सुनक ने पूरा किया वादा, ब्रिटिश संसद में पास हुआ रवांडा बिल, अब हजारों शरणार्थियों को भेजा जाएगा अफ्रीका

ब्रिटेन की संसद ने मंगलवार बहुचर्चित रवांडा बिल को पास कर दिया है। संसद के दोनों सदनों में हंगामे के बीच इस बिल को हरी झंडी दिखा दी गई। ये अवैध प्रवासियों को लेकर बना सबसे कठोर कानून है।

इस बिल के पास होने के बाद अब ब्रिटेन से अवैध प्रवासियों को रवांडा भेजा जा सकेगा। ऋषि सुनक ने पीएम बनने से पहले देश में रवांडा पॉलिसी लागू करने का वादा किया था। इस बिल के पास होने के बाद सुनक ने एक वादा पूरा करके दिखा दिया है।

Rwanda Policy

इस बिल को 2022 में तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन रवांडा के साथ हुए एक समझौता के बाद लाए थे। योजना के तहत 1 जनवरी, 2022 के बाद अवैध रूप से ब्रिटेन पहुंचने वाले लोगों को रवांडा भेज दिए जाने की योजना थी। हालांकि विवादों और कानूनी चुनौतियों की वजह से ये कानून तब लागू नहीं हो पाया।

जून 2022 में रवांडा जाने वाली पहली निर्वासन उड़ान को यूरोपीय न्यायाधीशों ने रोक दिया था। इसके बाद यूके सुप्रीम कोर्ट ने भी सर्वसम्मति से इस फैसले को बरकरार रखा था। न्यायधीशों के मुताबिक यह योजना गैरकानूनी थी क्योंकि प्रवासियों को उनके घर या अन्य देशों में वापस भेजे जाने का खतरा था जहां उनके साथ दुर्व्यवहार का खतरा होगा।

न्यायालयों से मिल रही चुनौतियों को देखते हुए सुनक सरकार ने बिल में थोड़े बदलाव किए और कानूनी चुनौतियों को खत्म कर न्यायधीशों की शक्तियों को कमजोर कर दिया। इस दौरान सरकार ने रवांडा बिल की लगभग सारी शक्तियां संसद को दी।

संसद से बिल पास होने के बाद पीएम सुनक ने एक बयान में कहा, "अब उड़ानें शुरू करने में कोई भी बाधा नहीं आएगी"। हालांकि अभी भी माना जा रहा है कि यह योजना अदालतों में चुनौतियों के कारण अभी भी रुकी रह सकती है।

इस बिल के पारित होने से पहले सुनक ने कहा कि थे कि 2-3 महीने में इसकी शुरुआत हो जाएगी। इसके लिए यूके सरकार ने कमर्शियल चार्टर प्लेन बुक किए हैं और स्टाफ को प्रशिक्षण दिया है ताकि वे शरणार्थियों को रवांडा ले जा सकें।

इस समझौते के मुताबिक, ब्रिटेन की सरकार रवांडा को अवैध शरणार्थियों के लिए 12 करोड़ पाउंड यानी कि 3 हजार करोड़ रुपए देगी। ब्रिटेन पहले ही रवांडा को 240 मिलियन पाउंड का भुगतान कर चुका है। इस रुपए से रवांडा शरणार्थियों के लिए घर और रोजगार की व्यवस्था करेगा।

रवांडा कानून के लागू होने के बाद इस साल के अंत में होने वाले चुनाव में ऋषि सुनक की कंजरवेटिव पार्टी को फायदा पहुंच सकता है। आलोचकों ने सुनक सरकार के इस रवांडा बिल की आलोचना की है। उनके मुताबिक ये बिल 'राइट टू लिव' यानी रहने के अधिकार के खिलाफ है। अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने सरकार पर कोर्ट का आदेश का पालन न करने के आरोप लगाए हैं।

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