ऑस्ट्रेलिया: छोटे कैप्सूल का बड़ा आतंक, पास से गुज़रना भी ख़तरनाक

ऑस्ट्रे्लिया में पिछले हफ़्ते ग़ायब हुआ एक छोटा-सा रेडियोएक्टिव कैप्सूल खोज लिया गया है.

अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी है. अधिकारियों ने कहा, ''आपातकाल सेवाओं को ये कैप्सूल भूसे के ढेर में मिला.''

ये कैप्सूल तब ग़ायब हो गया था, जब इसे 1400 किलोमीटर दूर की एक जगह से लाया जा रहा था.

कैप्सूल के गायब होते ही हड़कंप मच गया और इसकी छानबीन शुरू हुई.

खुदाई करने वाली नामी कंपनी रियो टिंटो ने इस कैप्सूल के ग़ायब होने पर माफ़ी मांगी थी. ये कैप्सूल अगर गलत हाथों तक पहुंच जाता तो ख़तरनाक साबित हो सकता था.

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कैप्सूल कितना बड़ा था?

कैप्सूल 8 मिलिमीटर लंबा और 6 मिलिमीटर चौड़ा है. इस कैप्सूल में कैसियम-137 था, जिससे त्वचा को नुकसान, जलन या रेडिएशन की वजह से होने वाली दिक़्क़तें भी हो सकती हैं.

आपातकाल सेवाओं का कहना है कि इस कैप्सूल की खोज के दौरान ख़ास तरह के उपकरणों का इस्तेमाल किया गया.

इस छानबीन की शुरुआत बुधवार को हुई थी.

ये कैप्सूल तब मिला, जब ख़ास तरह के उपकरणों से लैस एक गाड़ी 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी. इसी गाड़ी ने रेडिएशन को डिटेक्ट किया.

अधिकारियों ने बताया कि ये कैप्सूल सड़क से दो मीटर की दूरी पर मिला है.

सेना इस कैप्सूल की जांच कर रही है और कैप्सूल को पर्थ की एक सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया गया है.

इस कैप्सूल को वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के किमबर्ली जगह की खदान में रखा गया था. कंपनी ने कहा है कि वो कैप्सूल के ग़ायब होने की वजहों की जांच करेगी.

वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख स्वास्थ्य अधिकारी एंड्रू रॉबर्टसन ने कहा था, ''इस कैप्सूल के पास से गुज़रना कितना ख़तरनाक है, इसे यूं समझिए कि एक घंटे के अंदर आपके कोई 10 एक्सरे कर दे.''

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इस इलाक़े में पाया गया कैप्सूल

इसे जिस इलाक़े में खोजने की कोशिश की गई वो अपने आप में काफ़ी बड़ा था. ये करीब 1350 किलोमीटर का इलाक़ा था.

ये क्षेत्र रेगिस्तानी है और यहां बहुत कम आबादी है. इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया में पांच में से एक ही व्यक्ति पर्थ शहर के बाहर रहता है.

इस कैप्सूल को एक कंपनी के ज़रिए भेजा जा रहा था. कंपनी ने इसे 12 जनवरी को साइट से उठाया और पर्थ शहर की स्टोरेज फ़ैसिलिटी के लिए रवाना किया.

लेकिन जब 25 जनवरी को इसे निरीक्षण के लिए खोला गया तो जिस डब्बे में इसे रखा गया था उसे टूटा हुआ पाया गया. अंदर रेडियएक्टिव कैप्सूल भी ग़ायब था. जिस डब्बे में इसे बंद रखा गया था उसके चार बोल्ट और स्क्रू भी ग़ायब पाए गए.

अधिकारियों का कहना है कि ट्रांज़िट के दौरान लगे झटकों की वजह से नट और बोल्ट ढीले हो गए होंगे और कैप्सूल डब्बे में बने गैप से बाहर निकल गया होगा.

ये घटना ऐसे वक़्त में हुई जब रियो टिंटो ऑस्ट्रेलिया में अपनी साख़ को सुधारने की कोशिश कर रही है.

साल 2020 में रियो टिंटो ने वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया राज्य के जूकन गोर्ज इलाक़े में 46 हज़ार साल पुरानी गुफ़ाएं उड़ा दी थीं ताकि लोहे की खदान को बड़ा किया जा सके. इसके बाद हुए विवाद में कंपनी के कई अधिकारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा था.

पिछले ही साल एक संसदीय जांच से सामने आया था कि कंपनी में यौन प्रताड़ना की कई घटनाएं होती रही हैं. कंपनी ने ख़ुद एक आंतरिक रिव्यू में पाया था कि बीते पांच साल में रियो टिंटो में 20 महिलाओं ने रेप या यौन प्रताड़ना की घटना को रिपोर्ट किया है.

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