बांग्लादेश के वित्त मंत्री के इंटरव्यू पर चीन से बढ़ा विवाद

बांग्लादेश के वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफ़ा कमाल
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बांग्लादेश के वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफ़ा कमाल

बांग्लादेश के वित्त मंत्री ने आगाह करते हुए कहा था कि विकासशील देश चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत ज़्यादा क़र्ज़ लेने से पहले दो बार सोचेंगे. उन्होंने कहा था कि वैश्विक महंगाई और धीमी वृद्धि दर के कारण क़र्ज़ से दबे उभरते बाज़ार पहले से ही लाचार हैं.

बांग्लादेश के वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफ़ा कमाल ने कहा था कि चीन को क़र्ज़ों के आकलन में ज़्यादा ईमानदारी दिखानी चाहिए क्योंकि क़र्ज़ों की ख़राब शर्तों के कारण कई देश मुश्किल में फँस रहे हैं.

मुस्तफ़ा कमाल ने श्रीलंका की मिसाल देते हुए कहा था कि वहाँ चीनी निवेश वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट राजस्व पैदा करने में नाकाम रहे हैं और इस वजह से वहाँ का आर्थिक संकट और बढ़ा है.

फ़ाइनैंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में मुस्तफ़ा कमाल ने कहा था, ''दुनिया भर में जो स्थिति अभी चल रही है, उसमें हर कोई चीनी परियोजनाओं को लेकर दो बार सोचेगा. हर कोई चीन पर आरोप लगा रहा है. चीन इससे असहमत नहीं हो सकता है. यह उसकी ज़िम्मेदारी है.''

बांग्लादेश के वित्त मंत्री के इस इंटरव्यू को लेकर बाद में स्पष्टीकरण भी जारी किया गया. बांग्लादेश के वित्त मंत्री के पीआरओ गाज़ी तौहिदुल इस्लाम ने फ़ाइनैंशियल टाइम्स को 12 अगस्त को पत्र भेजकर कहा था, ''बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को लेकर आपकी रिपोर्ट की हम सराहना करते हैं. हालाँकि आपकी यह हेडलाइन- 'बांग्लादेश के वित्त मंत्री ने चीन के बीआरआई लोन को लेकर चेताया', वित्त मंत्री के वास्तविक रुख़ को नहीं दर्शाता है.''

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चीन का जवाब

बांग्लादेश के वित्त मंत्री ने 9 अगस्त को फ़ाइनैंशियल टाइम्स को इंटरव्यू दिया था. सोमवार को चीनी विदेश मंत्रालय की दैनिक प्रेस वार्ता में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन से पूछा, ''बांग्लादेश के वित्त मंत्री ने फ़ाइनैंशियल टाइम्स को पत्र भेज अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है. फ़ाइनैंशियल टाइम्स ने तोड़-मरोड़कर रिपोर्ट छापी थी. मुस्तफ़ा कमाल ने कहा है कि दूसरे देशों से क़र्ज़ लेने के मामले में किसी भी देश को दो बार सोचना चाहिए और यह चीन को टार्गेट करने के लिए नहीं था. इस पूरे विवाद में आपकी प्रतिक्रिया क्या है?

इस सवाल के जवाब में वांग वेनबिन ने कहा, ''मैंने यह रिपोर्ट देखी है. बांग्लादेश के वित्त मंत्री को ग़लत तरीक़े से कोट किया गया है. इससे पता चलता है कि बांग्लादेश और चीन के बीच पारस्परिक भरोसा है. मैं एक बार फिर से कहना चाहता हूँ कि सबसे बड़े विकासशील देश के रूप में चीन सभी विकासशील देशों के साथ खड़ा रहता है. चीन की बीआरआई से सभी विकासशील देशों को फ़ायदा है.''

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ''जिन देशों पर विदेशी क़र्ज़ बढ़ने की बात कही जा रही है, उन पर चीन का क़र्ज़ कम है जबकि पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट और वित्तीय संस्थानों का क़र्ज़ ज़्यादा है. पिछले साल सितंबर महीने में बांग्लादेश के वित्त मंत्रालय ने 2021 में विदेशी क़र्ज़ का डेटा जारी किया था. वर्ल्ड बैंक और एशियन डिवेलपमेंट बैंक का क़र्ज़ बांग्लादेश के कुल क़र्ज़ का 59 फ़ीसदी है और चीन का महज़ सात फ़ीसदी है.''

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चीन ने आरोपों को किया ख़ारिज

चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, ''कथित चीनी क़र्ज़ का जाल जान-बूझकर बनाया गया एक नैरेटिव है जिससे विकासशील देशों में पारस्परिक फ़ायदे वाली परियोजनाओं को नुक़सान पहुँचाया जा सके. कई विकासशील देशों ने बीआरआई परियोजना को स्वीकार किया है.''

बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने कहा था कि श्रीलंका संकट से पता चलता है कि चीन अपनी परियोजनाओं को लेकर बहुत सख़्त नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट के लिए क़र्ज़ देने से पहले चीन को स्टडी करनी चाहिए. मुस्तफ़ा कमाल ने कहा था, ''श्रीलंका के बाद हम महसूस कर रहे हैं कि चीनी प्रशासन इस मसले को गंभीरता से नहीं ले रहा है जबकि यह बहुत ही अहम है.''

एशिया के उन देशों में अब बांग्लादेश भी शामिल हो गया है जिसने खाली होते विदेशी मुद्रा भंडार की चुनौती से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ से क़र्ज़ के लिए संपर्क किया है.

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से तेल की क़ीमतों में आई वृद्धि के कारण बांग्लादेश में महंगाई बढ़ी है. बांग्लादेश का आयात बिल भी बढ़ गया है. फ़ाइनैंशियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''बांग्लादेश चीन की बीआरआई परियोजना में शामिल है और इसके तहत उसने चार अरब डॉलर का क़र्ज़ लिया है. यह बांग्लादेश के कुल विदेशी क़र्ज़ का छह फ़ीसदी है.''

बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने कहा है कि आईएमएफ़ से 4.5 अरब डॉलर के पैकेज की मांग की गई है. हालांकि अभी इस पैकेज को लेकर बात पूरी नहीं हो पाई है. इसके अलावा बांग्लादेश ने वर्ल्ड बैंक, एशियन डिवेलपमेंट बैंक, एशियन इन्फ़्रास्ट्रक्चर बैंक और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी से भी चार अरब डॉलर का क़र्ज़ मांगा है.

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बांग्लादेश ख़ुद को बचा लेगा?

सात अगस्त को चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बांग्लादेश का दौरा किया था. इस दौरे के बाद बांग्लादेश के वित्त मंत्री की यह टिप्पणी आई है. वांग यी ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना से भी मुलाक़ात की थी. चीनी विदेश मंत्री ने बांग्लादेश को सबसे विश्वसनीय और पुराना रणनीतिक साझेदार कहा था. चीनी विदेश मंत्री ने कहा था कि दोनों देश इन्फ़्रास्ट्रक्चर में सहयोग के लिए सहमत हुए हैं.

श्रीलंका इसी साल मई महीने में डिफॉल्टर बन गया था. श्रीलंका भी आईएमएफ़ से कर्ज़ के लिए बात कर रहा है. उधर पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार भी खाली हो रहा है और डेढ़ महीने के आयात बिल भरने से ज़्यादा नहीं है. तेल की क़ीमतें बढ़ने से बांग्लादेश का भी आयात बिल बढ़ गया है. बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार 40 अरब डॉलर से भी नीचे आ गया है. एक साल पहले बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार 45 अरब डॉलर था.

हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि बांग्लादेश कपड़ों के निर्यात के कारण ख़ुद को बचा लेगा. बांग्लादेश के पास पाँच महीनों से ज़्यादा आयात बिल भरने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार है. मुस्तफ़ा कमाल ने फ़ाइनैंशियल टाइम्स से कहा है कि श्रीलंका की तरह बांग्लादेश डिफॉल्टर नहीं होने जा रहा है.

आईएमएफ़ के अनुसार, 2021 में बांग्लादेश पर कुल विदेशी क़र्ज़ 62 अरब डॉलर था. बांग्लादेश पर कुल विदेशी क़र्ज़ में सबसे ज़्यादा जापान का है. जापान ने बांग्लादेश को नौ अरब डॉलर का क़र्ज़ दिया है. बांग्लादेश पर कुल क़र्ज़ का यह 15 फ़ीसदी है.

(कॉपी - रजनीश कुमार)

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