शंघाई में आसमान से बरस रही आग, आज गर्मी ने तोड़ा 100 सालों का रिकॉर्ड
वर्ष 2022 का औसत वैश्विक तापमान ला-नीना स्थितियों के शीतलन प्रभाव के बावजूद 1850-1900 के औसत से लगभग 1.15 डिग्री सेल्सियस अधिक था। तापमान अब लगभग 0.2 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक बढ़ रहा है।

चीन के कई हिस्सों में गर्मी रिकार्ड स्तर पर जा पहुंची है। शंघाई में तो इतनी गर्मी पड़ रही है कि वहां इसने 100 सालों का रिकॉर्ड तोड़ डाला है। ढ़ाई करोड़ की आबादी वाले इस शहर में भीषण गर्मी से लोग परेशान हैं।
मौसम विज्ञान सेवा ने कहा कि शंघाई में सोमवार यानी कि आज 100 वर्षों में मई में सबसे अधिक गर्म दिन दर्ज किया गया। जानकारी के मुताबिक दोपहर 1:09 बजे जुजियाहुई स्टेशन पर तापमान 36.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
पूर्वी चीनी शहर के लिए मौसम विज्ञान सेवा ने कहा कि बाद में दोपहर में मध्य शंघाई में मेट्रो स्टेशन का तापमान और भी अधिक बढ़कर 36.7 डिग्री सेल्सियस हो गया।
मौसम सेवा के रिकॉर्ड के मुताबिक अब तक शंघाई शहर में मई के महीने में उच्चतम तापमान 35.7 डिग्री सेल्सियस था। बीते 100 सालों में चार बार उच्च तापमान के इस आंकड़े को छू गया।
इससे पहले ये 1876, 1903, 1915 और 2018 में दर्ज किया गया था। इससे पहले मई में संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी थी कि यह साल सबसे अधिक गर्म हो सकता है।
2023-2027 अब तक दर्ज की गई सबसे गर्म पांच साल की अवधि होगी, क्योंकि ग्रीनहाउस गैसें और अल नीनो मिलकर तापमान को बढ़ा रहे हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग प्रतिकूल मौसम को बढ़ा रही है, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के अंतर सरकारी पैनल की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि "ग्लोबल वार्मिंग में हर वृद्धि कई और खतरों को बढाएगी"।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक अगले पांच साल में एक वर्ष लगभग निश्चित रूप से सबसे गर्म होगा और इसी अवधि में इस बात की प्रबल संभावना है कि एक वर्ष 1.5 डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग की सीमा को पार कर जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक 98 प्रतिशत संभावना है कि अगले पांच सालों में कोई एक साल ऐसा होगा, जिसमें अब तक की सबसे अधिक गर्मी दर्ज की जाएगी। वहीं, इस बात की 66 प्रतिशत संभावना है कि अगले 5 सालों में किसी न किसी साल तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग की सीमा को पार कर जाएगा।
वैज्ञानिकों का कहना है कि हम दुनिया को इतनी तेजी से गर्म कर रहे हैं, जिससे विश्व स्तर पर और स्थानीय स्तर पर गर्मी के रिकॉर्ड बन रहे हैं। जलवायु पर मानवीय प्रभावों के कारण तापमान अभूतपूर्व उच्च स्तर पर पहुंच रहा है।












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