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चीन ने तैयार की 'डेंजरस' टेक्नोलॉजी, अमेरिका-यूरोप को छोड़ेगा 30 साल पीछे, एक घंटे में पृथ्वी के तीन चक्कर

अमेरिका पिछले कई सालों से हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है तो भारत हाइपरसोनिक मिसाइलों पर काम कर रहा है। सुपरसोनिक मिसाइल बनाने में भारत ने कामयाबी हासिल कर ली है।

बीजिंग, जून 02: टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। चीन ने अपनी रफ्तार इतनी तेज कर रखी है कि वो अब धीरे धीरे पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। दुनिया के बाकी देशों को कोरोना वायरस के चक्कर में फंसाकर चीन लगातार टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम कर रहा है। पिछले एक महीने में ही देखा जाए तो चीन स्पेस में कई रॉकेट लॉन्च कर चुका है वहीं अब चीन ने हाइपरसोनिक विमानों के परीक्षण के लिए अविश्वसनीय टनल का निर्माण कर रहा है और अगर वो इस सुरंग के परीक्षण में कामयाब हो जाता है तो यकीन मानिए टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वो अमेरिका और यूरोपीयन देशों को कम से कम 30 साल पीछे छोड़ देगा।

'हाइपरसोनिक' सुरंग का निर्माण

'हाइपरसोनिक' सुरंग का निर्माण

अमेरिका पिछले कई सालों से हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है तो भारत हाइपरसोनिक मिसाइलों पर काम कर रहा है। सुपरसोनिक मिसाइल बनाने में भारत ने कामयाबी हासिल कर ली है। लेकिन, इसी बीच चीन से हाइपरसोनिक विमानों के परीक्षण के लिए एक अविश्वसनीय सुरंग की तस्वीर सामने आई है। इस सुरंग में हाइपरसोनिक विमानों का परीक्षण किया जाएगा। चीन के इस हाइपरसोनिक टनल का निर्माण कार्य चल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन जिस टनल का निर्माण कर रहा है उसमें 23 हजार मील यानि 37 हजार 13 किलोमीटर की रफ्तार से चलने वाली विमानों का परीक्षण किया जाएगा। शायद आप चौंक गये होंगे, लेकिन ये खबर पूरी तरह से सही है, कि इस टनल के जरिए चीन 37 हजार किलोमीटर की रफ्तार से विमानों को निकालकर परीक्षण करेगा। (वास्तविक तस्वीर)

ध्वनि की गति से 30 गुना रफ्तार

ध्वनि की गति से 30 गुना रफ्तार

ब्रिटिश अखबर द सन की रिपोर्ट के मुताबिक चायनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के रिसर्चर हान गुइलई ने कहा कि 'जेएफ-22 सुरंग में हाइपरसोनिक विमानों का परिक्षण किया जाएगा। इस टनल से गुजरने वाली विमानों की रफ्तार साउंड की रफ्तार से 30 गुना ज्यादा होगी'। साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्चर गुइलई ने कहा कि अगर चीन अपने हाइपरसोनिक विमानों को टनल से ध्वनि की रफ्तार से 30 गुना ज्यादा तेज निकालने में कामयाब हो जाता है तो फिर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन अमेरिका और यूरोपीय देशों के मुकाबले काफी ज्यादा निकल जाएगा। आपको बता दें कि हाइपरसोनिक विमानों और मिसाइलों को लेकर दुनिया के कुछ शक्तिशाली देश काम कर रहे हैं। जिसमें चीन के अलावा अमेरिका, रूस और भारत भी शामिल है। लेकिन, कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन में हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी के लिए काफी ज्यादा निवेश किया गया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

2 घंटे में दुनिया की सैर

2 घंटे में दुनिया की सैर

जिन हाइपरसोनिक विमानों का परीक्षण चीन कर रहा है उसकी रफ्तार ध्वनि की रफ्तार से करीब 30 गुना ज्यादा है और इस लिहाज से देखा जाए तो इन विमानों के जरिए दुनिया में कहीं भी, एक कोना से दूसरा कोना ही क्यों ना हो, महज 2 घंटे में पहुंचा जा सकता है। चीनी वैज्ञानिकों की मानें तो इस हाइपरसोनिक जेट के जरिए सिर्फ एक घंटे में धरती के तीन चक्कर लगाया जा सकता है। आपको बता दें कि धरती की व्यास 12 हजार 714 किलोमीटर है और इस विमान की रफ्तार 37 हजार किलोमीटर से कुछ ज्यादा है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आम लोग भी जा पाएंगे अंतरिक्ष

आम लोग भी जा पाएंगे अंतरिक्ष

सन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इस टेक्नोलॉजी पर लगातार काम कर रहा है और इसकी लागत को कम से कम करने की कोशिश कर रहा है ताकि आम लोगों को भी हाइपरसोनिक विमानों पर चढ़ने का मौका मिल सके। रिपोर्ट के मुताबिक चीन की कोशिश की है कि हाइपरसोनिक विमानों की लागत में 90 फीसदी तक कटौती कर दिया जाए ताकि आम लोगों के लिए अंतरिक्ष में जाने का सपना साकार हो सके और कम वक्त में अंतरिक्ष की सैर कर लोग वापस धरती पर लौट सकें। हालांकि, अगर हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी के मिसाइल या हथियार बनाने की तरफ चीन बढ़ता है तो वो बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि दुनिया में अभी ऐसे रडार नहीं बनाए गये हैं जिससे हाइपरसोनिक स्पीड को पकड़ा जा सके। वहीं, चीन की हाइपरसोनिक एजेंसी इंस्टीट्यूट ऑफ मैकेनिक्स के साथ काम करने वाले रिसर्चर गुइलई ने कहा कि जब ये जेट उड़ान भरेगा तो इसका टेम्परेचर बढ़कर 10 हजार सेल्सियस तक पहुंच सकता है और ये हवा में मौजूद अणुओं को परमाणुओं में तोड़ सकता है। रिसर्चर गुइलई ने कहा कि 'यह हवा उस तरह की हवा नहीं है जिसमें हम सांस लेते हैं बल्कि हम जिस हाइपरसोनिक का टेस्ट कर रहे हैं वो कीचड़ में तैरने जैसा है'। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

टनल की टेक्नोलॉजी

टनल की टेक्नोलॉजी

सन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के रिसर्चर गुइलई ने कहा कि 'यांत्रिक कंप्रेसर का इस्तेमाल करने के बजाए चीन हाई स्पीड हवा का प्रवाह बनाने के लिए रासायनिक विस्फोटों का इस्तेमाल करता है। जेएफ-22 में लगाए गये ईंधन में मौजूद गैस घर में इस्तेमाल होने वाले गैस स्टोव की तुलना में 100 मिलियन यानि 10 करोड़ गुना ज्यादा तेज गति से जलता है, जिससे जेट द्वारा हाइपरवेलोसिटी के समान शॉक वेव्स पैदा होता है'। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की सबसे उन्नत विंड टनल एलईएनएस-2 में उड़ाने 30 मिलीसेकेंड तक चलती हैं जबकि चीन जिस टनल का निर्माण कर रहा है उसमें औसत उड़ान सिमुलेशन 130 मिलिसेकेंड तक पहुंच सकती है। चीन के वैज्ञानिक ने दावा किया है कि बाकी देशों की तुलना में हमारी टेक्नोलॉजी काफी आगे पहुंच रही है और हाइपरसोनिक विमान मॉडल उसका सबसे बड़ा उदाहरण हो सकता है।

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