Climate Change: 'समय रहते चेत जाएं, वरना दुनिया खतरे के करीब!', जलवायु परिवर्तन पर वैज्ञानिकों की चेतावनी
Climate Change: संयुक्त राष्ट्र के जलवायु विज्ञान पैनल (आईपीसीसी) के प्रमुख जिम स्की ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पहले से कहीं ज्यादा तेजी से दिख रहे हैं।

वैज्ञानिक भी तापमान बढ़ने की रफ्तार से हैरान हैं। टेरी के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन में पीटीआई से बातचीत में स्की ने कहा, "पिछले पांच सालों में तापमान इतनी तेजी से बढ़ा है कि वैज्ञानिक भी चकित हैं। जंगलों में आग, बाढ़ और चरम मौसमी घटनाएं अब आम हो गई हैं। ये सब कुछ लोगों की उम्मीद से ज्यादा तेजी से हो रहा है।"
2024 अब तक का सबसे गर्म साल
साल 2024 ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। यह अब तक का सबसे गर्म साल रहा और पहली बार वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक, पिछला दशक (2015-2024) अब तक का 10 सबसे गर्म साल रहा। स्की ने कहा कि वैज्ञानिक अब यह पता लगा रहे हैं कि मानव गतिविधियों ने इन घटनाओं को कितना बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा, "बिना ग्रीनहाउस गैसों के ये घटनाएं शायद नहीं होतीं।"
2030 का लक्ष्य अब पुराना, कटौती और जरूरी
आईपीसीसी ने 2030 तक उत्सर्जन में 43% कटौती का लक्ष्य रखा था, लेकिन स्की ने कहा कि यह लक्ष्य अब पुराना हो चुका है। उन्होंने कहा, "तीन साल पहले तय किया गया यह लक्ष्य अब बेमानी है क्योंकि हमने इस बीच कोई कार्रवाई नहीं की। अब जरूरी कटौती और भी ज्यादा होनी चाहिए।" उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया तीन साल पहले की तुलना में ज्यादा खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी है।
सरकारों की निष्क्रियता पर सवाल
जब पूछा गया कि सरकारें जलवायु परिवर्तन पर तेजी से क्यों नहीं बढ़ रही हैं, तो स्की ने कहा कि वैज्ञानिकों ने खतरे को स्पष्ट कर दिया है, लेकिन नीतियां बनाने का काम सरकारों का है। उन्होंने कहा, "लोगों को लगता है कि उन पर जलवायु नीतियां थोपी जा रही हैं, इसलिए वे विरोध करते हैं। हमें समाज को साथ लेकर चलना होगा।"
ग्लोबल साउथ पर पक्षपात के आरोप
आईपीसीसी रिपोर्ट्स में ग्लोबल साउथ के खिलाफ पक्षपात के आरोपों पर स्की ने कहा कि वैज्ञानिक शोध अब विकासशील देशों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "यूरोप और चीन जलवायु शोध के बड़े केंद्र बन गए हैं, जबकि अमेरिका का हिस्सा घट रहा है।" उन्होंने माना कि वैज्ञानिक संस्थानों का फोकस अब बदल रहा है।












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