विदेश मंत्री जयशंकर की यात्रा से पहले चीन के तीखे तेवर, बोला-तिब्बत से जुड़े मुद्दे द्विपक्षीय संबंध में कांटा

India-China Relation: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इस सप्ताह चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं। विदेश मंत्री की ये यात्रा 2020 में लद्दाख सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सबसे घातक सैन्य झड़पों के बाद पहली चाइना यात्रा है। याद रहे 2020 में हुई ये झड़प के कारण छह दशकों में सबसे खराब द्विपक्षीय संबंध हो गए थे। हालांकि दोनों पक्ष वर्तमान में लद्दाख में आमने-सामने की स्थिति को समाप्त करने पर पिछले साल अक्टूबर में सहमत होने के बाद अपने संबंधों को सामान्य करने में लगे हुए हैं।

भारत के विदेश मंत्री जयशंकर की चाइना यात्रा से ठीक पहले चाइना को चीन ने दलाई लामा के उत्‍तराधिकारी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है। चाइना ने रविवार को कहा, "दलाई लामा के पुनर्जन्म जैसे तिब्बत से संबंधित मुद्दे द्विपक्षीय संबंधों में "कांटे" हैं जो नई दिल्ली के लिए "बोझ" बन गए हैं।

India-China Relations

शीज़ांग से संबंधित मुद्दा चीन-भारत संबंधों में कांटा है

यू जिंग ने कहा, "वास्तव में, शीज़ांग से संबंधित मुद्दा चीन-भारत संबंधों में एक कांटा है और भारत के लिए एक बोझ बन गया है। 'शीज़ांग कार्ड' खेलने का निश्चित रूप से अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा अंत होगा।" जू ने कहा, "चीनी सरकार विदेशी संगठनों या व्यक्तियों द्वारा पुनर्जन्म प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने या निर्देशित करने के किसी भी प्रयास का विरोध करती है।" जू ने कहा, "किसी भी बाहरी ताकत द्वारा किसी भी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी।"

दलाई लामा का उत्तराधिकार, हमारा आंतरिक मामला

रविवार को, चीनी दूतावास के प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया पर कहा, "रणनीतिक और शैक्षणिक समुदायों के सदस्यों, जिनमें पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं, ने दलाई लामा के पुनर्जन्म के बारे में "अनुचित टिप्पणी" की है।यू जिंग ने कहा कि ऐसे पेशेवरों को "शीज़ांग से संबंधित मुद्दों की संवेदनशीलता से पूरी तरह अवगत होना चाहिए"! याद रहे शीज़ांग नाम चीन द्वारा तिब्बत के लिए उपयोग किया जाता है। यू ने कहा, दलाई लामा का उत्तराधिकार "स्वाभाविक रूप से चीन का आंतरिक मामला है, जिसमें किसी भी बाहरी ताकत का हस्तक्षेप नहीं है।"

ड्रैगन को क्‍यों लगी मिर्ची?

दरअसल, 90वें जन्मदिन से पहले दलाई लामा ने स्‍वयं को उत्‍तराधिकारी घोषित किया था। जिस पर 9 जुलाई को चाइना ने नाराजगी व्यक्त की कि केवल उनके द्वारा स्थापित एक ट्रस्ट ही उनके पुनर्जन्म को मान्यता दे सकता है। बीजिंग ने कहा कि अगले दलाई लामा को चीनी सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाना होगा। वहीं दलाई लामा की टिप्पणियों का समर्थन केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने किया, जो धर्मशाला में आध्यात्मिक नेता के जन्मदिन समारोह में भाग लेने वाले दो मंत्रियों में से एक थे।रिजिजू ने कहा था एक बौद्ध अनुयायी के रूप में उनका मानना है कि दलाई लामा और उनका कार्यकाल ही उत्तराधिकारी पर निर्णय लेने के अधिकारी हैं। जिस पर चाइना ने इसे 'चीन विरोधी अलगाववादी रवैया' बताया था।

भारत में निर्वासन में रहे हैं दलाई लामा

बता दें दलाई लामा 1959 में चीनी सैन्य कार्रवाई के बीच तिब्बत से भागने के बाद से भारत में निर्वासन में रहे हैं। भारतमें लगभग 70,000 तिब्बती शरणार्थी और तिब्बती निर्वासित सरकार है, जो धर्मशाला सेसंचालित होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दलाई लामा और उनके हजारों अनुयायियों का भारत में रहना ये भारत के हित में है।

विदेश मंत्रालय ने दी थी ये प्रतिक्रिया

दलाई लामा की हालिया टिप्पणियों पर चीन की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद, भारत के विदेश मंत्रालय ने 4 जुलाई को कहा कि सरकार विश्वास और धर्म के विश्वासों और प्रथाओं से संबंधित मामलों पर कोई रुख नहीं अपनाती है और न ही बोलती है।

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