Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

बाइडन ने इसराइली पीएम के सामने ईरान को दिया कड़ा संदेश

बेनेट और बाइडन की मुलाक़ात 24 घंटे देरी से हुई
EPA
बेनेट और बाइडन की मुलाक़ात 24 घंटे देरी से हुई

इसराइली प्रधानमंत्री नेफ़्टाली बेनेट के साथ मुलाक़ात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि अगर कूटनीति से ईरान के परमाणु संकट का समाधान नहीं होता है तो अमेरिका 'अन्य विकल्प अपनाने के लिए तैयार हैं.'

वॉशिंगटन में नए अमेरिकी राष्ट्रपति और नए इसराइली प्रधानमंत्री के बीच शुक्रवार को ये पहली मुलाक़ात हुई.

बेनेट ने राष्ट्रपति बाइडन के बयान की प्रशंसा की और कहा कि इसराइल कभी भी ईरान को परमाणु हथियार नहीं हासिल करने देगा.

काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर किए गए घातक हमले की वजह से बेनेट और बाइडन की मुलाक़ात 24 घंटों के लिए टल गई थी.

बेनेट इस साल जून में ही इसराइल के प्रधानमंत्री बने हैं. उन्होंने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम उनके एजेंडे के शीर्ष पर रहेगा.

बेनेट
EPA
बेनेट

ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है लेकिन पश्चिमी देश मानते हैं कि ईरान परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा है.

बेनेट के साथ क़रीब पचास मिनट चली बैठक के बाद बाइडन ने पत्रकारों से कहा कि हम सबसे पहले कूटनीति से ईरान के परमाणु मुद्दे को हल करने की कोशिश कर रहे हैं.

परमाणु समझौते पर अंतिम फ़ैसला बाक़ी

बाइडन ने कहा कि यदि कूटनीति नाकाम हो जाती है तो हम फिर दूसरे विकल्प भी अपनाएंगे. हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि ये विकल्प क्या होंगे.

ईरान ने 2015 में पश्चिमी देशों के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता किया था लेकिन साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को इस समझौते से अलग कर लिया था.

ईरान के साथ हुए समझौते को फिर से जीवित करने के लिए वियना में वार्ता चल रही है, लेकिन कुछ महीनों से इसमें भी कोई प्रगति नहीं हुई है.

इब्राहिम रईसी
EPA
इब्राहिम रईसी

ट्रंप ने अमेरिका को समझौते से अलग करते हुए ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए थे, जिनके जवाब में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज़ कर दिया है.

हालांकि ईरान ये कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है लेकिन अब ईरान हथियार बनाने के स्तर तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा है.

राष्ट्रपति बाइडन ने कहा है कि वो ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा लेंगे और फिर से समझौते में शामिल हो जाएंगे बशर्ते ईरान समझौते की शर्तों का सख़्ती से पालन करे.

लगी रहीं इसराइली मीडिया की नज़रें

इसराइल के मीडिया की नज़रें बाइडन और बेनेट की इस पहली मुलाक़ात पर टिकी रहीं. प्रधानमंत्री बेनेट को व्हाइट हाउस में दाखिल होते हुए और फिर बाहर निकलते हुए दिखाया गया.

इसराइली अख़बार हॉरेत्ज़ में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि बाइडन और बेनेट के बयान दर्शाते हैं कि भले ही खिलाड़ी बदल गए हैं लेकिन खेल चलता रहेगा.

इसराइली मीडिया में ये भी ज़ोर देकर बताया गया है कि बेनेट और बाइडन की मुलाक़ात तय समय से अधिक चली है जिससे पता चलता है कि ये बैठक कितनी अहम थी.

बेनेट और बाइडन
EPA
बेनेट और बाइडन

पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप और पूर्व प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के बीच गहरे और क़रीबी रिश्ते थे. ट्रंप के कार्यकाल में यरूशलम को इसराइली राजधानी के रूप में मान्यता मिली थी. इसे इसराइल की एक बड़ी कूटनीतिक जीत और अमेरिका से मिली बड़ी राहत के तौर पर देखा गया था.

अब बाइडन ने भी बेनेट को दोस्त कहा है, जिससे ये संदेश देने की कोशिश की गई है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते और भाईचारा मज़बूत बना रहेगा.

बाइडन ने ये भी कहा है कि अमेरिका इसराइल के आईरन डोम मिसाइल सिस्टम का समर्थन करता रहेगा. बाइडन ने कहा कि अमेरिका इसराइल की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है.

हालांकि, दोनों के बीच मतभेद तब नज़र आए जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "हम इसराइलियों और फ़लस्तीनियों के बीच शांति, सुरक्षा और सद्भावना बढ़ाने को लेकर भी चर्चा करने जा रहे हैं."

बेनेट ने अपने बयान की शुरुआत से पहले काबुल में मारे गए अमेरिकी जवानों को श्रद्धांजली देते हुए कहा कि "मैं यरूशलम से सद्भावना का एक नया साहस लेकर आया हूं."

हॉरेत्ज़ के लेख के मुताबिक़ जब बाइडन ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का भी मध्य-पूर्व में अमेरिका की नीति निर्धारित करने के लिए शुक्रिया अदा किया जाना चाहिए तो बेनेट उस समय गहरी सांस ले रहे थे.

मीडिया को दिए अपने बयान में बेनेट ने पूर्व प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के सख़्त लहजे को ही दोहराया.

उन्होंने कहा कि अमेरिका हमारा सबसे क़रीबी दोस्त है, यरूशलम हमारी ऐतिहासिक राजधानी है और हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे.

इसराइल ये कहता रहा है कि वह दुश्मन देशों से घिरा एक छोटा सा देश है और इसलिए इसराइल की सैन्य शक्ति को बनाए रखना ज़रूरी है.

इसराइल को फिर मिल रहा है अमेरिकी समर्थन?

अमेरिका में इस समय डेमोक्रेटिक पार्टी सत्ता में है. हाल के सालों में इसराइल के प्रति डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन कम हुआ है.

बिन्यामिन नेतन्याहू ने जब राष्ट्रपति पद के लिए डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया था तो डेमोक्रेटिक पार्टी और इसराइल के बीच दूरियां और बढ़ गई थीं.

शुक्रवार को हुई मुलाक़ात में बेनेट और बाइडन ने ये दिखाने की कोशिश भी कि वो द्विपक्षीय समर्थन को मज़बूत करने की कोशिश कर रहे हैं.

ईरान के लिए क्या है संदेश?

बाइडन ने ईरान के परमाणु मुद्दे पर कहा कि यदि कूटनीति फेल होती है तो अमेरिका अन्य विकल्पों पर भी विचार करेगा.

राष्ट्रपति बाइडन के इस बयान ने ही सबसे ज़्यादा ध्यान खींचा है और माना जा रहा है कि उन्होंने ईरान को संदेश देने की कोशिश की है.

बेनेट ने राष्ट्रपति के स्पष्ट स्टैंड पर उनका शुक्रिया भी किया और तारीफ़ भी की.

हालांकि राष्ट्रपति ने ये स्पष्ट नहीं किया कि ये विकल्प क्या-क्या हो सकते हैं लेकिन इसे ईरान के लिए एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.

हाल के महीनों में ईरान और इसराइल के बीच तनाव बढ़ा है और दोनों ने एक दूसरे के जहाज़ों पर हमले करने के आरोप लगाए हैं.

इसराइल ने ये दर्शाने की कोशिश भी की है कि वो अपनी सुरक्षा के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहेगा और ख़ुद एक्शन लेने के लिए तैयार रहेगा.

अब बाइडन और बेनेट की मुलाक़ात से ये संदेश भी दिया गया है कि अमेरिका इसराइल के साथ मज़बूती से खड़ा है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+