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चीन जो कहेगा अब वही बोलेगा पाकिस्तान! इमरान खान ने समझौते पर किए दस्तखत, स्वतंत्र विदेश नीति होगी खत्म!

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पेइचिंग/इस्लामाबाद: हर देश की अपनी स्वतंत्र विदेश नीति होती है और जिसके आधार पर हर देश अपने लिए अपने हिसाब से किस देश के साथ कैसा संबंध रखना है, ये तय करता है। लेकिन, चीन से अरबों रुपये कर्ज लेने वाले पाकिस्तान ने अब अपनी विदेश नीति चीन के पैरों में गिरवी रख दी है। इमरान खान ने पाकिस्तान की अंतिम प्रतिष्ठा को भी खत्म कर दिया है। यानि, अब पाकिस्तान वही बोलेगा जो उसे चीन कहेगा और पाकिस्तान को किस देश से कैसा संबंध रखना चाहिए ये धीरे धीरे चीन तय करेगा।

स्वतंत्र विदेश नीति खत्म!

स्वतंत्र विदेश नीति खत्म!

दरअसल, चीन और पाकिस्तान के बीच एक समझौते पर सहमति बनी है, जिसके मुताबिक चीन और पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक मसले पर आपसी सहयोग को मजबूत करेंगे। कुछ दिन पहले भी दोनों देशों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तीसरे दौर की बातचीत की थी। जिसके बाद अब दोनों देशों के बीच तय किया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय मंचोँ पर आपसी सहयोग को मजबूत किया जाएगा। इस समझौते का सीधा असर पाकिस्तान ये होगा कि पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विचार क्या हो, ये अब चीन तय करेगा। क्योंकि साधारण शब्दों में समझें तो चीन के विदेश मामलों में हस्तक्षेप करने की औकात पाकिस्तान को है नहीं और चीन जो कह देगा, उससे इनकार करना पाकिस्तान के वश की बात होगी नहीं।

चीन का मोहरा बना पाकिस्तान?

चीन का मोहरा बना पाकिस्तान?

माना जा रहा है चीन के साथ इस समझौते के बाद पाकिस्तान की स्वतंत्र विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं। हर देश अपने हितों के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपना पक्ष रखता है। हर देश का अधिकार होता है कि किसी मुद्दे पर अपने हिसाब से अपने हितों को देखते हुए अपना पक्ष रखें या किसी मुद्दे का समर्थन अथवा विरोध करें, लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि अगर कोई मुद्दा चीन के पक्ष में है और पाकिस्तान के खिलाफ है, यो फिर पाकिस्तान क्या करेगा? या फिर मान लीजिए यूनाइटेड नेशंस में अमेरिका के मुद्दे पर पाकिस्तान क्या करेगा? क्या वो चीन के दुश्मन अमेरिका के खिलाफ जाने की हिम्मत कर सकता है? असल में जानकारों का कहना है कि चीन ने अरबों डॉलर का कर्ज देकर पाकिस्तान को अपना अंतर्राष्ट्रीय मोहरा बना लिया है।

सहयोग बढ़ाने पर समझौता

सहयोग बढ़ाने पर समझौता

चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यूनाइटेड नेशंस के सभी प्रमुख क्षेत्रों में आपसी हित के कई मुद्दों पर विचारों का आदान प्रदान किया जाएगा। और दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर एक दूसरे का सहयोग करने पर सहमत हुए हैं। यानि, चीन और पाकिस्तान एक दूसरे के साथ विचारों का आदान प्रदान करेंगे, जिसका मतलब ये हुआ कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर पाकिस्तान का विचार क्या हो, ये अब चीन तय करेगा और इसका सीधा खामियाजा आने वाले वक्त में पाकिस्तान को भुगतना पड़ेगा। सबसे हैरान होने वाली बात ये है कि पाकिस्तान ने चीन के साथ आतंकवाद विरोधी अभियान में सहयोग को मजबूती से जारी रखने का फैसला किया है। यानि वो देश पाकिस्तान जो पूरी दुनिया में आतंकवाद फैलाने के लिए बदनाम है, वो आतंकवाद विरोधि अभियान चलाएगा।

चीन से हथियार खरीदता पाकिस्तान

चीन से हथियार खरीदता पाकिस्तान

सिपरी यानि स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 से 2020 के बीच पाकिस्तान ने करीब 2 तिहाई हथियार सिर्फ चीन से खरीदे हैं। सिवरी रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने अपने कुल हथियारों की खरीद का 74 फीसदी हथियार पाकिस्तान से खरीदे हैं। और दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाले देशों की लिस्ट में पाकिस्तान का स्थान दसवां हैं।

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English summary
China and Pakistan have agreed to strengthen mutual cooperation on a number of global issues, including the United Nations. That is, Pakistan will now speak what it calls China in the United Nations
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