BREXIT: ब्रिटेन और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों पर क्या होगा असर?

बोरिस जॉनसन और उज़ूला फ़ॉन दे लायन
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बोरिस जॉनसन और उज़ूला फ़ॉन दे लायन

ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए पोस्ट-ब्रेग़्जिट ट्रेड डील के बाद अब ब्रिटेन का भारत सहित दूसरे देशों के साथ 'फ्री ट्रेड' का मार्ग प्रशस्त हो गया है.

साल के आख़िरी दिन यानी 31 दिसंबर को ब्रिटेन यूरोपीय संघ के व्यापार नियमों के दायरे से औपचारिक रूप से बाहर हो जाएगा. लेकिन समझौते के बाद अब बिना किसी टैक्स के ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के देशों के बीच व्यापार चलता रहेगा.

दो हज़ार पन्नों के इस समझौते में अभी तो मुख्य रूप से व्यापार पर ही ज़ोर दिया गया है और बिना किसी टैक्स के व्यापार करते रहेने के इस क़रार के बाद यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में व्यापारियों ने राहत की सांस ली है.

भारत भी इस समझौते का बारीकी से अध्ययन कर रहा है. वैसे कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच हुए समझौते में कुछ नया नहीं है क्योंकि पहले भी वहां के व्यापारी बिना टैक्स के व्यापार करते हैं और वो आगे भी करते रहेंगे.

क्या है समझौते में?

जानकार कहते हैं कि ये समझौता एक औपचारिकता थी जिसके नहीं होने पर 31 दिसंबर के बाद अराजकता की स्थिति पैदा हो जाती.

सामरिक और विदेशी मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार मनोज जोशी कहते हैं कि अभी समझौते को पूरी तरह से समझने की ज़रूरत है. हालांकि वो कहते हैं कि इसमें भारत के लिए कुछ नहीं है.

वो कहते हैं, "इस समझौते में यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के बीच समंदर में मछली पकड़ने और आपस में क़ानूनी मामलों के निपटारे की बात हुई है. ब्रिटेन नहीं चाहता कि वहां यूरोपीय संघ की कोई अदालत हो. इसलिए ये समझौता उसके लिए अहम है."

उनका कहना है कि भारत को तब तक कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा जब तक वीज़ा को लेकर सवाल नहीं उठते या फिर भारतीय मूल के लोग कैसे रहेंगे, इसे लेकर कोई नीति नहीं बनती है. वो कहते हैं कि अभी भारत के लिए इसमें ज्यादा सोचने के लिए कुछ नहीं है.

इसी महीने की 15 तरीख को ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक रॉब के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच दस सालों के लिए एक रोड मैप बनाने पर मंथन हुआ जिसके तहत ब्रिटेन और भारत के बीच 'फ्री ट्रेड' को बढ़ावा मिल सके.

दोनों देशों ने इसे 'महत्वाकांक्षी रोड मैप' की संज्ञा दी है. इस पर मुहर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की अगले महीने भारत की प्रस्तावित यात्रा के दौरान लगनी है.

दोनों देशों के विदेश मंत्री यानी डॉमिनिक रॉब और एस जयशंकर के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भी ब्रिटेन ने स्पष्ट किया था कि वो ब्रेक्सिट के बाद विश्व भर में अपने व्यापारिक सम्बन्ध और मज़बूत करना चाहता है. खास तौर पर 'इंडो-पेसिफिक' क्षेत्र में.

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मोदी और जॉनसन
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भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार

भारत भी ब्रिटेन के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर गंभीर है और चाहता है कि दोनों देशों के बीच 'फ्री ट्रेड' के रास्ते भी खुलें. अभी तक ब्रिटेन यूरोपीय संघ के नियमों के साथ बंधा हुआ था.

विदेशी मामलों के जानकार और 'किंग्स इंडिया इंस्टिट्यूट' में अंतरराष्ट्रीय संबंध के प्रोफेसर हर्ष वी पंत कहते हैं कि भारत ने हमेशा से ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के देशों के साथ व्यापार के मामले में एक 'गेटवे' या 'मुख्य द्वार' के रूप में देखा है. ज्यादातर भारतीय व्यापारी, जो यूरोप में बाज़ार तलाश करते हैं, उन्होंने हमेशा ब्रिटेन को अपना बेस बनाया है और यूरोप में अपने व्यापार को वहीं से संचालित किया है.

हर्ष पंत के अनुसार अभी जो ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच समझौता हुआ है उससे भारत को कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ेगा. लेकिन ये भारत और ब्रिटेन में फ्री ट्रेड यानी स्वतंत्र व्यापार के रास्ते खोल देगा.

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पंत कहत हैं, "भारत को तब फ़र्क पड़ेगा जब सर्विस सेक्टर या फाइनेंशियल सेक्टर पर कोई नीति बने. वैसे ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच समझौते से अब ब्रिटेन भारत के साथ व्यापार को लेकर खुल कर कोई नीति बना सकता है. सिर्फ भारत ही नहीं ब्रिटेन के लिए और भी देशों के दरवाज़े खुलेंगे और भारत इसका फायदा उठा सकता है."

वैसे भारत ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि बनने के लिए न्योता भेजा था जिसे जॉनसन ने स्वीकार भी कर लिया है. इसी दौरान व्यापार समझौतों पर सहमती बनने की बात भी कही जा रही है. भारत के व्यापार समूह में जॉनसन के दौरे को लेकर काफी उत्सुकता है.

जब तक जॉनसन भारत आएंगे तब तक ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर हो जाएगा. तब उसे अपने हिसाब से दूसरे देशों के साथ व्यापार करने की आजादी होगी.

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