्रपति और कैबिनेट का बहुमत (कम से कम 8 सदस्य) लिखित में यह दे दें कि राष्ट्रपति काम करने के काबिल नहीं हैं, तो उनकी शक्तियां तुरंत छीन ली जाती हैं। ऐसे में उपराष्ट्रपति 'एक्टिंग राष्ट्रपति' बन जाता है। यह प्रावधान बेहद खास है क्योंकि इसमें राष्ट्रपति की मर्जी के बिना भी उन्हें सत्ता से दूर किया जा सकता है, जो फिलहाल चर्चा का विषय है।
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US President removal process: कांग्रेस में कैसे होगा फैसला?
अगर उपराष्ट्रपति कदम उठाते हैं और ट्रंप इसका विरोध करते हुए खुद को फिट बताते हैं, तो आखिरी फैसला संसद (कांग्रेस) करेगी। संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से यह साबित करना होगा कि राष्ट्रपति वाकई मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम हैं। अगर यह बहुमत नहीं मिलता, तो ट्रंप अपनी शक्तियां वापस पा लेंगे। यह प्रक्रिया कानूनी रूप से काफी जटिल है और इसके लिए बहुत बड़े राजनीतिक समर्थन की जरूरत होती है।
उपराष्ट्रपति की भूमिका और आगे की राह
इस पूरी प्रक्रिया की 'चाबी' उपराष्ट्रपति के पास है। उनके हस्ताक्षर और सहमति के बिना धारा-4 लागू नहीं हो सकती। हालांकि रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी असंतोष के सुर हैं, लेकिन अभी तक उपराष्ट्रपति ने खुलकर कुछ नहीं कहा है। यदि ट्रंप का व्यवहार और ज्यादा अनियंत्रित होता है, तो कैबिनेट के लिए चुप रहना मुश्किल होगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन के इस संवैधानिक दंगल पर टिकी हुई हैं।












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