तो क्या अब अमेरिका नहीं चीन है दुनिया का बॉस? ड्रैगन की धमकी पर बाइडेन ने दिए पीछे हटने के संकेत
वाशिंगटन, 25 जुलाईः अमेरिकी संसद की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की प्रस्तावित ताइवान यात्रा पर चीन बेहद नाराज है। चीन ने कहा है कि अगर नैंसी पेलोसी ने अगर ताइवान की यात्रा की दो वह कड़ा कदम उठाने को तैयार है। चीन के इस आक्रामक रवैये के बाद अमेरिका के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। इस मामले में बाइडेन ने भी अपनी राय रखी है।

25 साल पहले कांग्रेस अध्यक्ष ने किया था दौरा
कांग्रेस अध्यक्ष नैंसी पेलोसी इससे पहले अप्रैल में ही ताइवान की यात्रा करने वाली थीं, लेकिन उनके कोरोना संक्रमित होने की वजह से यह यात्रा आगे बढ़ानी पड़ी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नैंसी पेलोसी अब अगस्त में प्रतिनिधिमंडल के साथ ताइवान का दौरा कर सकती हैं। अगर यह दौरा सम्पन्न होता है तो 1997 के बाद किसी सदन के अध्यक्ष की यह पहली ताइपे यात्रा होगी। इससे पहले स्पीकर न्यूट गिंगरिच ने 25 साल पहले ताइवान के तत्कालीन राष्ट्रपति ली टेंग-हुई से भेंट की थी। उस वक्त अमेरिका में बिल क्लिंटन की सरकार थी।

ताइवान ने किया हवाई हमले का अभ्यास
ड्रैगन की धमकी के बाद अमेरिका अगर नैंसी पेलोसी की प्रस्तावित यात्रा को रद्द करता है तो इसे चीन के सामने झुकना माना जाएगा। वहीं, दूसरी ओर अगर यात्रा के बाद चीन, ताइवान पर सैन्य आक्रमण कर देता है तो भी स्थितियां असहज बन जाएंगी। उधर ताइवान ने चीन की इस धमकी के बाद हवाई हमले का अभ्यास किया है। अभ्यास के दौरान ताइवान ने अपने नागरिकों को मोबाइल पर संदेश भेजकर घरों में रहने के निर्देश दिए।

चीन ने दी परिणाम भुगतने की धमकी
इससे पहले 19 जुलाई को फाइनेंशियल टाइम्स ने सूत्रों का हवाला देते हुए बताया था कि पेलोसी अगस्त में ताइवान का दौरा कर सकती हैं जिसके बाद चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने तुरंत प्रतिक्रिया जताते हुए अमेरिका को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। झाओ ने कहा कि अमेरिका को ताइवान क्षेत्र का दौरा करने के लिए स्पीकर पेलोसी की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए। अमेरिका को ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए जिससे दोनों देशों के रिश्ते पर असर पड़े।

चीन ने कहा, अमेरिका को परिणाम भुगतना होगा
झाओ ने आगे चेतावनी दी कि यदि अमेरिका यह यात्रा करने पर जोर देता है तो चीन अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए मजबूत और दृढ़ उपाय करेगा। आने वाले किसी भी आगामी परिणाम के लिए अमेरिका को जिम्मेदारी लेनी होगी। हालांकि कुछ रिपोर्टों के मुताबिक व्हाइट हाउस में हर कोई पेलोसी की ताइवान यात्रा के साथ नहीं है। ऐसे में इसे रद्द भी किया जा सकता है।

पेलोसी की यात्रा से भड़केगा चीन
चूंकि पूरी दुनिया अभी रूस-यूक्रेन संकट के कारण आर्थिक समस्याओं का सामना कर रही है ऐसे में इस बात पर खास तौर पर जोर दिया जा रहा है कि इस वक्त चीन की आक्रामकता को देखते हुए प्राथमिकता ताइवान के आत्मरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की है। ऐसे में पेलोसी की यात्रा चीन के लिए उकसावे की तरह हो सकता है।

खुद को ताकतवर दिखाना चाहता है चीन
फिलहाल इस यात्रा से बड़े पैमाने पर चिंताएं जुड़ी हुई हैं। बीते दिनों चीन ने साउथ चाइना सी में एक एयरक्राफ्ट कैरियर किलर मिसाइल का परीक्षण किया था। शी जिनपिंग अपने अगले कार्यकाल को लेकर हर मोर्चे पर खुद को ताकतवर दिखाना चाहते हैं। ऐसे में स्थितियों को नियंत्रण में रखने के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रा को रोका जा सकता है।

ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन
ताइवान यात्रा पर मचे बवाल के पीछे मुख्य वजह है कि चीन, ताइवान को अपना अखंड हिस्सा मानता है और वह किसी भी तरह से ताइवान की संप्रभुता को बर्दाश्त नहीं करना चाहता है। अमेरिकी संसद अध्यक्ष की यात्रा के कूटनीतिक मायने हैं और यह चीन को अखर रहा है। इस बीच पेलोसी की यात्रा के बारे में पूछे जाने पर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी अपनी राय रखी।

बाइडेन ने दिए पीछे हटने के संकेत
राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि सेना को ऐसा लगता है कि ताइवान यात्रा एक ठीक विचार नहीं है। लेकिन मुझे नहीं पता कि इसकी स्थिति क्या है। बाइडेन ने यह भी कहा कि वह अगले दस दिनों में चीनी राष्ट्रपति के साथ बात करने की योजना बना रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान को देखकर लगता है कि अमेरिकी कांग्रेस अध्यक्ष की ताइवान यात्रा पर विराम लग सकता है।












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