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अंतरिक्ष में चीन को बहुत बड़ी उपलब्धि, अपने नये स्पेस स्टेशन पर उतारा रॉकेट, NASA का वर्चस्व को चुनौती

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बीजिंग, मई 30: अर्थव्यवस्था के बाद अब चीन ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी अमेरिका को सीधी चुनौती दे दी है। चीन विश्व का दूसरा ऐसा देश बनने वाला है, जिसका अंतरिक्ष में अपना स्पेस स्टेशन हो। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा का पहले से ही इंटरनेशनल स्पेस एजेंसी है और अब चीन ने घोषणा की है उसका स्वचलित अंतरिक्षयान अभी बन रहे स्पेस स्टेशन से आसानी से जुड़ गया है। चीन के लिए ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। चीन अंतरिक्ष में लगातार नई नई कामयाबियों को हासिल कर रहा है। इसी महीने चीन ने मंगल ग्रह पर अपने रोवर को भी उतारा है, जो मंगल ग्रह पर पानी और बर्फ की तलाश में जुट गया है। वहीं, अपने नये स्पेस स्टेशन पर रॉकेट उतारकर चीन ने कीर्तिमान रच दिया है।

स्पेस स्टेशन पर उतारा रॉकेट

स्पेस स्टेशन पर उतारा रॉकेट

चीन ने अपने रॉकेट को स्पेश स्टेशन पर उतार दिया है, जिसका मतलब ये हुआ है कि भविष्य में जो भी अंतरिक्ष यात्री चीन के स्पेस स्टेशन पर उतरेंगे, उनके लिए जरूरी सामान चीन ने पहले भी भेजना शुरू कर दिया है। इस रॉकेट के द्वारा चीन ने अपने स्पेस स्टेशन पर ईंधन और दूसरे जरूरी उपरकरण और साजो सामान भेजे हैं। चीन के इस रॉकेट का नाम Tianzhou-2 है। ये रॉकेट लॉन्च होने के करीब आठ घंटे बाद स्पेस स्टेशन पर कामयाबी के साथ उतरा है। चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक चीन ने स्पेस स्टेशन पर अपने रॉकेट को भेजकर रिकॉर्ड बनाया है।

स्पेस स्टेशन पहुंचाया सामान

स्पेस स्टेशन पहुंचाया सामान

चीन के मैन्ड स्पेस के मुताबिक तिआनझोउ-2 नाम अंतरिक्षयान साउथ चायना सी में स्थित द्वीप हैनान से प्रक्षेपित किया गया था और 8 घंटे के बाद यह तिआन्हे स्पेस स्टेशन पर उतरा। चीन ने अपने रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में पहने जाने वाले कपड़े, खाने पीने के सामान, ईंधन और स्पेस स्टेशन से जुड़े दूसरे उपकरणों को भेजा है। चीन का यह कार्गो रॉकेट 10.6 मीटर लंबा, 3.35 मीटर चौड़ा है।

चीन का मिशन खतरनाक- रूस

चीन का मिशन खतरनाक- रूस

चीन के इस अंतरिक्ष मिशन को रूस ने खतरनाक बताया है। आपको बता दें कि नासा द्वारा स्थापित स्पेस स्टेशन में यूरोपीयन देश भी शामिल हैं। साथ ही अभी तक दुनिया के दूसरे देशों को भी अगर स्पेस स्टेशन की जरूरत होती है तो उसे नासा मदद करता है। लेकिन अब चीन भी स्पेश स्टेशन बना रहा है और अगले साल तक चीन का स्पेस स्टेशन पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। पहले इस प्रोजेक्ट में रूस भी शामिल था लेकिन बाद में रूस ने चीन के इस स्पेस मिशन को खतरनाक बताया था और खुद को इस स्पेस मिशन से अलग कर लिया था।

बेकाबू हुआ था चीन का रॉकेट

बेकाबू हुआ था चीन का रॉकेट

चीन ने अपने स्पेस स्टेशन के लिए सबसे महत्वपूर्ण मॉड्यूल की शुरूआत 29 अप्रैल को की थी। चीन की अंतरिक्ष एजेंसी अगले साल के अंत तक 11 रॉकेट लॉन्चिंग की योजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत 70 टन तक केन्द्र तक 2 और मॉड्यूल को बनाया जाएगा। साथ ही और दूसरे उपकरणों की सप्लाई करने के साथ साथ 3 सदस्य चालक दल को भी स्पेस स्टेशन पहुंचाएगा। आपको बता दें कि 29 अप्रैल को चीन ने जो रॉकेट छोड़ा था, वही बाद में अनियंत्रित हो गया था और धरती पर उसके गिरने को लेकर कोहराम मच गया था। बाद में चीन द्वारा भेजे गये उस रॉकेट का मलबा हिंद महासागर में गिरा था। जिसके बाद चीन की काफी आलोचना की गई थी। हालांकि, इस बार भी चीन द्वारा भेजे इस रॉकेट की क्या स्थिति होने वाली है, इसके बारे मे अभी कोई जानकारी नहीं है।

स्पेस स्टेशन का हिस्सा नहीं है चीन

स्पेस स्टेशन का हिस्सा नहीं है चीन

आपको बता दें कि इंटरनेशनल स्पेस एजेंसी का हिस्सा चीन नहीं है और इसकी बड़ी वजह अमेरिका की आपत्ति को माना जाता है। अमेरिका का मानना है कि चीन के स्पेस मिशन पारदर्शी नहीं होते हैं और चीन अपने स्पेस मिशन को लेकर क्या क्या करता है, ये किसी को पता नहीं होता है। जबकि हर स्पेस मिशन दुनिया के लिए पारदर्शी होना चाहिए। क्योंकि अगर कुछ गड़बड़ी होती है तो इसका असर किसी एक देश पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर होगी। लेकिन, चीन को इससे मतलब नहीं है। वहीं, चीन के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि यह स्पेस स्टेशन इसी साल से काम करना शुरू कर देगा और 15 सालों तक इस स्पेस स्टेशन से चीन काम ले सकेगा।

T आकार है चीनी स्पेस स्टेशन

T आकार है चीनी स्पेस स्टेशन

आपको बता दें कि अंतरिक्ष में चीन जिस स्पेस स्टेशन का निर्माण कर रहा है वो T आकार का है, जिसके बीच में मुख्य मॉड्यूल होगा जबकि दोनों तरफ प्रयोगशाला कैप्सूल होंगे। चीन के स्पेस स्टेशन के मॉड्यूल का वजन 20 टन के करीब है और जब यहां पर अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर यान पहुंचेंगे तो इसका वजन बढ़कर 100 टन तक पहुंच सकता है। चीनी वैज्ञानिकों के मुताबिक पृथ्वी की निचली कक्षा से इस अंतरिक्ष स्टेशन को करीब 340 से 350 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जा रहा है। वहीं, चीन के वैज्ञानिक लेई जियान्यु ने अपने मिशन को विश्वस्तरीय क्वालिटी का बताया है।

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English summary
China's space agency has announced that an automated spacecraft has landed at China's new space station.
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