‘जेलेंस्की से पैसे मांगें’, गाजा को बर्बाद कर अब अरब देशों से पैसा मांगने पहुंचे नेतन्याहू, UAE ने सुना दिया
इजराइल-हमास युद्ध शुरू होने से पहले इजराइल में हजारों फिलिस्तीनी श्रमिक काम करते थे। युद्ध शुरू होने के बाद इजराइल ने उन सभी का लेबर कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया। इसके बाद से उन मजदूरों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो चुका है।
इसी संबंध में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से कथित तौर पर फिलिस्तीनी श्रमिकों को बेरोजगारी वजीफा देने की मांग की थी। लेकिन उनकी इस मांग को यूएई नेता ठुकरा दिया।

एक्सियोस समाचार साइट के अनुसार, बिन जायद ने नेतन्याहू से कहा, "ज़ेलेंस्की से पैसे मांगें।" उन्होंने व्यंग्यात्मक ढंग से सुझाव दिया कि यूक्रेनी राष्ट्रपति रूस के आक्रमण के बाद से कीव को मिल रहे सभी विदेशी सहायता से फिलिस्ती श्रमिकों के लिए बिल का भुगतान कर सकते हैं।
अमीरात के एक इजराइली अधिकारी ने कहा कि नेतन्याहू ने कुछ हफ्ते पहले अल नाहयान से अनुरोध किया था। UAE के एक अधिकारी ने बताया कि, "यह धारणा थी कि अरब देश, फिलिस्तीन के पुनर्निर्माण के लिए आएंगे और वर्तमान में जो हो रहा है उसके लिए बिल का भुगतान करेंगे, ये उनकी (उन देशों की) अपनी सोच है।"
7 अक्टूबर को शुरू हुए युद्ध से पहले इजराइल में लगभग 150,000 फिलिस्तीनियों के पास काम करने की परमिट मिली हुई थी। अधिकारी ने बताया कि इससे पहले UAE के राष्ट्रपति ने कहा था कि वह इजराइल को मदद देंगे, लेकिन वह नेतन्याहू के इस अनुरोध से हैरान थे।
अधिकारी ने कहा कि यूएई शासक को ये यकीन नहीं हो रहा था कि इजराइली पीएम उन्हें उन मजदूरों का भुगतान करने के लिए कह रहे हैं जो इजराइल की ही वजह से आज बेरोगजार हो चुके हैं। उन्होंने सोचा होगा कि ये संकट इजराइल द्वारा पैदा किया गया है जिसकी कीमत उनसे वसूली जाएगी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इजराइल चाहता है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और अन्य अरब देश युद्ध के बाद गाजा के पुनर्निर्माण में मदद करें। हालांकि, UAE राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के इनकार से जाहिर है कि कोई अन्य अरब देश पैसों को भुगतान करेंगे।












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