चीन और अमेरिका के रिश्तों में नया टिवस्ट, आतंक के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका के साथ
वाशिंगटन। पिछले दिनों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की और आतंकवाद पर साथ मिलकर लड़ने की बात दोनों देशों की ओर से कही गई।

अब चीन ने भी अमेरिका के साथ मिलकर आतंकवाद का सामना करने की बात कही है। चीन की ओर से अमेरिका के सामने जताई गई यह इच्छा काफी हैरान करने वाली है क्योंकि चीन और अमेरिका के रिश्ते दुनिया में जगजाहिर हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक हो सकता है कि चीन, नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा के बीच पिछले दिनों आई नजदीकियों से काफी परेशान हो। इसकी वजह से उसने अमेरिका से अपनी यह इच्छा जाहिर की हो। हालांकि चीन भी पिछले करीब तीन वर्षों से ब्लास्ट और इस तरह की आतंकी गतिविधियों से जूझ रहा है।
चीन ने कहा है कि वह आतंकवाद के किसी भी रूप का विरोध करता है और आतंकवाद के खतरे से निपटने में अमेरिका के साथ मिलकर काम करने की इच्छा रखता है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने यह बात कही।
पेंटागन में अमरीकी रक्षा मंत्री चुक हेगल से मुलाकात के दौरान वांग ने कहा कि दोनों पक्षों को एशिया प्रशांत क्षेत्र में सकारात्मक बातचीत और सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चीन एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमरीका के परंपरागत प्रभाव और वास्तविक हितों का सम्मान करता है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उसकी सकारात्मक भूमिका का समर्थन करता है, जबकि अमेरिका को क्षेत्र में चीन की हैसियत और प्रभाव का सम्मान करना चाहिए। यह सुसंगत विकास और वैधानिक अधिकार के लिए जरूरी है।
वांग ने कहा कि चीन को उम्मीद है कि अमेरिका उचित तरीके से उन मुद्दों को देखेगा जो चीन-अमेरिका के संबंधों की राह का रोड़ा बन रहे हैं। ऐसे मुद्दों में ताइवान को हथियारों की बिक्री और अमेरिका के युद्धपोत और सेना के विमान द्वारा चीन की जासूसी करना शामिल है।
चीन के विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच संबंधों और सैन्य संबंधों को आगे बढ़ाने में हेगल की भूमिका की सराहना की।
उधर, चीन के पीपुल्स रिपब्लिक (चीन जनवादी गणराज्य) स्थापना की 65वीं वर्षगांठ पर बधाई देते हुए हेगल ने कहा कि अमेरिका और चीन साझीदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं और दोनों देशों में आपसी मतभेद से कहीं ज्यादा साझा हित हैं।












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