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आ रही है कोरोना की यूनिवर्सल वैक्सीन, वैरिएंट का टेंशन खत्म-महामारी होगी छूमंतर

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वॉशिंगटन, 23 जून: कोरोना वायरस का डेल्टा प्लस वैरिएंट अब भारत में वैरिएंट ऑफ कंसर्न बन चुका है। डेल्टा वैरिएंट के चलते अमेरिकी सरकार की भी चिंता बढ़ी हुई है। लेकिन, वैज्ञानिक अब एक ऐसी वैक्सीन पर काम कर रहे हैं, जिससे कोरोना के किसी भी नए वैरिएंट की चिंता ही खत्म हो जाएगी। यूनिवर्सिटी ऑफ कैरोलिना के वैज्ञानिकों ने अभी तक जो रिसर्च किया है, उसके नतीजे काफी सकारात्मक हैं। यूनिवर्सल वैक्सीन विकसित करने का मकसद ये है कि यह अनदेखा वायरस चाहे कितना भी रंग-रूप बदल ले, यह सबके खिलाफ उतनी ही प्रभावी होगी और फिर भविष्य में कोरोना वायरस के किसी भी नए वैरिएंट का टेंशन ही नहीं रह जाएगा।

यूनिवर्सल वैक्सीन: वैरिएंट का टेंशन खत्म

यूनिवर्सल वैक्सीन: वैरिएंट का टेंशन खत्म

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक ऐसी यूनिवर्सल वैक्सीन तैयार की है, जिसने चूहे को न सिर्फ कोविड-19 के खिलाफ सुरक्षित किया है, बल्कि उसे दूसरे कोरोना वायरस के संभावित खतरनाक वैरिएंट के खिलाफ लड़ने लायक इम्यूनिटी विकसित करने के लिए भी तैयार कर दिया है। कोरोना वायरस को अभी तक दो महामारियों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। 2003 में एसएआरएस और 2019-20 से कोविड-19 वैश्विक महामारी। अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ कैरोलिना के शोधकर्ताओं ने पाया है कि भविष्य में भी कोरोना वायरस का खतरा बरकरार रहेगा और कोई नहीं जानता है कि कौन सा वायरस कब अगली महामारी फैला देगा। भविष्य में कोरोना वायरस से जुड़ी ऐसी किसी भी वैश्विक महामारी से रक्षा के लिए वैज्ञानिकों ने यह वैक्सीन डिजाइन की है, जो मौजूदा एसएआरएस-सीओवी-2 कोरोना वायरस के खिलाफ सुरक्षा तो देगी ही, कोरोना वायरस समूह के दूसरे संभावित वायरस से भी रक्षा में कारगर होगी। बता दें कि कोरोना वायर जानवरों से इंसान में संक्रमण के लिए कुख्यात हो चुके हैं।

    Coronavirus India Update: आ रही है कोरोना के खात्मे के लिए Universal Super Vaccine | वनइंडिया हिंदी
    कई तरह के कोरोना वायरस पर प्रयोग

    कई तरह के कोरोना वायरस पर प्रयोग

    पिछले दो दशकों में कोरोना वायरस की वजह से दो महामारी ने तबाही मचाई है- एसएआरएस और कोविड-19. इसको देखते हुए वायरोलॉजिस्ट के लिए अब सर्बेकोवायरस प्राथमिकता है, जो कि कोरोना वायरस के ही बड़े परिवार का ही हिस्सा है। शोधकर्ताओं ने इसकी रोकथाम के लिए वैक्सीन विकसित करने में एमआरएनए तकनीक अपनाई है, जो कि अमेरिका में विकसित दोनों वैक्सीन फाइजर और मॉडर्ना में इस्तेमाल किया जा रहा है। फर्क सिर्फ ये है कि यूनिवर्सल वैक्सीन विकसित करने के लिए शोधकर्ताओं ने सिर्फ एक वायरस के एमआरएनए कोड के इस्तेमाल करने की बजाए कई कोरोना वायरस के एमआरएनए को एकसाथ जोड़ दिया है। इसका नतीजा ये हुआ है कि जब हाइब्रिड वैक्सीन चूहे को लगाई गई तो ऐसी प्रभावी एंटीबॉडीज तैयार हुई, जो कई तरह की स्पाइक प्रोटीन का सामना कर सकती है। इसमें पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पाया गया बीटा (बी.1.351) वैरिएंट भी शामिल किया गया है।

    इसे भी पढ़ें- Varient of concern क्यों बन गया है डेल्टा प्लस वैरिएंट?इसे भी पढ़ें- Varient of concern क्यों बन गया है डेल्टा प्लस वैरिएंट?

    भविष्य की कोरोना महामारी भी होगी छूमंतर

    भविष्य की कोरोना महामारी भी होगी छूमंतर

    शोध के मुताबिक इस यूनिवर्सल वैक्सीन में किसी भी तरह के आउटब्रेक को रोकने की क्षमता होगी। ट्रायल में इस्तेमाल किए गए चूहे एसएआरएस-सीओवी और कोरोना वायरस के कई और वैरिएंट से संक्रमित थे। ट्रायल की यह प्रक्रिया अभी जारी है और सबकुछ तय योजना के मुताबिक रहा तो अगले साल इस वैक्सीन की ट्रायल इंसान पर की जाएगी। शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि सबकुछ अगर उनकी योजना के अनुसार चलता रहा तो वह कोरोना के हर तरह के वैरिएंट की रोकथाम वाली यूनिवर्सल वैक्सीन बना लेंगे और फिर कोरोना फैमिली के चलते तीसरी वैश्विक महामारी का खतरा नहीं रहेगा।

    English summary
    Universal vaccine will be effective against all variants of coronavirus, American scientists are doing research
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