तेजस नहीं राफेल खरीदेगा बांग्लादेश? 33 सालों बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति का ढाका दौरा, मैक्रों करेंगे बड़ी डील?
Bangladesh-France Rafale Deal: बांग्लादेश वायु सेना (BAF) के लिए लड़ाकू विमानों की आपूर्ति का अनुबंध जीतने के लिए यूरोफाइटर टाइफून और डसॉल्ट राफेल के बीच तेज प्रतिस्पर्धा चल रही है, लेकिन इसी बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों फौरन ढाका पहुंच गये हैं, और माना जा रहा है, कि बांग्लादेश, फ्रांस से राफेल विमान के लिए सौदा कर सकता है।
33 सालों के बाद किसी फ्रांसीसी राष्ट्रपति की बांग्लादेश यात्रा हो रही है, और भारत में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों आज बांग्लादेश में हैं, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया है।

बांग्लादेश फ्रांस से खरीदेगा राफेल?
बांग्लादेश फोर्सेज गोल्स 2030 के तहत अपने सशस्त्र बलों को आधुनिक बनाने की योजना बना रहा है और इस प्लान के तहत, BAF ने पहले ही चीन से 16 चेंगदू J-7 लड़ाकू जेट शामिल कर लिए हैं।
इसके अलावा, बांग्लादेश ने वित्तीय वर्ष 2017-2018 में आठ मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MRCA) के लिए टेंडर जारी किया हैं और माना जा रहा है, कि ये टेंडर दूसरी किश्त में चार और विमानों का ऑर्डर दे सकता है।
BAF सक्रिय रूप से दावेदारों की खोजबीन कर रहा था, जब COVID-19 ने इसकी आधुनिकीकरण योजनाओं में परेशानी पैदा कर दी। वहीं, भारत ने अपने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) को भी मैदान में उतार दिया है और अपनी भौगोलिक निकटता का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन, ऐसी रिपोर्ट है, कि बांग्लादेश यूरोपीय लड़ाकू जेट की तरफ ज्यादा झुका हुआ है।
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के एक अधिकारी ने कहा है, कि "बांग्लादेश संभवतः यूरोपीय विमान - यूरोफाइटर टाइफून या फ्रेंच राफेल का विकल्प चुनेगा। लेकिन अगले चुनाव से पहले कुछ भी फाइनल नहीं है।"
बांग्लादेशी अधिकारी ने कहा, कि "राफेल को भारतीय वायु सेना ने भी अपन बेड़े में शामिल किया है, इसीलिए बांग्लादेश राफेल पर काफी विश्वास दिखा रहा है।"
राफेल की चमक गई है किस्मत
आपको बता दें, कि भारत ने अपनी वायु सेना में 36 राफेल शामिल किए हैं और इसके अलावा भारत, अपनी नौसाने के लिए भी 26 राफेल-एम फाइटर जेट खरीदने की योजना बना रहा है। भारतीय वायुसेना में शामिल होने से फ्रांसीसी हवाई क्षेत्र प्रमुख डसॉल्ट द्वारा निर्मित राफेल का भाग्य बदल गया है और उसे कई अंतर्राष्ट्रीय खरीददार मिल रहे हैं।
हालांकि, फिलहाल यही उम्मीद है, कि बीएएफ के लिए लड़ाकू जेट सौदे को अगले साल तक अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा, क्योंकि अगले साल जनवरी में बांग्लादेश में संसदीय चुनाव होने वाले हैं।
लेकिन, राफेल के प्रति बांग्लादेश का झुकाव फ्रांसीसी राष्ट्रपति की बांग्लादेश यात्रा को 11वें घंटे में सफल बनाने में एक फैक्टर हो सकता है। राष्ट्रपति मैक्रों जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत में थे, जब यह फैसला लिया गया, कि वह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक दो दिवसीय यात्रा के लिए ढाका में होंगे।
पिछले कई वर्षों में फ्रांस-बांग्लादेश संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार तीन अरब यूरो से ज्यादा का हो गया है। बांग्लादेश का पहला उपग्रह, बंगबंधु-1, फ्रांसीसी कंपनी थेल्स द्वारा बनाया गया था।

डसॉल्ट राफेल बनाम यूरोफाइटर टाइफून डॉगफाइट
राफेल और यूरोफाइटर सैन्य विमान, दोनों समकालीन हैं, जो कई बार भयंकर प्रतिस्पर्धा में उलझ चुके हैं। दोनों मध्यम वजन वाले विमान यूरोपीय मूल के हैं।
यूरोपीय लड़ाकू जेट बनाने के लिए शुरुआत में पांच यूरोपीय देश एक साथ आए थे। अगर लड़ाकू विमान की विशेषताओं और क्षमताओं पर असहमति के कारण फ्रांस कंसोर्टियम से अलग नहीं हुआ होता, तो फिर राफेल का निर्माण ही नहीं किया जाता और उसकी जगह पर फ्रांस के पास आज यूरोफाइटर टाइफून रहता।
ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन और इटली, शीत युद्ध से सबक लेते हुए एक एडवांस फाइटर जेट बनाना चाहते थे, दूसरी तरफ, फ्रांस अधिक नौसेना-सक्षम हथियारों के साथ एक हल्का लड़ाकू जेट चाहता था।
रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट में एयरपावर और मिलिट्री टेक्नोलॉजी के सीनियर रिसर्च फेलो प्रोफेसर जस्टिन ब्रॉन्क ने दो फाइटर जेट्स के बीच अंतर बताते हुए कहा, कि "फ्रांस के अलग होने से पहले प्रारंभिक विकास और आवश्यकताओं के संदर्भ में एक सामान्य डीएनए के लिए एक साथ काम करना था। लेकिन, फ्रांस के साथ आखिरकार सहमति नहीं बन पाई और फिर फ्रांस ने राफेल बनाया, तो यूरोप ने यूरोफाइटर टाइफून डॉगफाइट।
लिहाजा, यह आश्चर्य की बात नहीं है कि दोनों विमानों में वैश्विक स्तर पर अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अपेक्षाकृत समान डिजाइन देखने को मिलते हैं।












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