Asteroid:अगले हफ्ते धरती और चांद के बीच से गुजरेगा 2011 ES4,डबल डेकर बस से भी बड़ा होगा

नई दिल्ली- डबल डेकर बस से भी बड़े आकार का एक ऐस्टरॉइड अगले हफ्ते पृथ्वी और चांद के बीच से गुजरेगा। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस ऐतिहासिक स्पेस रॉक के अध्ययन का काम शुरू कर दिया है। हालांकि, वैज्ञानिको ने इससे धरती को किसी तरह का खतरा नहीं बताया है, लेकिन खगोलीय नजरिए से यह सौर मंडल को समझने के लिए एक बहुत ही दुर्लभ घटना है। 8.2 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार वाला यह ऐस्टरॉइड सिर्फ एक घंटे में पूरी धरती को नाप सकता है। इस 2011 में ही खोजा गया था और इसे अपना चक्कर पूरा करने में 1.14 साल लगता है।

डबल डेकर बस के आकार वाला ऐस्टरॉइड

डबल डेकर बस के आकार वाला ऐस्टरॉइड

अगले हफ्ते 1 सितंबर को 2011 ES4 नाम का एक ऐस्टरॉइड पृथ्वी और चांद के बीच से होकर गुजरने वाला है। 30 मीटर लंबे इस ऐस्टरॉइड का आकार डबल डेकर बस से भी बड़ा बताया जा रहा है। यह स्पेस रॉक पृथ्वी से चांद की दूरी के 0.3 लुनर डिस्टेंस से गुजरेगा। बता दें कि पृथ्वी और चांद की दूरी 1 लुनर डिस्टेंस में मापी जाती है, जो कि 71,000 मील के बराबर है। लगता है कि जितनी दूरी से यह ऐस्टरॉइड गुजरेगा वह काफी सुरक्षित है, लेकिन खगोलीय भाषा में यह दूरी महज एक बाल के बराबर है। नासा ने यह भी जानकारी दी है कि जिस वक्त यह ऐस्टरॉइड धरती के नजदीक से गुजरेगा उसकी स्पीड 8.2 किलोमीटर प्रति सेकेंड या 29,500 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। यह इतनी रफ्तार कि एक घंटे में यह पूरी पृथ्वी के चक्कर काट सकता है।

सौर मंडल के अध्ययन का मौका मिलेगा

सौर मंडल के अध्ययन का मौका मिलेगा

नासा के मुताबिक ऐस्टरॉइड 2011 ES4 NEO (Near Earth Object) है, जिससे उसे सौर मंडल के इतिहास के अध्ययन का एक बेहतर मौका मिलने वाला है। हालांकि, यह ऐस्टरॉइड अगर पृथ्वी से टकराता (नासा के मुताबिक ऐसा नहीं होगा) तब भी हमारे ग्रह के जीवन के लिए कोई खतरा नहीं था। अगर यह पृथ्वी पर बहुत ज्यादा भी नुकसान पहुंचा सकता था तो रूस के चेल्याबिंस्क शहर जैसी घटना हो सकती थी। 2013 में वहां उल्का पिंड गिरा था, जिसमें घरों के कांच टूट गए थे और 1,000 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे।

किसी सैटेलाइट के नुकसान की भी आशंका नहीं

किसी सैटेलाइट के नुकसान की भी आशंका नहीं

यह ऐस्टरॉइड 2011 में खोजा गया था और तब से इसे केवल 4 दिन के लिए देखा गया था। यह अपना एक चक्कर पूरा करने में 1.14 साल लगा देता है। इसकी कक्षा इसे पृथ्वी के करीब 9 साल में सिर्फ एक बार लाती है। हालांकि, यह फिर भी हम से बहुत दूर से गुजरेगा जिससे पृथ्वी या उसके आर्टिफिशल सैटलाइट को किसी तरह का खतरा नहीं है।

बेन्नू ऐस्टरॉइड पर नासा कर रहा है काम

बेन्नू ऐस्टरॉइड पर नासा कर रहा है काम

नासा का कहना है कि पृथ्वी से किसी बड़े ऐस्टरॉइड के टकराने की आशंका बहुत ही कम है। उसके मुताबिक हर साल 3,00,000 में से 1 ऐस्टरॉइड के लिए ही ऐसी आशंका हो सकती है, जो कि बड़ा नुकसान कर सकता है। हालांकि, अगर ऐसा होता है तो तबाही से इनकार नहीं किया जा सकता। शायद यही वजह है कि ऐस्टरॉइड से धरती की रक्षा के लिए अबतक कोई भी योजना पाइपलाइन में नहीं दिखती। वैसे नासा अभी बेन्नू (Bennu) नाम के ऐस्टरॉइड पर जरूर काम कर रहा है, जहां पर पिछले साल उसका स्पेसक्राफ्ट OSIRIS-Rex पहुंचा था। इस स्पेसक्राफ्ट को भेजने का कारण उस स्पेस रॉक के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाना है, जो 500 मीटर यानी आधा किलोमीटर लंबा है।

बेन्नू ऐस्टरॉइड को जान लेंगे तो सौर मंडल को समझ लेंगे

बेन्नू ऐस्टरॉइड को जान लेंगे तो सौर मंडल को समझ लेंगे

नासा को डर है कि बेन्नू ऐस्टरॉइड में वह क्षमता है कि वह पृथ्वी पर एक देश को तबाह कर सकता है। आशंका है कि यह अगले 120 वर्षों में धरती से टकरा सकता है। अमेरिकी स्पेसक्राफ्ट को सबसे बड़ी सफलता ये मिली है कि उससे सैंपल खोजने की कशिशों में वह उसके इतने नजदीक पहुंचा है, जो अबतक कभी नहीं हुआ था। अगर उससे सैंपल मिल गया तो सौर मंडल का बहुत बड़ा रहस्य सुलझ सकता है। क्योंकि, बेन्नू 4.6 अरब साल पहले हमारे आकाशगंगा के पड़ोस के निर्माण का अवशेष है। इस स्पेसक्राफ्ट से जुड़े वैज्ञानिक बशर रिज्क का कहना है कि ऐस्टरॉइड की कहानी सौर मंडल की की कहानी है। जब हम बेन्नू को जान लेंगे तो सौर मंडल के मूल को समझ लेंगे।
(तस्वीरें प्रतीकात्मक)

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