अमेरिका में मिला कोरोना का सबसे खतरानक वेरिएंट R.1, जानिए इसके बारे में सबकुछ
अमेरिका में मिला कोरोना का सबसे खतरानक वेरिएंट R.1, जानिए इसके बारे में सबकुछ
नई दिल्ली, 26 सितंबर: डेढ़ साल से कोरोना वायरस का प्रकोप दुनियाभर में जारी है। कोविड-19 का नया डेल्टा वेरिएंट हर देशों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। डेल्टा वेरिएंट ने ही भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान तबाही मचाई। लेकिन इन सबके बीच कोरोना का नए वेरिएंट भी अब सामने आने लगा है। कोरोना के बढ़ते नए मामलों के बीच अमेरिका से एक डराने वाली खबर सामने आई है। अमेरिका में कोरोना के सबसे खतरनाक R.1 वेरिएंट (R.1 COVID variant) मिला है। शोधकर्ताओं ने एक और नए स्ट्रेन R.1 वेरिएंट का पता लगाया है। हालांकि अमेरिका और अन्य देशों में इसकी संख्या फिलहाल बहुत कम है लेकिन इसका खतरा अब दुनियाभर के देशों में बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है क्योंकि वेरिएंट R.1 बहुत संक्रामक हो सकता है।
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जानिए क्या है कोरोना का नया वेरिएंट R.1
सामने आई ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना का नया वेरिएंट R.1 ने अब तक दुनिया भर में 10,000 से अधिक लोगों को संक्रमित किया है। अमेरिका की रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने कहा है कि R.1 वेरिएंट अप्रैल 2021 से अमेरिका में मौजूद है। यह केंटकी नर्सिंग होम में पाया गया था, जहां कई मरीज पूरी तरह से वैक्सीनेट थे।

अमेरिका समेत 35 देशों में फैला वेरिएंट R.1
सीडीसी के रिसर्च के मुताबिक गैर-टीकाकरण वाले व्यक्तियों की तुलना में नर्सिंग होम के 87% वैक्सीनेट वाले लोगों में वेरिएंट R.1 के लक्षण विकसित होने की संभावना कम थी। हालांकि वर्तमान में R.1 वेरिएंट को अमेरिका ने चिंता नहीं बताया है। वहीं एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वेरिएंट R.1 पिछले साल जापान में भी पाया गया था। अब ये अमेरिका समते 35 देशों में फैला है।

वेरिएंट R.1 कोरोना के बाकी अन्य वेरिएंट से अलग है?
फिलहाल ये कहना मुश्किल बै कि वेरिएंट R.1 कोरोना के डेल्टा वेरिएंट से ज्यादा खतरनाक है या नहीं। वेरिएंट R.1 Sars-COV-2 वायरस का एक स्ट्रेन है। हालांकि कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट की अधिक क्षमताएं और सीमाएं हो सकती हैं। चिंता का कारण ये है कि एक्सपर्ट को इस बात का डर है कि कोरोना का ये वेरिएंट लोगों को अलग ढंग से प्रभावित ना करे।
जबकि कोविड-19 का डेल्टा वेरिएंट दुनिया भर में सबके लिए तनाव का कारण बना हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हमें R.1 वेरिएंट के लिए भी देखना पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, वैक्सीन सुरक्षा और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचार से बचने की क्षमता दिखाने के अलावा, R.1 वेरिएंट में खुद को उत्परिवर्तन का एक सेट होता है, जिससे प्रतिकृति और एक बढ़ा हुआ संचरण हो सकता है।

क्या वैक्सीनेट लोग वेरिएंट R.1 से सुरक्षित हैं?
कोरोना वैक्सीन किसी वेरिएंट से आपकी सुरक्षा कर सकता है या नहीं, यह उस वेरिएंट के पास मौजूद म्यूटेशन के सेट पर निर्भर करता है। सीडीसी के मुताबिक R.1 में उत्परिवर्तन का संयोजन होता है। R.1 में स्पाइक प्रोटीन के संभावित एस्केप म्यूटेशन के अलावा रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन म्यूटेशन भी है। इसके अलावा इसमें N-टर्मिनल डोमेन में W152L म्यूटेशन भी शामिल है। स्पाइक प्रोटीन का एक एरिया एंटीबॉडी को टारगेट करता है और उनकी प्रभावशीलता को कम कर सकता है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने कहा है कि वेरिएंट R.1 में मौजूद म्यूटेशन से वैक्सीनेट लोगों के संक्रमित होने का खतरा कम है। वैक्सीन लगाए लोगों में वेरिएंट R.1 उतना प्रभावी नहीं होगा।












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