बांग्लादेश ने ISI के प्यादे जमात-ए-इस्लामी को घोषित किया आतंकवादी संगठन, शहबाज शरीफ के 'मिशन' को बड़ा झटका
Bangladesh Designates Jamaat-e-Islami As Terrorist Organization: बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी करते हुए आतंकवाद विरोधी अधिनियम 2009 की धारा 18/1 के तहत कट्टरपंथी इस्लामी और पाकिस्तान के प्यादे जमात-ए-इस्लामी (JeI) और उसके स्टूडेंट विंग 'छात्र शिबिर' को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है।
बांग्लादेश सरकार का ये फैसला पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका है, जो इस संगठन के जरिए बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा था और जिसका मंसूदा देश में अराजक माहौल बनाकर शेख हसीना की सरकार को उखाड़ फेंकना था।

जमात-ए-इस्लामी आतंकी संगठन घोषित
रूस के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र, रोसिस्काया गजेटा में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताहिक, जमात-ए-इस्लामी को आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया है और प्रतिबंधित किया गया है। बांग्लादेश के अधिकारियों ने 1 अगस्त 2024 को जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगा दिया और बांग्लादेशी गृह मंत्रालय ने इसकी पुष्टि भी कर दी है।
जमात-ए-इस्लामी, छात्र शिविर और अन्य संबंधित संगठनों पर प्रतिबंध आतंकवाद निरोधक अधिनियम की धारा 18(1) के तहत एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से लगाया गया है। प्रतिबंध से पहले, कानून मंत्रालय ने अपनी कानूनी राय दी थी और फाइल गृह मंत्रालय को भेजी थी।
इसके बाद, कानून मंत्री अनीसुल हक ने संवाददाताओं से कहा, कि ये समूह अब अपने मौजूदा नामों से राजनीति में शामिल नहीं हो सकेंगे। सरकार के मंत्री जमात और छात्र शिबिर पर बांग्लादेश में पिछड़े दिनों आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर भड़के आंदोलन में हिंसा भड़काने के लिए इस संगठन पर आरोप लगा रहे हैं।
29 जुलाई को अवामी लीग के नेतृत्व में 14-पार्टी गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने अवामी लीग प्रमुख प्रधानमंत्री शेख हसीना की अध्यक्षता में एक बैठक के दौरान जमात और शिबिर पर प्रतिबंध लगाने पर सहमति जताई थी।
इससे पहले 2013 में चुनाव आयोग ने अदालत के फैसले के बाद जमात का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था।
जिसपर जमात-ए-इस्लामी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और वहां से भी निराशा मिलने के बहाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय प्रभाग ने 19 नवंबर 2023 को जमात-ए-इस्लामी के रजिस्ट्रेशन रद्द करने के फैसले को बरकरार रखते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया।

पाकिस्तान का प्यादा है जमात-ए-इस्लामी
आपको बता दें, कि बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व वाली पहली सरकार ने देश की स्वतंत्रता का विरोध करने और पाकिस्तानी कब्जे वाली सेनाओं के साथ सहयोग करने में भूमिका को लेकर जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगा दिया था। बाद में, बंगबंधु की हत्या के बाद, सैन्य तानाशाह जनरल जियाउर रहमान ने इस संगठन से प्रतिबंध हटा दिया, जिससे जमात-ए-इस्लामी को देश में अपनी गतिविधियां फिर से शुरू करने में मदद मिली।
जमात-ए-इस्लामी की स्थापना मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता सैय्यद अबुल अला मौदूदी ने "इस्लामी विजय" और "दुनिया को इस्लाम के झंडे के नीचे लाने" के कुख्यात एजेंडे के साथ की थी।
कुछ साल पहले, बांग्लादेश में अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 1971 में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान JeI की भूमिका को पाकिस्तानी कब्जे वाली सेनाओं के एक सक्रिय समूह के रूप में वर्णित किया था।
JeI ने पाकिस्तानी सेना के सहायक बलों, जैसे कि रजाकार, अल-बद्र, अल-शम्स और शांति समिति के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्होंने बंगाली स्वतंत्रता सेनानियों, विशेष रूप से हिंदुओं के खिलाफ अत्याचारों में सक्रिय रूप से भाग लिया। JeI और उसके आतंकियों ने सैकड़ों हज़ारों हिंदू पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का नरसंहार किया गया, जबकि बड़ी संख्या में हिंदू लड़कियों और महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया।
यहां यह जिक्र करना आवश्यक है, कि जमात-ए-इस्लामी पर भारत में भी प्रतिबंधित लगा हुआ है और 2003 से इसे रूसी ने भी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था। जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध की घोषणा करते हुए भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक ट्वीट में कहा था, कि "आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करते हुए सरकार ने जमात-ए-इस्लामी, जम्मू कश्मीर पर प्रतिबंध को पांच साल के लिए बढ़ा दिया है।"
1950 के दशक में, जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान ने एक उग्रवादी छात्र विंग, इस्लामी जनियत-ए-तलबा की शुरुआत की थी, जिसने कई शहरी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण हासिल कर लिया, और ये अकसर हिंसक गतिविधियों में शामिल रहा करता था।
जमात-ए-इस्लामी गाजा स्थित हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (PJI) सहित विभिन्न आतंकवादी संगठनों के साथ गहरे संबंध रखता है। यह मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ भी गहरे संबंध रखता है। यह खतरनाक इस्लामी आतंकवादी इकाई 1960 के दशक से यूरोप में मौजूद है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में भी इसकी मौजूदगी है।












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