China ने बनाया अदृश्य समुद्री हथियार, खतरनाक पनडुब्बियों के लिए बनेगा काल, भारत-अमेरिका के लिए टेंशन

चीन ने समुद्र के अंदर गायब रहकर, बिना रडार की पकड़ में आए, पनडुब्बियों पर वार करने वाला खतरनाक हथियार बनाया है, जो भारत और अमेरिका के लिए टेंशन की बात है।

बीजिंग, जुलाई 09: पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुका ड्रैगन समुद्र के अंदर रहने वाला एक ऐसा अदृश्य हथियार तैयार कर रहा है, जो एक गुप्त दुश्मन की तरह कभी भी दुश्मनों को निशाना बना सकता है और इस हथियार को चलाने के लिए इंसानों की जरूरत भी नहीं होगी। रिपोर्ट के मुताबिक चीन पानी के भीतर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस रोबोट विकसित कर रहा है, जो समुद्र में छिप सकता है और बिना किसी इंसानी डायरेक्शन के टॉरपीडो के साथ दुश्मन के जहाजों पर हमला कर सकता है। चीन का ये नया अदृश्य हथियार भारत के लिए टेंशन से कम नहीं है।

पानी में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस रोबोट

पानी में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस रोबोट

रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 साल पहले समुद्र के अंदर खोज करने के लिए ड्रोन बनाए गये थे, जिसका एक डमी रोबोट पानी के अंदर पनडुब्बी को खोजने और उसपर हमला करने को लेकर एक्सपेरीमेंट किया जा रहा था और रिपोर्ट है की चीन ने इस एक्सपेरिमेंट में कामयाबी हासिल कर ली है। चीन का ये रोबोट पानी के अंदर गायब रहेगा और इसे रडार से पकड़ा नहीं जा सकेगा। लेकिन पानी में गायब रहते हुए भी ये दुश्मनों के जहाजों पर टारपीडो से हमला कर सकता है। चीन ने ताइवान स्ट्रेट के पास इस आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस रोबोट यूएवी ड्रोन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है और माना जा रहा है कि अमेरिका के साथ साथ भारत के लिए भी ये बेहद बड़ी चुनौती है।

असाधारण खूबियों से लैस है रोबोट

असाधारण खूबियों से लैस है रोबोट

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक ये आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस रोबोट कई खूबियों से लैस है और टेस्ट के दौरान पाया हया कि ये रोबोट खुद समुद्र के अंदर बिना कोई इंस्ट्रक्शन दिए अपने टार्गेट की पहचान कर पा रहा है। ये रोबोट समुद्र के अंदर पनडुब्बियों को बेहद आसानी से पहचानने में सक्षम है और इसके साथ ही ये पानी के अंदर जरूरत के मुताबिक कभी भी अपना डायरेक्शन भी बदल सकता है और फिर ये उस पनडुब्बी पर टारपीडो के जरिए हमला कर सकता है। इस रोबोट ड्रोन में सोनार सिस्टम लगा हुआ है, जिससे ये काफी ज्यादा असरदार हो जाता है। इसके साथ ही रोबोट अपने सेंसर के जरिए डेटा को अपने कंप्यूटर तक भेजता है और फिर कम्प्यूटर उसे टास्क को अंजाम देने का निर्देश देता है। 2010 में हार्बिन इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस प्रयोग का जिक्र किया था, जिसे पिछले हफ्ते सार्वजनिक किया गया है। प्रोफेसर लियांग गुओलॉन्ग के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने लिखा है कि, 'भविष्य में पानी के अंदर होने वाली लड़ाई के लिए ये एक महत्वपूर्ण खोज है जो मानव रहित लड़ाई के लिए नये अवसरों को जन्म देती है''।

जापान से तनाव के बीच ऐलान

जापान से तनाव के बीच ऐलान

चीन ने ताइवान स्ट्रेट में इस मानव रहित ड्रोन रोबोट का सफलतापूर्वक टेस्ट किया है, जिसे वो अपना इलाका कहता है। दरअसल, चीन ने इस टेस्ट का अचानक कामयाब होने का ऐलान किया है और ऐसे वक्त में किया है, जब जापान ने कहा था कि अगर चीन ताइवान पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो जापान ताइवान को बचाने आएगा। जिसके जवाब में चीन ने कहा कि अगर जापान बीच में आता है तो चीन उसे बर्बाद कर देगा। वहीं, चीन की भोंपू मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में जापान को धमकी देते हुए लिखा है कि अगर जापान अमेरिका के साथ मिलकर ताइवान की रक्षा के लिए आता है, तो वो अपनी कब्र खोद रहा है। इस लेख में चीनी अखबार ने ये भी लिखा है कि 'चीन के खिलाफ जापान शक्तिहीन है' और ग्लोबल टाइम्स ने जापान को 'लाल रेखा' पार नहीं करने की चेतावनी दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी तक समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल समुद्री व्यापार में सहूलियत के लिए किया जाता रहा है और अभी तक इसका इस्तेमाल किसी लड़ाई में नहीं किया गया है।

लंबे वक्त से एक्सपेरिमेंट

लंबे वक्त से एक्सपेरिमेंट

माना जा रहा है कि चीन इस ड्रोन के लिए लंबे वक्त से तैयारी कर रहा था और पिछले कई महीनो में एशियाई के कई समुद्र तटों पर बहते हुए ड्रोन पाए गये हैं। दिसंबर महीने में इंडोनेशिया के मछुआरों ने दक्षिणी सुलावेसी द्वीप के पास समुद्री तट पर करीब 2 मीटर का लंबा मानवरहित ड्रोन को पकड़ा था। 6 दिनों के बाद इंडोनेशिया के अधिकारियों को उस ड्रोन के बारे में जानकारी दी गई, और स्थानीय मीडिया में प्रकाशित तस्वीरों में इंडोनेशियाई सैन्य अधिकारियों को लंबे भूरे रंग के ड्रोन के साथ दिखाया गया था, जिसे चीनी हैयी या 'सी विंग' के रूप में पहचाना गया था। स्थानीय मीडिया ने कहा कि ड्रोन 'मिसाइल के आकार में' था, जो एल्यूमीनियम से बना था, और दोनों तरफ 50 सेमी विंग के साथ 225 सेमी लंबा था। उपकरण से जुड़ा एक पिछला एंटीना भी 93 सेमी लंबा है। हालांकि, उस वक्त किसी ने ध्यान नहीं दिया कि चीन ऐसा कोई हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

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