पृथ्वी से टकराया विशाल सौर तूफान, धरती के इस हिस्से में 'Blackout'
सूर्य पर सोमवार को एक महा विस्फोट हुआ था। उसकी सौर धमक आज धरती के दक्षिणी गोलार्द्ध में महूसस की गई। दक्षिण अमेरिका में ब्लैकआउट का सामना करना पड़ा। आने वाले दिनों में यह समस्या और बढ़ सकती है।

यह सही है कि पृथ्वी को सूर्य से अपार ऊर्जा मिलती है। लेकिन, सूर्य अभी जिस सौर चक्र से गुजर रहा है, उसके चलते उसकी सतह बहुत ही ज्यादा ऐक्टिव है। पिछले साल से आए दिन हम सूरज की गतिविधियों की वजह से धरती पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में देखते-सुनते रहे हैं। बड़ी संख्या में इंसानी सैटेलाइट इसके रौद्र रूप के प्रकोप में आकर भस्म हो चुके हैं। 2023 के शुरुआत में तो इसकी गतिविधियां और भी ज्यादा बढ़ी हुई नजर आ रही हैं और अभी इसके आगे भी जारी रहने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। बहरहाल, सूर्य पर सोमवार को एक ऐसा भयानक विस्फोट हुआ है, जिसके चलते धरती के एक हिस्से का आम जन-जीवन प्रभावित हो रहा है।

पृथ्वी से टकराया भयानक सौर तूफान
साल 2023 की शुरुआत से ही पृथ्वी ने सूर्य पर बढ़ी हुई गतिविधियों का सामना करना शुरू कर दिया है। साल के पहले दिन ही एक सौर तूफान धरती से टकराया था। फिर पहले ही हफ्ते इसे एक और सोलर फ्लेयर का सामना करना पड़ा। लेकिन, अबकी बार जो सौर विस्फोट हुआ है, उसकी वजह से पृथ्वी को बहुत ही ताकतवर सोलर फ्लेयर का सामना करना पड़ा है। नासा (NASA) के सोलर डिनामिक्स ऑब्जर्वेटरी (SDO) के मुताबिक मंगलवार यानि 10 जनवरी को सुबह 12:20 बजे एक X1.9 क्लास का सोलर फ्लेयर दर्ज किया गया।

धरती के इस हिस्से में 'ब्लैकआउट'
सूरज पर हुई इस घटना के बारे में स्पेसवेदर डॉट कॉम की वेबसाइट पर जानकारी दी गई है। 'पृथ्वी के चक्कर लगा रहे सैटेलाइट ने अभी एक X1.9 क्लास का सोलर फ्लेयर देखा है (9 जनवरी @1850 UT)। इसका स्रोत हाइपरऐक्टिव सनस्पॉट AR3184 है, जो सूर्य के दक्षिणपूर्वी हिस्से में उभर रहा है.....इसका रेडिएशन पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपर फैल गया है, जिससे दक्षिण अमेरिका में प्रशांत की तरफ शॉर्टवेव रेडियो ब्लैकआउट हुआ है। '

अमेरिका का कुछ हिस्सा भी प्रभावित-नासा
लेकिन, यह तबाही इतने भर तक सीमित नहीं है। वैसे, अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं है। लेकिन, हो सकता है कि सूर्य की सतह से सौर मलबा (कोरोनल मास इजेक्शन के रूप में) भी निकल सकता है, जिसके चलते आने वाले दिनों में धरती को एक और सौर तूफान का सामना करना पड़ सकता है। नासा के एसडीओ के मुताबिक सोलर फ्लेयर का अधिकतर हिस्सा दक्षिण अमेरिका और अमेरिका के कुछ हिस्सों से टकराया है।

पृथ्वी का दक्षिणी गोलार्द्ध बन रहा है निशाना
अगर आप यह सोच रहे हैं कि सोलर फ्लेयर इस समय दक्षिणी गोलार्द्ध को ही क्यों निशाना बना रहे है तो इसका कारण ये है कि इन दिनों पृथ्वी का यह हिस्सा सूर्य की ओर झुका हुआ है और वहां गर्मी का मौसम है। यही वजह है कि सूर्य से आने वाला हर रेडिएशन पृथ्वी के आधे हिस्से को ही प्रभावित कर रहा है। वहीं पहले से ऐसे सोलर फ्लेयर का शिकार बनते रहने वाला ऑस्ट्रेलिया इस समय इसलिए बचा रह रहा है, क्योंकि वह अभी नाइट-जोन में है और सूर्य की सीध में नहीं है।

रेडियो ब्लैकआउट से क्या नुकसान है ?
सूर्य के प्रकोप से होने वाले इस तरह के ब्लैकआउट से रेडियो ऑपरेटरों और एयरलाइंस के साथ-साथ उन सभी लोगों या संस्थाओं को नुकसान उठाना पड़ता है, जो संचार के लिए या आपातकालीन सेवाओं के लिए रेडियो फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल करते हैं। अभी तक की जानकारी के मुताबिक मौजूदा सोलर फ्लेयर से इसी तरह की समस्याएं पैदा होने की आशंका है। लेकिन, अगर सोलर फ्लेयर बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली हो तो इसके काफी गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। यह इतने शक्तिशाली हो सकते हैं कि ना सिर्फ जीपीएस, वायरलेस और रेडियो वेव्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं, बल्कि पावर ग्रिड और पेसमेकर और सुपरकंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रोनिक उपकरणों को भी तबाह कर सकते हैं।

सूर्य के प्रकोप का आगे भी करना पड़ सकता है सामना
यूं समझ लीजिए कि आने वाले समय में पृथ्वीवासियों को आगे भी सूरज देवता के प्रकोप का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। स्पेसवेदर डॉट कॉम ने एक अलग पोस्ट में बताया है कि 'सूर्य के पास अब दो विशाल और अस्थिर सनस्पॉट हैं: AR3182 और AR3184.ये बहुत ही भयानक विस्फोट के लिए सक्षम हैं। दोनों पृथ्वी का सामना करने के लिए तैयार हो रहे हैं, जो इस हफ्ते भू-प्रभावी सोलर फ्लेयर्स पैदा कर सकते हैं।'












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