पाकिस्तान में हिन्दी सीखते चीनी लोग
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। आप चौंकिए मत ये जानकार कि पाकिस्तान सीखा-पढ़ा रहा है चीनियों को हिन्दी। चीन और पाकिस्तान के मधुर संबंधों के बारे में सबको पता है। पर बहुत से चीनी डिप्लोमेट और रक्षा विशेषज्ञ पाकिस्तान में हिन्दी सीखेंगे, ये अपने आप में हैरानी की बात तो है।
कामचलाऊ हिन्दी
इन चीनियों को हिन्दी का कामचलाऊ ज्ञान मिल रहा है पाकिस्तान की नेशनल यूनिवर्सिटी आफ माडर्न लैंगवेज्ज (एनयूएमएल) में। ये इस्लामाबाद में है। इसके हिन्दी विभाग में पांच टीचर हैं। एनयूएमएल में हिन्दी के साथ-साथ पाकिस्तान में बोली जानी बहुत सी भाषाओं के साथ कई विदेशी भाषाओं के भी कोर्स कराए जाते हैं।
1972 से एक्टिव
इधर हिन्दी विभाग 1973 से चल रहा है। एनयूएमयू की वेबसाइट के अनुसार, शुरू में हिन्दी विभाग हिन्दी का डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स करवाता था। अब तो यहां से एम.फिल और पीएचडी की डिग्री भी ली जा सकती है। हालांकि वेबसाइट से ये नहीं पता चला सका कि इधर अब तक कितने छात्रों ने एम फिल या पीएचडी की और किन विषयों में। [Short Story: जब मोटे बंदर ने निकाली रात की भड़ास]
हिन्दी की अनदेखी नहीं
पाकिस्तान हाई कमीशन के एक सूत्र ने बताया कि चूंकि हिन्दी पाकिस्तान के पड़ोसी मुल्क भारत की राष्ट्रभाषा है, इसलिए इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। जानकारों ने बताया कि इधर चीनियों के अलावा संयुक्त अरब अमीरत के सरकारी अफसर भी हिन्दी सीखते हैं।
हिन्दी विभाग की प्रमुख डा. नसीमा खातून हैं। उन्होंने नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्लाय से हिन्दी साहित्य में पी.एचडी की है। उनके प्रोफाइल से साफ है कि वह आगरा से संबंध रखती हैं। वह आगरा विश्वविद्लाय में भी पढ़ी हैं।
जानकारों ने बताया कि पाकिस्तानियों की बोलचाल में अब हिन्दी भाषा के शब्द खूब बोले जा रहे हैं। ये हिन्दी फिल्मों और टीवी सीरियलों के कारण हो रहा है। एक दौर में लाहौर तो हिन्दी का गढ़ होता था। वहां पर हिन्दी के कई बड़े प्रकाशन भी थे। इनमें राजपाल एंड संस खास है।













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