Bangladesh Violence: ईस्ट पाकिस्तान की वापसी? बांग्लादेश हिंसा पर एक्सपर्ट्स क्यों चिंतित, भारत के लिए अलर्ट
Bangladesh Violence: बांग्लादेश में लगातार जारी राजनीतिक अस्थिरता, विरोध-प्रदर्शन और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच विदेश मामलों के जानकार सुशांत सरीन का एक कड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश की मौजूदा सत्ता अब पूरी तरह "पाकिस्तानी प्लेबुक" पर चल रही है और देश का शासन तंत्र पाकिस्तान के प्रभाव में जाता दिख रहा है।
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में सुशांत सरीन ने कहा कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का रवैया तेजी से इनटॉलरेंट होता जा रहा है। सरकार छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शनों को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताकर पेश कर रही है, जैसा रवैया अक्सर पाकिस्तान में देखने को मिलता है।

'ईस्ट पाकिस्तान की सोच फिर लौट रही है'
हिंसा के हालात पर सरीन ने कहा, बांग्लादेश एक बार फिर अपनी ईस्ट पाकिस्तान वाली सोच की ओर लौटता नजर आ रहा है। वहां जो कुछ हो रहा है, वह पूरी तरह पाकिस्तानी तरीके की सोच जैसा है। मौजूदा शासन न तो चुना हुआ है और न ही लोकतांत्रिक, और अब यह साफ दिख रहा है कि वह पाकिस्तान के असर में है।
उनका कहना है कि 15-20 लोगों के छोटे से प्रदर्शन को भी सरकार ने ऐसे देखा, मानो देश पर कोई हमला हो गया हो। कुछ लोग पोस्टर लेकर नारे लगा रहे थे, लेकिन सरकार ने इसे हाई कमीशन पर हमले जैसा बना दिया। यह हास्यास्पद है, लेकिन पाकिस्तान में ऐसे ही हालात होते हैं। अब बांग्लादेश भी उसी रास्ते पर बढ़ रहा है।
असली चिंता अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा
सुशांत सरीन के मुताबिक, असली मुद्दा विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा है। उनका कहना है कि लोगों के प्रदर्शन पर जरूरत से ज्यादा एक्शन लेना एक बात है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा गंभीर बात है अल्पसंख्यकों की क्रॉस-परसेक्यूशन और ब्रुटल किलिंग का है। यही असली मुद्दा है, जिस पर ध्यान जाना चाहिए।
पाकिस्तानी दखल ने बढ़ाई चिंता
सरीन ने कुछ गंभीर रिपोर्ट्स का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि ऐसी खबरें आ रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान से जुड़े लोग बांग्लादेश के सरकारी दफ्तरों में बैठकर फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि पाकिस्तान से जुड़े लोग बांग्लादेश के सरकारी दफ्तरों में बैठकर तय कर रहे हैं कि क्या करना है और क्या नहीं।
सुशांत सरीन ने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच किसी तरह का रक्षा समझौता होता है, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं। उनके अनुसार, इससे बांग्लादेश में पाकिस्तान की भौतिक मौजूदगी बढ़ सकती है, जो भारत के लिए सीधा खतरा बन सकती है। अगर पाकिस्तानी सैनिक या सैन्य मदद बांग्लादेश में पहुंचती है, तो यह भारत के खिलाफ एक नया मोर्चा बन सकता है। ऐसा कदम बांग्लादेश के लिए भी नुकसानदेह साबित होगा।
फिर भी उम्मीद बाकी
कड़ी आलोचना के बावजूद सरीन ने कहा कि बांग्लादेश में अब भी समझदार लोग मौजूद हैं। वहां ऐसे लोग अब भी हैं, जो समझते हैं कि भारत और बांग्लादेश के अच्छे रिश्ते कितने जरूरी हैं। पहले दोनों देशों के रिश्ते काफी अच्छे रहे हैं। सरीन ने इसे विडंबना बताया कि बांग्लादेश भारत पर हस्तक्षेप के आरोप लगा रहा है, जबकि भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को शरण दी।
भारत को नीति पर फिर से सोचने की जरूरत
इस पूरे हालात को देखते हुए सुशांत सरीन का मानना है कि भारत को बांग्लादेश को लेकर अपनी नीति पर दोबारा विचार करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत का मौजूदा रवैया रणनीतिक संयम है या रणनीतिक जड़ता। उन्होंने कहा, "हमें यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि किसी देश के साथ हमेशा शांति बनी रहेगी। विदेश नीति में मजबूत समझ, विकल्प और दबाव की क्षमता जरूरी होती है, वरना हम अचानक मुश्किल हालात में फंस सकते हैं।"
बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमले और पाकिस्तान से नजदीकियां न सिर्फ वहां की राजनीति के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए चिंता का कारण बनती जा रही हैं।












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