जलवायु परिवर्तन की वजह से खतरनाक होती जा रही है हवाई यात्रा-शोध
जलवायु परिवर्तन की वजह से हवाई यात्रा भी प्रभावित हो रही है। एक शोध से पता चला है कि आज की तारीख में हवाई यात्रा जितनी अशांत (turbulent) हो चुकी है, चार दशक पहले वैसी नहीं थी। आने वाले दशकों के लिए इसे बहुत गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।
विमानों के लिए खतरनाक है एयर-टर्बुलेंस
शोधकर्ताओं ने बताया है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से किस तरह हवाई यात्रा प्रभावित हो रही है। यह रिसर्च यूके की रीडिंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। शोधकर्ताओं ने क्लीयर एयर-टर्बुलेंस पाया है, जो कि अदृश्य है और विमानों के लिए खतरनाक है।

गंभीर एयर-टर्बुलेंस अवधि 55 फीसदी बढ़ गई-शोध
शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसी स्थिति दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ी है। यह शोध जर्नल जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित हुआ है। इसके मुताबिक नॉर्थ अटलांटिक जो कि दुनिया के सबसे व्यस्तम हवाई मार्गों में से एक है, वहां सालाना स्तर पर गंभीर एयर-टर्बुलेंस की अवदि 1979 में 17.7 घंटे देखने को मिलती थी। वह 2020 में 55 फीसदी बढ़कर 27.4 घंटे हो गई।
मध्यम और हल्की टर्बुलेंस की अवधि में भी बढ़ोतरी
शोधकर्ताओं ने कहा है कि इसी दौरान मध्यम दर्जे की टर्बुलेंस में 37 फीसदी का इजाफा दर्ज हुआ और यह सालाना 70 से बढ़कर 96.1 घंटे हो गया। जबकि, हल्की टर्बुलेंस की वार्षिक अवधि 17 फीसदी बढ़कर 466.5 घंटे से बढ़कर 546.8 घंटे हो गई।
टर्बुलेंस की घटनाओं के लिए जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार-शोध
शोधकर्ताओं की टीम ने पाया है कि टर्बुलेंस की स्थिति में जो वृद्धि हुई है, वह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के मुताबिक है। कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन की वजह से पैदा हुई गर्म हवाओं के चलते जेट स्ट्रीम में कम दूरी के अंतर पर हवा कि गति और दिशा बदलने (wind shear) की प्रक्रिया में तेजी आ गई है। इसकी वजह से नॉर्थ अटलांटिक और पूरी दुनिया में क्लीयर-एयर टर्बुलेंस की स्थिति बढ़ी है।
कई बार खतरनाक साबित हो सकती है एयर-टर्बुलेंस- वैज्ञानिक
रीडिंग यूनिवर्सिटी में पीएचडी शोधकर्ता मार्क प्रोसेर ने कहा है, 'टर्बुलेंस की वजह से फ्लाइट डगमगाने लगती है और कई बार यह स्थिति खतरनाक साबित हो सकती है। एयरलाइंस कंपनियों को यह सोचना पड़ेगा कि बढ़ती टर्बुलेंस को किस तरह से मैनेज करेंगे, क्योंकि इसकी वजह से सिर्फ अमेरिका की एयरलाइंस सेक्टर को सालाना 15 करोड़ से 500 करोड़ अमेरिकी डॉलर का झटका लगता है।'
विमान में टूट-फूट और यात्रियों को जख्मी होने का खतरा
प्रोसेर के मुताबिक, 'टर्बुलेंस के दौरान जितने भी अतिरिक्त मिनट की यात्रा होती है, उस दौरान विमान में टूट-फूट बढ़ जाती है, साथ ही साथ यात्रियों और फ्लाइट अटेंडेंट्स के जख्मी होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।' शोधकर्ताओं के मुताबिक अमेरिका और नॉर्थ अटलांटिक में यह समस्या ज्यादा बढ़ी है, लेकिन यूरोप, मध्य-पूर्व और दक्षिण अटलांटिक में भी ऐसी घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है।
भविष्य के लिए भी खतरनाक संकेत
रीडिंग यूनिवर्सिटी में वायुमंडलीय वैज्ञानिक और इस स्टडी के को-ऑथर पॉल विलिम्स ने कहा है, 'दशकों की रिसर्च से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन क्लीयर-एयर टर्बुलेंस की घटनाएं भविष्य में बढ़ेंगी, हमारे पास अब प्रमाण हैं कि यह तो पहले ही शुरू हो चुकी है।'
उनके मुताबिक, 'अब हमें टर्बुलेंस की बेहतर भविष्यवाणी और पता लगाने वाले सिस्टम पर निवेश करना चाहिए, जिससे कि आने वाले दशकों में उपद्रवी हवा को विमानों को अशांत करने से रोका जा सके।' (इनपुट-पीटीआई, तस्वीर- सांकेतिक)












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