'आतंकवाद को उचित न ठहराओ' यासीन मलिक की सजा पर टिप्पणी से नाराज भारत ने OIC को लगाई फटकार
नई दिल्ली, 27 मई। विदेश मंत्रालय ने टेरर फंडिंग के दोषी यासीन मलिक की सजा को लेकर IOC- IPHRC की टिप्पणियों के बाद विदेश मंत्रालय ने इन दोनों संगठनों को जमकर फटकार लगाई है। साथ ही मंत्रालय ने इनकी मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि इनकी टिप्पणियों से साफ है कि ये आतंकवादी गतिविधियों के समर्थक हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस्लामिक सहयोग संगठन जैसे आर्गनाइजेशन आतंकवाद को उचित ठहराने की बात ना करें।

इस्लामिक सहयोग संगठन के मानवाधिकार विंग ने एक दिन पहले यासीन मलिक को दोषी ठहराए जाने की निंदा की थी और कहा था कि यह निर्णय भारतीय पूर्वाग्रह और कश्मीरी मुसलमानों के उत्पीड़न को प्रदर्शित करता है। ओआईसी-आईपीएचआरसी ने यासीन मलिक पर लगाए गए आरोपों को फर्जी और मनगढ़ंत बताया था। साथ ही यासीन मलिक की सजा की निंदा थी। IPHRC ने इसे कश्मीरियों के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य कश्मीरियों को उनके आत्मनिर्णय के वैध अधिकार से वंचित करना है। टेररफंडिंग के मामले में दोषी यासीन मलिक को बुधवार दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सजा उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
आतंकवाद के मुद्दे पर इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और स्वतंत्र स्थायी मानवाधिकार आयोग (IPHRC) की टिप्पियों से नाराज विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को दोनों संगठनों की नीयति पर सवाल खड़े किए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि OIC के स्वतंत्र स्थायी मानवाधिकार आयोग (IPHRC) ने यासीन मलिक की आतंकवादी गतिविधियों के लिए स्पष्ट रूप से समर्थन व्यक्त किया था। यह बात अदालत में रखी जा चुकी है।
भारत ने कहा कि इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की यासीन मलिक के मामले में फैसले पर आलोचनात्मक टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दुनिया आतंकवाद के मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस चाहती है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत OIC से आग्रह करता है कि वो आतंकवाद पर इस तरह की टिप्पणी ना करे।












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