चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ फूट सकता है विद्रोह, CCP ने लाखों रिटायर्ड कैडर्स को फौरन बुलाया
चीन में पिछले महीने मुखबिरी करने पर इनाम की घोषणा की गई है, जिसके तहत चीन के आम लोग सीधे कम्युनिस्ट पार्टी को जानकारी दे सकते हैं, कि उनके आस-पास या उनके इलाके में विद्रोह की चिंगाड़ी भड़क रही है।
बीजिंग, जून 19: चीन में शी जिनपिंग के अधिनायकवाद शासन के खिलाफ बहुत बड़े विद्रोह की आहट के बीच कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना ने अपने लाखों रिटायर्ड कैडर्स को एक जगह जुटाना शुरू कर दिया है। ऐसी रिपोर्ट्स आ रही हैं, कि चीन में कम्युनिस्ट शासन के खिलाफ कभी भी भारी विरोध फूट सकता है और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने लाखों रिटायर्ड कैडर्स को एकजुट होने के आदेश दिए हैं। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी का संदेश छपा है, जिसमें लाखों कैडर्स को पार्टी के संकल्प के लिए एकजुट होने का आदेश दिया गया है और उनसे पार्टी के लिए मदद मांगी गई है।

सामने हैं दो बड़ी मुसीबत
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कम्युनिस्ट पार्टी देश के सामने दो सबसे बड़ी संकटों से डर गई है। पहली सबसे बड़ी समस्या है, देश में जनसंख्या का विकास रूक जाना और दूसरी सबसे बड़ी आशंका इस बात को लेकर है, कि चीन की एक बहुत बड़ी आबादी, जिसमें सबसे ज्यादा बुढ़े लोग हैं, वो शी जिनपिंग के शासन के खिलाफ विद्रोह कर सकते हैं और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पास इसकी पुख्ता जानकारी है, लिहाजा पूर्व कैडरों को इकट्ठा किया जा रहा है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के सामान्य कार्यालय ने हाल ही में "नए युग में सेवानिवृत्त कैडरों के पार्टी भवन को मजबूत करने पर राय" जारी की है। यह एक पार्टी सिद्धांत है, कि सभी क्षेत्रों और विभागों के लोग बिना कोई सवाल किए एक साथ आ जाएं।

ऐसा क्यों कर रही है कम्युनिस्ट पार्टी?
चीन में पिछले महीने मुखबिरी करने पर इनाम की घोषणा की गई है, जिसके तहत चीन के आम लोग सीधे कम्युनिस्ट पार्टी को जानकारी दे सकते हैं, कि उनके आस-पास या उनके इलाके में विद्रोह की चिंगाड़ी भड़क रही है और अब लाखों पुराने कैडर्स को एकजुट करने के पीछे चीन की पूरी की पूपी आबादी को सीधे तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण में लाना और लोगों को राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर मन में 'अंधभक्ति' पैदा करना है और इसी लिए कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने सबसे बड़े नियम के तहत कम्युनिस्ट पार्टी के रिटायर्ड कैडरों को इकट्ठा करना शुरू किया है और वो इसमें शामिल होने से इनकार नहीं कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सीसीपी कोविड महामारी की वजह से चीन के समाज में पनपे नकारात्मक घरेलू प्रभाव से बेहद सावधान है। कोविड की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लगा है, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोगों की नौकरियां चली गईं हैं, औद्योगिक उत्पादन ठप हो गया है और देश का निर्यात बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। जिससे चीन में गंभीर महंगाई आ गई है और चीन के गरीब लोगों में गुस्सा काफी ज्यादा भड़क गया है।

स्थिति सुधारने के लिए आपातकालीन कदम
शी जिनपिंग की सरकार ने स्थिति को सुधारने के लिए बेताब कदम उठाए हैं, लेकिन इसके बाद की ज़ीरो कोविड पॉलिसी ने आर्थिक अस्थिरता के दूसरे चरण को जन्म दे दिया, क्योंकि लाखों नागरिकों को क्वारंटाइन में मजबूर किया गया और इस दौरान उनके लिए किसी भी तरह की सुविधाओं का प्रबंध नहीं किया गया। जिसके बाद कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने प्रधानमंत्री ली केकियांग को स्थिति संभालने के लिए आगे कर दिया, ताकि लोगों का ध्यान शी जिनपिंग से भटक जाए। चीन में ज़ीरी कोविड पॉलिसी की वजह से सैकड़ों कारखाने बंद हो गये हैं, बंदरगाह सुनसान हो गये हैं और आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप हो गईं हैं। लोगों को भयानक आर्थिक आघात का सामना करना पड़ा। हालात इस हद तक बिगड़ गए कि शंघाई जैसे बड़े शहरों में किराने का सामान खरीदना लोगों के लिए दुर्लभ हो गया है।

चीन की सड़कों पर फैली अशांति
चीन में प्रदर्शन करने की हिम्मत आम लोगों में नहीं होती है। लेकिन, इस बार हालात इतने खराब हो गये हैं, कि लोगों को दुर्लभ प्रदर्शनों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा, जिससे सड़कों पर अशांति फैल गई और चीन की सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी नारे लगे। सीसीपी ने महसूस किया कि अगर स्थिति को कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह विरोध प्रदर्शन एक दिन पार्टी नेतृत्व को ही चुनौती दे सकती है। राष्ट्रपति शी इस साल के अंत लगातार तीसरी बार देश के राष्ट्रपति बिना किसी रूकावट के बनने वाले थे, लेकिन अब शी जिनपिंग की राह आसान नहीं लग रही है। लिहाजा, कन्युनिस्ट पार्टी का मानना है कि, लाखों वृद्ध और सेवानिवृत्त कम्युनिस्ट कैडरों को एकजुट करना इस समस्या का समाधान का हिस्सा है। उन्हें साधारण पार्टी कार्य करने के लिए राजी किया जाएगा और पार्टी की वफादारी का संदेश सीधे ग्रामीण स्तर तक फैलाया जाएगा। वहीं, उन लोगों का पता लगाया जाएगा, जो स्थानीय नेता बनकर लोगों को सरकार के प्रति भड़काने का काम कर रहे हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी ने जारी किए आदेश
राज्य-नियंत्रित मीडिया एजेंसी सिन्हुआ ने सीसीपी के आदेश को जारी करते हुए जो रिपोर्ट छापी है, उसमें कहा गया है कि, ये "'राय' इस बात पर जोर देती है, कि रिटायर्ड कैडर पार्टी और देश की अनमोल संपत्ति हैं, और चीनी विशेषताओं के साथ समाजवाद के महान कारण को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण शक्ति हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि, 'हमारी पार्टी के काम में अनुभवी कैडरों के काम का एक विशेष और महत्वपूर्ण स्थान है और यह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पार्टी निर्माण की एक विशेषता है। नए युग में सेवानिवृत्त कैडर्स पार्टी-निर्माण कार्य को मजबूत करें, और बेहतर एकजुट हों और कॉमरेड शी जिनपिंग के साथ बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कैडर पार्टी जुड़े और पार्टी की रणनीति लागू करने में और योजनाओं को आगे बढ़ाने में शामिल हों।

‘नहीं भूलना है कम्युनिस्ट पार्टी का मिशन’
सिन्हुआ न्यूज में छपे कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने संदेश में कहा है कि, 'किसी भी कॉमरेड को अपने मूल इरादे को नहीं भूलना है और मिशन को ध्यान में रखना है और दूसरे शताब्दी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सक्रिय रूप से ज्ञान और बल का योगदान करना और चीनी राष्ट्र के महान कायाकल्प के सपने को साकार करने की दिशा में काम करना बहुत महत्वपूर्ण है'। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक आदेश ने यह साफ कर दिया है, कि सीसीपी रिटायर्ड कैडरों की पूरी वफादारी के अलावा और कुछ नहीं चाहती है।

कम्युनिस्ट पार्टी में भी दो फाड़
कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से रिटायर्ड कैडरों को नये युग में लोगों को कम्युनिस्ट विचारधारा समझाने और उनका मार्गदर्शन करने का आदेश दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि, 'कैडर्स यह सुनिश्चित करें कि पार्टी के सदस्य पार्टी को सुनते रहें और पार्टी का अनुसरण करें'। आपको बता दें कि, पिछले कुछ महीनों में कई रिपोर्ट्स आ चुकी हैं, जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर भी दो फाड़ होने की बात कही गई है और चीन के प्रधानमंत्री बार बार चीन की सरकारी मीडिया के पहले पन्ने पर आ रहे हैं, जिसको लेकर विश्लेषकों का कहना है कि, राष्ट्रपति की जगह चीन के प्रधानमंत्री का सरकारी अखबार के पहले पन्ने पर आना बताता है, कि चीन में कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है, जिसकी असली रिपोर्ट देश से बाहर नहीं निकल पा रही है।












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