भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में निवेश करने को चीन तैयार, लेकिन ड्रैगन को लगा डर, रख दी बड़ी शर्त!
भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी खजाने में पैसे बढ़ाने के लिए नया लीज प्रोग्राम जारी किया है। जिसकते तहत भारत सरकार के बजट को बचाने के लिए और इन्फ्रास्ट्रक्टर में विकास के लिए पूंजी जुटाने की कोशिश करेगी।
बीजिंग, अगस्त 25: चीन ने कहा है कि वो भारत सरकार के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लान को लेकर काफी उत्साहित है, लेकिन उसे मोदी सरकार के फैसलों से 'डर' लगता है। चीन ने एक तरफ से मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने की कोशिश की है। भोंपू मीडिया ग्लोबल टाइम्स के जरिए चीन ने कहा है कि चीन की कंपनियां भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में निवेश करने के लिए तैयार हैं और चीनी कंपनियों की नजर भी भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की है, लेकिन मोदी सरकार चीन को लेकर बार बार नीति बदल लेती है, इसलिए चीनी कंपनियां भारत में निवेश करने से हिचक रही हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश पर बोला चीन
चीनी अखबार ने लिखा है कि भारत सरकार संपत्तियों को लीज पर रखकर करीब 6 ट्रिलियन रुपये (80.87 बिलियन डॉलर) जमा करना चाहती है, ताकि सरकारी बजट को स्वतंत्र कर उससे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जाए और भारत सरकार के इस फैसले के बाद चीन की कंपनियां भारत में निवेश करने की तरफ देख भी रही हैं और भारत सरकार का ये फैसला चीन की कंपनियों की भारत में निवेश करने की उम्मीदों को भी बढ़ा रही है। हालांकि, चीनी कंपनियां भारत में अस्थिर नीतियों को लेकर सतर्क हैं और उन्होंने भारत सरकार से कॉन्ट्रेक्ट की भावना का पालन करने और देश के कारोबारी माहौल में सुधार करने का आग्रह किया है, जो भारतीय बाजार में उनके विश्वास को फिर से बनाने में मदद कर सकता है।

भारतीय वित्तमंत्रालय का प्लान
भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी खजाने में पैसे बढ़ाने के लिए नया लीज प्रोग्राम जारी किया है। जिसकते तहत भारत सरकार के बजट को बचाने के लिए और इन्फ्रास्ट्रक्टर में विकास के लिए पूंजी जुटाने के लिए अगले चार सालों में सड़कों, रेलवे और बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के साथ साथ सरकारी संपत्तियों को लीज पर दिया जाएगा और उससे जो पैसे सरकार के पास आएंगे, मोदी सरकार की प्लान है कि उन पैसों से देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाए। भारतीय वित्त मत्रालय ने सरकारी संपत्तियों को लीज पर रखने का फैसला पीएम मोदी के 15 अगस्त को लालकिले पर दिए गये उस भाषण के बाद लिया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि वो देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए 1.35 ट्रिलियन डॉलर की एक इन्फ्रांस्ट्रक्चर योजना पेश करेंगे। यह योजना "स्थानीय निर्माताओं को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद करेगी और भारत में नए भविष्य के आर्थिक क्षेत्रों की संभावनाओं को भी विकसित करेगी,"

चीन की किन कंपनियों की नजर
लाल किले पर दिए गये भाषण के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि पूरे भारत में रेलवे के संपूर्ण विद्युतिकरण की तरफ काम तेजी से चल रहा है और भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारतीय रेलवे पूरी तरह से इलेक्ट्रिक हो जाए। पीएम मोदी की इस घोषणा को लेकर ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि चीन की प्रमुख इक्विपमेंट उत्पादक कंपनी सेनी ग्रुप, जिसका भारत में बाजार हिस्सेदारी टॉप-3 में आता है, वो भारत सरकार के रेलवे इलेक्ट्रिसिटी प्लान को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है। सेनी ग्रुप ने कहा कि, ''आने वाले वक्त में कन्सट्रक्शन मशीनों की डिमांड काफी बढ़ने वाली है और इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधित मशीनों और उपकरणों की डिमांड भी बढ़ने की संभावना है। कंपनी ने कहा है कि भारत समेत तमाम विकासशील देशों में कंपनी का सेल्स पिछले 6 महीने में बढ़ चुका है और आने वाले वक्त में और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, सेनी ग्रुप ने कहा कि ''पिछले कुछ महीनों में चीन की इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों को भारत में बड़ा झटका लगा है, उससे हमें रिस्क भी लग रहा है''

भारत में निवेश को लेकर चिंतित
एक प्रमुख चीनी सौर पैनल कंपनी के एक मैनेजर, जिनके प्रोडक्ट्स को भारत सहित 100 से अधिक देशों में निर्यात किया जाता है, उन्होंने मंगलवार को ग्लोबल टाइम्स को बताया कि, वह अनिश्चित हैं कि क्या भारत की बुनियादी ढांचा और स्वच्छ ऊर्जा योजना विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर पाएंगी? कंपनी के मैनेजर ने कहा कि, "अप्रैल में भारत सरकार ने चीन, थाईलैंड और वियतनाम से सौर पैनलों के आयात में एंटी-डंपिंग जांच शुरू कर दी थी, लिहाजा हम चीनी कंपनियों के लिए भारत में संभावित परिणाम की भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं''। दरअसल, चीन की कंपनियों पर जासूसी का आरोप कई देशों में लगा है और कई चीनी कंपनियों को अमेरिका और ब्रिटेन में बैन किया गया है, जिससे चीन की कंपनियां डरी हुई हैं। भारत सरकार ने भी कई चीनी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों को बैन किया है, लिहाजा चीन ने एक तरह से भारत के सामने शर्त रखा है, कि वो निवेश करने के लिए तो तैयार हैं, लेकिन सरकार पहले भरोसा दिलाए कि वो बीच में चीनी कंपनियों पर कार्रवाई नहीं करेगी।












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