चीन की सीमा पर भारत तैनात करेगा विनाशक ब्रह्मोस मिसाइल, बौखलाए ड्रैगन ने जमकर उगला विष
ब्रह्मोस एक कम दूरी की रैमजेट सुपरसोनिक मिसाइल है और इस मिसाइल को रूस के साथ मिलकर भारत में बनाया गया है। ये अपने आप में काफी ज्यादा विध्वंसक है और इसे रोकना नामुमकिन माना जाता है।
बीजिंग, नवंबर 15: चीन को जब उसी की भाषा में जबाव दिया जाता है, तो ड्रैगन की बौखलाहट सामने आ जाती है और एक बार फिर से ड्रैगन ने भारत के खिलाफ जमकर विष उगला है। भारत ने चीन की सीमा पर विध्वंस मचा देने वाला ब्रह्मोस मिसाइल क्या तैनात करने का फैसला किया है, जिसके बाद चीन की तिलमिलाहट सामने आ गई है और कम्युनिस्ट पार्टी के भोंपू ग्लोबल टाइम्स ने जमकर अपनी भड़ास निकाली है।

ड्रैगन ने निकाली जमकर भड़ास
भारत के ब्रह्मोस मिसाइल तैनात करने के फैसले पर चीन की पेट में भयंकर मरोड़ हो रहा है और ग्लोबल टाइम्स ने अपनी भड़ास निकालते हुए पर्यवेक्षकों के हवाले से लिखा है कि, सीमा पर ब्रह्मोस मिसाइल तैनात करने का फैसला कर भारत सरकार, चीन-भारत तनाव को और हवा दे रही है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि, भारत चीन सीमा पर भारत की सबसे उन्नत ब्रह्मोस मिसाइल तैनात करने के बाद भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को शांतिपूर्वक संबोधित करने में अड़चने आएंगी और कई नई बाधाएं आएंगी। वहीं, ग्लोबल टाइम्स ने पर्यवेक्षकों के हवाले से लिखा है कि, भारत ने सिर्फ सैद्धांतिक तरीके से ही ब्रह्मोस मिसाइल को सीमा पर तैनात किया है, जबकि इससे चीन की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है।

भारतीय परियोजना से चीन को टेंशन
ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय न्यूज चैनल 'इंडिया टीवी' की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए लिखा है कि, भारत सरकार अपने महत्वाकांक्षी 'चार धाम परियोजना' पर तेजी से काम कर रही है और भारत- चीन सीमा पर ब्रह्मोस मिसाइल के साथ साथ दूसरे सैन्य उपकरणों और मिसाइलों को ले जाने के लिए व्यापक सड़क मार्ग की जरूरत होगी, जिसकी तैयारी तेजी से भारत सरकार की तरफ से की जा रही है। इसके साथ ही ग्लोबल टाइम्स ने ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत का भी जिक्र अपनी रिपोर्ट में किया है और लिखा है कि, ब्रह्मोस भारत की सबसे उन्नत सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। सेना प्रौद्योगिकी के अनुसार, 2007 से विकसित, इसे जहाजों, पनडुब्बियों, विमानों और जमीनी वाहनों पर स्थापित किया जा सकता है और इसकी सीमा 290 किलोमीटर है और रडार के लिए इस ट्रैक करना अत्यंत मुश्किल काम है।

तनाव के लिए भारत को बताया जिम्मेदार
चीनी सैन्य विशेषज्ञ सोंग झोंगपिंग भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ने के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि, "इसीलिए चीन-भारत सीमा पर तनाव बढ़ता जा रहा है और अवांछित सैन्य संघर्ष छिड़ गए हैं। ब्रह्मोस की तैनाती पश्चिमी चीन के क्षेत्र पर अतिक्रमण करने की भारत की अजेय लालची महत्वाकांक्षा को दिखाती है।'' सोंग ने कहा कि, चीन की सीमा सुरक्षा के लिए सैद्धांतिक खतरे के बावजूद, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को रोकने के लिए अपनी वायु रक्षा क्षमता को मजबूत कर रही है।

ब्रह्मोस मिसाइल से डरा ड्रैगन?
ग्लोबल टाइम्स के लेख में भारतीय मिसाइल ब्रह्मोस को लेकर उसका डर साफ तौर पर दिख गया है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि, संघर्ष के दौरान चीन के पास वो क्षमता है, कि वो ब्रह्मोस मिसाइल साइलो को ट्रैक और नष्ट कर सकचता है। चीनी विशेषज्ञ सॉन्ग ने जोर देकर कहा कि, "चीन-भारत सीमा के पश्चिमी हिस्से में भारत का खराब बुनियादी ढांचा निर्माण मिसाइल बेस की गतिशीलता और अदृश्यता को सीमित करता है।" वहीं, चीन के सिंघुआ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय रणनीति संस्थान के रिसर्च विभाग के डायरेक्टर कियान फेंग ने कहा कि, ब्रह्मोस की तैनाती को इस मामले पर भारत के कड़े रुख के ढोंग के रूप में व्याख्या किया जा सकता है, इस तथ्य के विपरीत कि दोनों पक्ष शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से सीमा के मुद्दों को हल करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं।

भारत का गर्व है ब्रह्मोस
ब्रह्मोस एक कम दूरी की रैमजेट सुपरसोनिक मिसाइल है और इस मिसाइल को रूस के साथ मिलकर भारत में बनाया गया है। इस मिसाइल में कई तरह की खासियतें हैं। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या फिर जमीन से...कहीं से भी छोड़ा जा सकता है। रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानि डीआरडीओ ने मिलकर सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल को बनाया है। यह मिसाइल रूस की पी-800 ओकिंस क्रूज मिसाइल टेक्नोलॉजी पर आधारित है। ब्रह्मोस मिसाइल को भारतीय सेना इस्तेमाल कर रही है।

ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत समझिए
ब्रह्मोस मिसाइल हवा में ही अपना टार्गेट बदल सकती है यानि हवा में ही ब्रह्मोस के रास्ते को बदला जा सकता है और ये चलते चलते लक्ष्य भेदने में सक्षम है। इसे वर्टिकल या फिर सीधे, कैसे भी दागा जा सकता है। सबसे खास बात ये है कि ब्रह्मोस मिसाइल थल सेना, वायु सेना और जल सेना तीनों के काम आ सकत है। ब्रह्मोस 10 मीटर की ऊंचाई पर भी उड़ान भरने में समझ है और दुनिया की कोई रडार इसे पकड़ नहीं सकती है। रडार ही नहीं किसी भी मिसाइल डिटेक्टिव प्रणाली को धोखा देने में ब्रह्मोस सक्षम है और इसको मार गिराना करीब करीब असम्भव है। ब्रह्मोस मिसाइल अमेरिका की टॉम हॉक से करीब दुगनी रफ्तार से वार करने में सक्षम है। भारत सरकार ने अगले 10 साल में करीब 2 हजार ब्रह्मोस मिसाइल बनाने का लक्ष्य रखा है और ब्रह्मोस मिसाइलों को रूस से लिए गये सुखोई विमानों में लगाया जाएगा।












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