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भारत से इतना चावल क्यों खरीद रहा चीन? अधिक धान उपजाकर कैसे हो रहा है देश को नुकसान

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नई दिल्ली, 16 जूनः चीन हमारे चावल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। आश्चर्य की बात ये है कि चीन ने भारत से कोरोनाकाल में चावल खरीदना शुरू किया है और दो सालों से भी कम समय में भारत से सबसे अधिक चावल खरीदने लगा है। चीन लगभग तीन दशकों तक भारतीय चावल को खराब बताकर खरीदने से इंकार करता रहा। लेकिन भारत और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच अब अचानक शत्रु देश का भारतीय चावल का सबसे बड़ा खरीदार बन जाना कुछ संदेह पैदा करता है।

लगभग 400 फीसदी तक बढ़ा निर्यात

लगभग 400 फीसदी तक बढ़ा निर्यात

एक विश्लेषण के अनुसार, चीन महामारी के दौरान भारतीय चावल का शीर्ष खरीदार बनकर उभरा है। चीन ने भारत से इस दौरान 16.34 लाख मीट्रिक टन (LMT) चावल का आयात किया है। यह आंकड़ा भारत की तरफ से कुल चावल निर्यात 212.10 LMT का 7.7 प्रतिशत है। साल 2021-22 में, भारत का कुल चावल निर्यात - बासमती और गैर-बासमती दोनों मिलाकर 212.10 एलएमटी था, जो कि 2020-21 में निर्यात किए गए 177.79 एलएमटी से 19.30 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में, चीन को चावल का निर्यात 392.20 प्रतिशत से बढ़कर 3.31 एलएमटी से 16.34 एलएमटी हो गया।

नुकसान का सौदा बना धान की खेती

नुकसान का सौदा बना धान की खेती

अगर व्यापारिक दृष्टि से देखा जाए तो यह बेहद अच्छी बात है कि चीन, चावल खरीद के मामले में हमारे देश पर आश्रित हो रहा है। इससे अच्छी बात क्या होगी कि हम अपने प्रोडक्ट निर्यात कर शत्रु देश से लाभ कमा रहे हैं। पर इसमें एक समस्या है। धान की खेती करना अब फायदा नहीं नुकसान का सौदा बनता जा रहा है और ये बात विकसित देश समझ चुके हैं। चीन, दीर्घकालीन सोच के साथ उन फसलों और उत्पादों को अपने यहां हतोत्साहित कर रहा है, जो अधिक पानी मांगते हैं और पर्यावरण के लिए समस्या बनते हैं।

पानी की अंधाधुंध खपत

पानी की अंधाधुंध खपत

आंकड़ों के मुताबिक हमारे किसान एक किलो चावल उगाने के लिए लगभग 5000 लीटर पानी की खपत कर रहे हैं। अंधाधुंध धान की खेती पर जोर देने के कारण भूजल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। इसकी वजह से जल और जलवायु संकट बढ़ रहा है। धान की खेती देश की अर्थव्यवस्था के साथ किसानों की राह की बड़ी चुनौती बन गए हैं। इनकी खेती से लेकर खपत तक की पूरी श्रृंखला इतनी बोझिल हो गई है कि उसे आगे बनाए रखना कठिन हो गया है।

धान की खेती से खेत बने बांझ

धान की खेती से खेत बने बांझ

हरित क्रांति के पुरोधा राज्यों पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की माटी को धान की खेती ने बांझ बनाकर रख दिया है। इसकी वजह से इन राज्यों का भूजल इतना नीचे चला गया है कि हर साल खेती से पहले नलकूपों की खुदाई करनी पड़ रही है। ऐसे में चीन जैसे देश प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन करने वाली फसलों के साथ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली खेती से दूरी बनाने लगे हैं। अत्यधिक पानी की खपत के कारण चीन, गन्ने और चावल की खेती को सीमित करने पर काम कर रहा है।

चावल की खेती से कतरा रहा चीन

चावल की खेती से कतरा रहा चीन

यही वजह है कि चीन ने खुद को चावल निर्यात से बाहर कर लिया है। और धान और गन्ने की को कम से कम करने की दिशा में काम कर रहा है। यही वजह थी कि साल 2020 के अंत में चीन ने भारत समेत कई और देशों से चावल आयात के सौदे किए थे। इसी का असर है कि 2 सालों से भी कम समय में चीन भारत के चावल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।

भारत ने पूरी दुनिया के चावल बाजारों में दबदबा कैसे कायम किया है?

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English summary
China becomes the largest importer of rice for India, but how paddy cultivation is a loss deal
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