China Taiwan Conflict: ताइवान पर कब्जा करने की तैयारी कर रहा चीन? इस घातक हथियार का कर रहा निर्माण
चीन ने वन नेशन की पॉलिसी के तहत सभी देशों को यह चेतावनी दे दी कि चीन के साथ राजनयिक संबंध रखने वाला कोई भी देश ताईवान के साथ अलग से संबंध नहीं रखेगा। लेकिन अमेरिका सहित कई देशों ने ताईवान के साथ संबंध बनाए रखा है।

चीन लगातार ताइवान पर कब्जा करने के लिए अलग-अलग गतिविधियां करने में लगा हुआ है। इस बीच एक रिपोर्ट आई है जिसके मुताबिक चीन अपने विरोधियों से निपटने के लिए एक नया घातक हथियार विकसित कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक चीनी विश्वविद्यालय एक कामिकेज ड्रोन विकसित कर रहा है जिसे पानी के नीचे लॉन्च किया जा सकता है। इस नवीनतम हथियार का उपयोग अमेरिका, ताइवान और प्रशांत महासागर इलाके में अन्य विरोधियों के खिलाफ कर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक पानी के नीचे लॉन्च करने की क्षमता इस कामिकेज ड्रोन को भविष्य में ताइवान के संभावित आक्रमण के दौरान चीन के लिए एक अचूक हथियार बनाती है। मिसाइलों को लॉन्च हो जाने के बाद 'कामिकेज' ड्रोन्स वापस अपने बेस पर नहीं लौटते हैं, बल्कि वो एक हमले में नष्ट हो जाते हैं, इसीलिए 'कामिकेज़' ड्रोन्स को 'सुसाइड' ड्रोन्स भी कहा जाता है।
कामिकेज ड्रोन की खासियत ये है, कि पहले ये क्षेत्र में जाकर अपने टारगेट का पता लगाता है, अपने लक्ष्य का खुद पहचान करता है और फिर उसे टारगेट को ध्वस्त करता है। दूसरी सबसे बड़ी खासियत ये है, कि क्रूज मिसाइलों की तरह ये ड्रोन भी सैकड़ों किलोमीटर दूर लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं।
हाल के दिनों में ताइवान स्ट्रेट में चीन, ताइवान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। चीन का कहना है कि वह ताइवान के मुद्दे पर किसी भी विदेशी ताकत से लड़ने को तैयार है। ताइवान की राष्ट्रपति की अमेरिका यात्रा के बाद चीन ने हाल ही में युद्धाभ्यास किया था।
ताइवान को चीन हमेशा से अपना हिस्सा बताता रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संकल्प लिया है कि जरूरत पड़ने पर वह बलपूर्वक भी इसे अपने देश के साथ मिला लेंगे।
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने ताइवान पर संभावित आक्रमण की तैयारी के लिए हाल के दिनों में के आसपास सैन्य अभ्यास किया है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि 160 किमी के ताइवान स्ट्रेट को पार कर हमला करने की जगह चीन इसके चारों ओर नाकाबंदी की कोशिश करेगा।
आपको बता दें कि चीन भले ही हथियार और सेना के मामले में ताइवान से कहीं अधिक शक्तिशाली है, लेकिन सामरिक चुनौतियों की वजह से ताइवान पर हमला बेहद मुश्किल माना जाता है। चीन पचास के दशक के बाद से ही ताइवान को खुद में शामिल करना चाहता है।
चीन में कई सरकारें आईं और गईं। सभी की चाहत ताइवान को चीन में मिलाना था, लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली। इसकी एक वजह यह है कि ताइवान बीच समुद्र में टापू नुमा देश है। ताइवान पर कब्जा करने के लिए चीन को जल, थल और वायु सेना तीनों को एक साथ उतारना होगा।












Click it and Unblock the Notifications