चीन को घेरने के लिए अब बांग्लादेश को लुभाने की कोशिश, अमेरिका के उप-विदेश मंत्री पहुंचे ढाका
ढाका। अमेरिका के उप-विदेश मंत्री स्टीफन बाइगन सोमवार को भारत की यात्रा पर आए। यहां पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करने के बाद वह बांग्लादेश रवाना हो गए हैं। बाइगन 14 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक बांग्लादेश के दौर पर रहेंगे। चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रशासन के आला अधिकारी को ढाका भेजकर साफ कर दिया है कि अब वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर चीन की हर चाल को फेल करने के लिए बांग्लादेश के साथ संबंधों को पुर्नजीवित करना चाहते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं बाइगन ने जयशंकर से भी भारत के पड़ोसी पर चर्चा की और उनकी अहम राय को जानने की कोशिश की।

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बढ़ रही है चीन से करीबी
दुनिया इस बात से वाकिफ है कि कोविड-19 महामारी के समय चीन ने किस तरह से बांग्लादेश की मदद के लिए हाथ बढ़ाया था। बाइगन ट्रंप प्रशासन के पहले ऐसे बड़े अधिकारी हैं जो चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच ही ढाका गए हैं। ढाका में अमेरिकी दूतावास की तरफ से बाइगन के दौरे को लेकर आधिकारिक बयान जारी किया गया है। इस बयान में कहा गया है, 'बांग्लादेश में उप-सचिव का दौरा हमारे आजाद, मुक्त, शांत और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर एक समान नजरिए को आगे बढ़ाने वाला है जिसमें सभी के समान हित, कोविड-19 पर अमेरिका और बांग्लादेश का आपसी सहयोग और स्थिर आर्थिक विकास भी शामिल है।' बुधवार को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीन के साथ मीटिंग करने वाले हैं। इस पूरे मसले से जुड़े लोगों की मानें तो बाइगन ने भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रींगला के साथ भी क्वाड सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने को लेकर चर्चा की और इसमें उन्होंने बांग्लादेश के रोल को लेकर जानने की कोशिश की है।
भारत की तरफ से की गई पहल
बाइगन से पहले अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन कैरी और हिलेरी क्लिंटन ने भी बांग्लादेश के दौरे को लेकर अपनी मंशा जाहिर की थी। लेकिन किन्हीं कारणों से उनकी यात्रा कभी संभव नहीं हो पाई। भारत पिछले कई वर्षों से अमेरिका को बांग्लादेश के साथ आपसी संपर्क बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर चुका है। अमेरिका को भारत के अधिकारियों की तरफ से यह बताया जा चुका है कि शेख हसीना के नेतृत्व में बांग्लादेश ने तेजी से नया मोड़ लिया है। अब यह देश खालिदा जिया के चरमपंथी एजेंडे से अलग विकास के एजेंडे को वरीयता दे रहा है। चीन इस समय बांग्लादेश में जमकर निवेश कर रहा है। यह देश अब बीजिंग से अपनी मिलिट्री के लिए 80 प्रतिशत तक उपकरण खरीद रहा है। भारत की तरफ से भी 500 मिलिट्री डॉलर की लागत के साथ बांग्लादेश को मिलिट्री हार्डवेयर की पेशकश की गई थी। साल 2018 में जब तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ढाका गए थे तो उनकी तरफ से यह प्रस्ताव रखा गया था। फिलहाल इस पर अभी तक वार्ता जारी है।












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