पहली बार तिब्बत दौरे पर पहुंचे राष्ट्रपति शी जिनपिंग, अरूणाचल सीमा का लिया जायजा, क्या चाहता है ड्रैगन?
शी जिनपिंग ने बतौर राष्ट्रपति पहली बार तिब्बत का दौरा किया है और उन्होंने भारत के अरूणाचल प्रदेश की लगती सीमा का जायजा लिया है।
नई दिल्ली, जुलाई 23: कई सालों के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन के पहले वो नेता बन गये हैं, जिन्होंने तिब्बत का दौरा किया है और भारत के साथ लगती हुई दक्षिण-पूर्वी सीमा का जायजा लिया है। शी जिनपिंग भारत के अरूणाचल प्रदेश से लगती चीन की सीमा तक पहुंच गये और वहां काफी देर तक निरिक्षण किया है, ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या चीन भारत के खिलाफ कोई और साजिश रच रहा है? आखिर कई सालों के बाद किसी चीनी राष्ट्रपति के तिब्बत आने का मकसद क्या है और खासकर अरूणाचल की सीमा के पास ड्रैगन क्या प्लान बना रहा है?
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तिब्बत दौरे पर शी जिनपिंग
चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तिब्बत पहुंचे थे और भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास एक शहर निंगची में हवाई अड्डे पर उतरे थे। शिन्हुआ की रिपोर्ट में कहा गया है कि शी जिनपिंग ने, यारलुंग ज़ांगबो नदी (ब्रह्मपुत्र नदी) का निरीक्षण करने के लिए न्यांग नदी पुल पर गए । आपको बता दें कि कि ब्रह्मपूत्र नदी की सहायक नदी का नाम न्यांग नदी है। इसके साथ ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नवनिर्मित सिचुआन-तिब्बत रेलवे का निरीक्षण करने के लिए न्यिंगची शहर और उसके रेलवे स्टेशन का भी दौरा किया है। वीडियो में दिख रहा है कि शी जिनपिंग के दौरे को लेकर काफी ज्यादा तैयारियां की गई थीं।

शी जिनपिंग का वीडियो वायरल
गुरुवार को दिन भर चीन में सोशल मीडिया पर शी जिनपिंग के तिब्बत दौरे का वीडियो वायरल होता रहा और शुक्रवार को चीन ने शी जिनपिंग के आधिकारिक तिब्बत दौने की पुष्टि भी कर दी है। 2012 में चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी का महासचिव बनने के बाद शी जिनपिंग ने पहली बात स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत का दौरा किया है। शी जिनपिंग ने इससे पहले 2011 में बतौर चीन के उप-राष्ट्रपति तिब्बत का दौरा किया था। तिब्बत मामलों के जानकार रॉबी बार्नेट ने ट्विटर पर लिखा है कि ''शी जिनपिंग ने 21 जुलाई 2011 को ल्हासा की यात्रा की थी, जिसके पीछे तिब्बत की शांतिपूर्ण मुक्ति की 60वीं वर्षगांठ का हवाला दिया गया था, लेकिन किसी को इस बात पर यकीन नहीं हुआ कि आखिर उसी तारिख को क्यों चुना गया, क्योंकि तिब्बत की वर्षगांठ को चीन 23 मई को मनाता है। लेकिन, मई के बदले अब चीन जुलाई में कार्यक्रम क्यों मना रहा है? आखिर इस साल भी 21 जुलाई को ही शी जिनपिंग ने तिब्बत की 70वी वर्षगांठ क्यों मनाई है?

तिब्बत के साथ 17 सूत्रीय समझौता
आपको बता दें कि तिब्बत ने चीन के साथ 17 सूत्रीय समझौते पर 23 मई, 1951 को हस्ताक्षर किए गए थे। चीन इस समझौते को "तिब्बत की शांतिपूर्ण मुक्ति" के तौर पर मनाता आ रहा है। लेकिन, इस समझौते को तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा ने खारिज कर दिया था और तिब्बत को अलग देश कहा था। दलाई लामा ने कहा था कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने तिब्बत को समझौता करने के लिए मजबूर किया है और अपने वादों को तोड़ने का काम किया है। जिसके बाद 1959 में दलाई लामा को मजबूरन भारत में शरण लेनी पड़ी और अभी भी भारत के धर्मशाला से ही तिब्बत की निर्वासित सरकार चलती है।
तिब्बत में पहली बार बुलेट ट्रेन
माना जा रहा है कि तिब्बत की 70वीं वर्षगांठ मनाने के लिए ही शी जिनपिंग ने ल्हासा और भारत की सीमा से लगते बॉर्डर निंगची का दौरा किया है। इसी महीने चीन ने निंगची तक बुलेट ट्रेन का संचालन भी शुरू किया है, ऐसे में माना जा रहा है चीन किसी बड़ी कार्ययोजना को भारत की सीमा के पास अंजाम दे रहा है। चीन ने इस बुलेट ट्रेन को अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास ल्हासा को निंगची से जोड़ने के लिए बनाया है। चायना स्टेट रेलवे ग्रुप के मुताबिक 435 किलोमीटर लंबी इस बुलेट ट्रेन रेलवे लाइन का काम 2014 में शुरू हुआ था और सिर्फ 7 सालों में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की राजधानी को सीमावर्ती शहर निंगची से जोड़ दिया गया। इस बुलेट ट्रेन की रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटे की है। वहीं, शिन्हुआ न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस रेल लाइन का निर्माण चीन ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए किया है, जिसका साफ मतलब भारत के अरूणाचल प्रदेश को लेकर था।












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