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इजराइल-हमास युद्ध को लेकर काहिरा में बैठक, मुस्लिम देशों ने PM नेतन्याहू को घेरा, लगाया वॉर क्राइम का आरोप

इजराइल-हमास युद्ध को रुकवाने के लिए मिस्र की राजधानी काहिरा में एक सम्मेलन का आयोजन हो रहा है जिसमें एक दर्जन से अधिक देशों के नेता और शीर्ष अधिकारी इकठ्ठा हुए हैं। काहिरा शांति शिखर सम्मेलन नामक बैठक मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी के नेतृत्व में हो रही है।

इस सम्मेलन में जॉर्डन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, कतर, दक्षिण अफ्रीका, यूरोपियन काउंसिल और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इस सम्मेलन में अलग-अलग देशों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

Cairo Peace Summit 2023 World leaders attend to de-escalate Israel-Hamas war

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने नेताओं को गाजा पट्टी में मानवीय आपदा को समाप्त करने और इजराइल और फिलिस्तीनियों के बीच शांति का मार्ग पुनर्जीवित करने के लिए एक रोड मैप के लिए एक समझौते पर आने के लिए आमंत्रित किया।
उन्होंने कहा कि रोड मैप के लक्ष्यों में गाजा को सहायता पहुंचाना और युद्धविराम पर सहमति शामिल है, जिसके बाद टू स्टेट समाधान के लिए बातचीत होगी।

जॉर्डन

जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला ने शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सभी नागरिकों का जीवन मायने रखता है। उन्होंने फिलिस्तीनियों की मौत पर चुप्पी साधने को लेकर पश्चिमी देशों की निंदा की। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनियों को बेघर करना पूरी अरब दुनिया के लिए चिंता की बात है।

उन्होंने कहा कि गाजा पर बमबारी करना क्रूरता है। यह लोगों के लिए सामूहिक सजा के बराबर है। यह अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानून का उल्लंघन है। जानबूझकर पानी, बिजली और बुनियादी आवश्यकताएं रोकना सही नहीं है। यह युद्ध अपराध है।

फिलिस्तीन

फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने मानवीय गलियारे खोलने के लिए कहा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोई भी चुनौती हो, हम अपनी जमीन छोड़कर कहीं और नहीं जाएंगे। इजराइल ने स्कूल, अस्पतालों से लेकर औरतों और बच्चों पर बम दागे हैं। इन्होंने हर तरह के मानवीय कानून का उल्लंघन किया है।

साउथ अफ्रीका

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि इजराइल में निहत्थे लोगों पर हमला, गाजा में घेराबंदी, बमबारी, तबाही, लोगों को घर छोड़ने के लिए मजबूर करना ये सब अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

दक्षिणी अफ्रीकी होने के नाते हम समझ सकते हैं कि फिलिस्तीन में क्या हो रहा है। हमारे लोगों ने अपनी आजादी के लिए संघर्ष किया, फिलिस्तीनी लोग भी यही कर रहे हैं। इसलिए हम समझ सकते हैं फिलिस्तीन किस दौर से गुजर रहा है।

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